दुनियाभर में एक समय कोहराम मचाने वाले कोरोना वायरस का उद्गम स्थल रहे चीन के वुहान शहर से अब एक और गंभीर स्वास्थ्य चिंता सामने आ रही है। इस प्रमुख मध्यवर्ती चीनी शहर में स्वास्थ्य परीक्षणों के दौरान एचआईवी संक्रमण के मामलों का पता चला है, जिससे स्वास्थ्य महकमे में चर्चा छिड़ गई है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान वुहान के बंदरगाहों और यात्रा स्वास्थ्य केंद्रों पर की गई मेडिकल स्क्रीनिंग में एड्स के मरीजों की एक उल्लेखनीय संख्या रिकॉर्ड की गई है। इस पूरी स्थिति में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि संक्रमित पाए गए लोगों में सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी छात्रों का है, जो अध्ययन के सिलसिले में वहां पहुंचे थे।
अध्ययन के आंकड़े और विदेशी छात्रों का अनुपात
सामने आए एक शोध विश्लेषण के मुताबिक वर्ष 2018 से 2025 के बीच वुहान स्थित हुबेई इंटरनेशनल ट्रैवल हेल्थ केयर Center में कुल 39,816 यात्रियों के स्वास्थ्य परीक्षण किए गए। इन सभी मेडिकल टेस्ट्स के दौरान 46 व्यक्तियों में एचआईवी का संक्रमण पाया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि हर दस हजार जांचे गए मरीजों में लगभग ग्यारह लोग एड्स पॉजिटिव मिले। शोधकर्ताओं ने अपने विश्लेषण में स्पष्ट किया कि इन 46 मामलों में से 52 प्रतिशत से ज्यादा संख्या केवल अंतरराष्ट्रीय छात्रों की थी। इसके अलावा करीब 22 फीसदी लोग वे थे जो किसी पेशेवर काम या सिलसिले से चीन आए थे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय विवाह के उद्देश्य से आने वाले सात मामले भी इस सूची में दर्ज किए गए। हालांकि शोध पत्र में इस बात का स्पष्ट जिक्र नहीं किया गया कि इनमें विदेशी और स्थानीय चीनी नागरिक दोनों शामिल थे या नहीं।
संक्रमितों का प्रोफाइल और संक्रमण के मुख्य कारण
जारी रिपोर्ट के अनुसार इस संक्रमण की चपेट में आने वाले अधिकांश लोग पुरुष थे जिनकी आयु सीमा बीस से उनतालीस वर्ष के बीच दर्ज की गई। इन सभी पॉजिटिव मामलों में लगभग आधे लोग अफ्रीकी देशों से यात्रा करके आए थे। जब शोधकर्ताओं ने एचआईवी फैलने के कारणों और माध्यमों की गहराई से जांच की तो यह बात सामने आई कि लगभग नब्बे प्रतिशत मामलों में संक्रमण का मुख्य कारण असुरक्षित यौन संबंध था। इनमें से अधिकांश मामले पुरुष और महिला के बीच बने संबंधों से जुड़े थे, जबकि पुरुषों के बीच आपसी संबंधों के मामले केवल पंद्रह प्रतिशत ही रिकॉर्ड किए गए।
वुहान को अध्ययन के लिए क्यों चुना गया
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के लिए विशेष रूप से वुहान शहर को इसलिए चुना क्योंकि इससे पहले हुए अधिकांश मेडिकल सर्वे केवल तटीय शहरों तक ही सीमित थे। इसके विपरीत वुहान चीन का एक बेहद अहम आंतरिक परिवहन केंद्र माना जाता है। इस शहर से देश के तटीय इलाकों से लेकर सुदूर पश्चिमी हिस्सों तक और विदेशों से आने-जाने वाले लोगों का भारी जमावड़ा गुजरता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र की स्वास्थ्य निगरानी पूरे देश की सार्वजनिक सुरक्षा और सेहत के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कोरोना महामारी से पुराना जुड़ाव
यह वही शहर है जहां से वर्ष 2020 में कोविड महामारी की शुरुआत हुई थी जिसने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था। उस वैश्विक आपदा के कारण दुनिया के तमाम देशों में लाखों लोगों की जान चली गई थी और करोड़ों लोग इस घातक संक्रमण से प्रभावित हुए थे। उस संकट से उबरने के लिए कई देशों को महीनों तक सख्त लॉकडाउन और पाबंदियों का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद से इस क्षेत्र की हर गतिविधि पर वैश्विक स्तर पर नजर रखी जाती है.
