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दालचीनी के नियमित सेवन से घटेगा खराब कोलेस्ट्रॉल, रायबरेली की आयुष डॉक्टर स्मिता श्रीवास्तव से जानें फायदे और सही खुराकस्वास्थ्य
22 अग॰ 2026, 8:07 am (67 दिन पहले)· 2

दालचीनी के नियमित सेवन से घटेगा खराब कोलेस्ट्रॉल, रायबरेली की आयुष डॉक्टर स्मिता श्रीवास्तव से जानें फायदे और सही खुराक

रसोई में इस्तेमाल होने वाली दालचीनी बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में असरदार है। रायबरेली के राजकीय आयुष अस्पताल की चिकित्सक डॉ. स्मिता श्रीवास्तव ने इसके सेवन का सही तरीका और स्वास्थ्य लाभ साझा किए हैं।

भारतीय रसोईघर में प्राचीन काल से ही मसालों का उपयोग केवल भोजन का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इनका उपयोग कई शारीरिक व्याधियों के उपचार में औषधी के रूप में किया जाता रहा है। आयुर्वेद में दालचीनी को एक विशेष स्थान प्राप्त है। पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्कता बढ़ी है, जिसके कारण पारंपरिक मसालों के चिकित्सीय गुणों पर ध्यान फिर से केंद्रित हुआ है। धमनियों में जमा होने वाले मोम जैसे चिकने पदार्थ यानी कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में दालचीनी को बेहद प्रभावी माना गया है। रायबरेली जिले के राजकीय आयुष चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्सक डॉ. स्मिता श्रीवास्तव का कहना है कि दालचीनी का सही तरीके से सेवन करने से शरीर में जमा गंदा कोलेस्ट्रॉल तेजी से घट सकता है और दिल की सेहत में सुधार हो सकता है।

कोलेस्ट्रॉल की समस्या और दिल के स्वास्थ्य पर असर

कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा गाढ़ा घटक है जो हमारे रक्त में तैरता रहता है। शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण के लिए इसकी सीमित मात्रा बेहद आवश्यक होती है। हालांकि, जब रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा एक सुरक्षित सीमा से अधिक हो जाती है, तो यह स्थिति खतरनाक रूप ले लेती है। अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल रक्त धमनियों की भीतरी दीवारों पर जमने लगता है। इससे धमनियां संकरी हो जाती हैं और हृदय तथा मस्तिष्क तक होने वाला रक्त प्रवाह बाधित होने लगता है। डॉ. स्मिता श्रीवास्तव स्पष्ट करती हैं कि कोलेस्ट्रॉल को अक्सर एक साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि यह शुरुआती चरणों में बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ता है और अचानक हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियों को जन्म दे सकता है। इसलिए समय रहते इसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी होता है।

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दालचीनी कैसे करती है खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कम

दालचीनी का नियमित सेवन रक्त में मौजूद नुकसानदायक यानी बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को घटाने में मदद करता है। इसके साथ ही यह शरीर के लिए फायदेमंद गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) के स्तर को संतुलित बनाए रखने में सहयोग देता है। दालचीनी में सिनामाल्डिहाइड नामक एक शक्तिशाली मुख्य यौगिक पाया जाता है। इसके अलावा इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। ये तत्व मिलकर शरीर में रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाते हैं और धमनियों की दीवारों पर वसा के जमने की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। इस प्रक्रिया से धमनियां लचीली बनी रहती हैं और हृदय पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता है।

सेवन की सही मात्रा और इस्तेमाल करने के तरीके

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों और अध्ययनों के अनुसार, यदि दालचीनी का 1 से 6 ग्राम प्रतिदिन नियमित रूप से सेवन किया जाए, तो कोलेस्ट्रॉल के स्तर में तेजी से सुधार देखा जा सकता है। डॉ. स्मिता श्रीवास्तव के अनुसार, रोज सुबह खाली पेट एक चुटकी दालचीनी पाउडर को हल्के गुनगुने पानी के साथ लेना सबसे असरदार माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति सुबह पानी के साथ इसका सेवन नहीं कर पाता है, तो वह इसे अपनी सुबह की चाय में मिलाकर पी सकता है। इसके अतिरिक्त, दालचीनी पाउडर को नाश्ते के दलिया, स्मूदी या योगर्ट पर छिड़ककर भी खाया जा सकता है। हालांकि, इसकी मात्रा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। दैनिक रूप से केवल एक चुटकी दालचीनी का सेवन ही पर्याप्त होता है। आवश्यकता से अधिक मात्रा में इसका सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तो उसे दालचीनी का सेवन शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

टाइप 2 डायबिटीज, पाचन और अन्य शारीरिक स्वास्थ्य लाभ

दालचीनी केवल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को ही नियंत्रित नहीं करती, बल्कि यह शरीर के समग्र स्वास्थ्य के लिए भी बहुउपयोगी है। यह मसाला टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह रक्त में शुगर के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है। इसके अलावा, दालचीनी में मौजूद एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण शरीर के अंदरूनी हिस्सों की सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म में सुधार लाती है, जिससे पाचन तंत्र सुचारू रूप से कार्य करता है। शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बढ़ने से रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी मजबूत होती है। जो लोग वजन कम करना चाहते हैं या मोटापे से परेशान हैं, उनके लिए भी दालचीनी का सेवन लाभकारी हो सकता है।

सावधानियां और डॉक्टर की सलाह की आवश्यकता

यद्यपि दालचीनी के अनगिनत प्राकृतिक स्वास्थ्य लाभ हैं, फिर भी इसका उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। डॉ. स्मिता श्रीवास्तव का सुझाव है कि अधिक मात्रा में दालचीनी का सेवन यकृत या शरीर के अन्य अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को अपने दैनिक आहार में दालचीनी शामिल करने से पहले किसी योग्य चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए। नियमित और नियंत्रित मात्रा में सही विधि से लिया गया यह मसाला कोलेस्ट्रॉल घटाने और दिल की सुरक्षा में प्राकृतिक औषधि की भूमिका निभा सकता है।

सवाल-जवाब

क्या दालचीनी से बैड कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है?
हां, दालचीनी में मौजूद सिनामाल्डिहाइड और एंटीऑक्सीडेंट बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में मदद करते हैं।
रोजाना कितनी दालचीनी का सेवन करना सुरक्षित है?
सामान्य तौर पर प्रतिदिन 1 चुटकी (या अध्ययन के अनुसार 1 से 6 ग्राम तक) दालचीनी का सेवन सुरक्षित और प्रभावी माना गया है।
दालचीनी लेने का सबसे सही समय और तरीका क्या है?
सुबह खाली पेट 1 चुटकी दालचीनी पाउडर को गुनगुने पानी के साथ लेना सबसे असरदार होता है। इसे चाय, दलिया या स्मूदी में मिलाकर भी लिया जा सकता है।
क्या गर्भवती महिलाएं दालचीनी का सेवन कर सकती हैं?
गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से दालचीनी का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए।
क्या दालचीनी टाइप 2 डायबिटीज में भी मददगार है?
हां, दालचीनी ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने और टाइप 2 डायबिटीज के प्रबंधन में सहायक होती है।
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