सीमाई जांच और निगरानी बढ़ाने के सुझाव
इस अध्ययन को तैयार करने वाले लेखकों ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि बंदरगाहों पर संक्रामक रोगों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया को और अधिक कड़ा किया जाना चाहिए। विशेष तौर पर अफ्रीका जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों पर विशेष निगरानी रखी जाए और उनकी व्यापक मॉनिटरिंग के साथ मेडिकल जांच हो। शोधकर्ताओं ने प्रशासन से आग्रह किया है कि सोशल मीडिया और विभिन्न भाषाओं के माध्यम से सुरक्षित यौन व्यवहार और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के प्रति जागरूकता फैलाई जाए। इसके अलावा सीमा पार से आने वाले स्वास्थ्य जोखिमों पर बेहतर नियंत्रण पाने के लिए अन्य देशों के स्वास्थ्य विभागों के साथ डेटा साझा करने की एक मजबूत व्यवस्था विकसित करने की बात भी कही गई है।
चीन के शैक्षणिक संस्थानों में स्वास्थ्य चिंताएं
हालांकि यह विशेष अध्ययन मुख्य रूप से केवल बाहरी यात्रियों की जांच तक ही केंद्रित था, लेकिन चीन के भीतर स्थित विश्वविद्यालयों के परिसरों में भी छात्रों के बीच एचआईवी के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई जा चुकी है। वर्ष 2019 में प्रकाशित एक वैज्ञानिक टिप्पणी में इस बात पर प्रकाश डाला गया था कि कॉलेज के विद्यार्थियों में नए संक्रमण तेजी से पैर पसार रहे हैं। चीन के भीतर वर्ष 2010 से 2019 के बीच पंद्रह से चौबीस वर्ष की आयु के छात्रों के बीच तेईस हजार से अधिक एचआईवी के मामले दर्ज किए गए थे। इनमें भी अधिकांश संख्या पुरुषों की थी और उनकी औसत उम्र लगभग बीस वर्ष थी। इस स्थिति के पीछे सीमित यौन शिक्षा को एक प्रमुख कारण के रूप में देखा जाता है।
विभिन्न शहरों के आंकड़े और प्रशासनिक रुख
शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि वुहान का यह पैटर्न पूरे देश की समग्र स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उदाहरण के लिए, दक्षिण चीन के फुझोउ शहर में 2013 से 2024 के दौरान 98 एचआईवी पॉजिटिव मामले सामने आए जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा मजदूरों और किसानों का था। इसी तरह चेंगदू में भी विदेशी नागरिकों के मामलों में श्रमिकों की संख्या सबसे ऊपर थी, जबकि अंतरराष्ट्रीय छात्र दूसरे स्थान पर रहे। चीन के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण प्रशासन के एक अधिकारी ने हाल ही में बयान देते हुए कहा था कि देश में एचआईवी का कुल प्रसार अभी भी अपेक्षाकृत कम स्तर पर बना हुआ है। वुहान के इस अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि बंदरगाहों पर जांच और जागरूकता के स्तर को बढ़ाकर संभावित जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विदेशी छात्रों सहित उच्च जोखिम वाले तमाम समूहों तक सटीक जानकारी पहुंचाना और नियमित जांच को बढ़ावा देना इस दिशा में प्रभावी कदम साबित हो सकता है, हालांकि इस रिपोर्ट में विदेशी छात्रों के बीच संक्रमण दर अधिक मिलने से कुछ देशों के लिए यह चिंता का विषय अवश्य बन गया है।



















