डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर दमकती त्वचा, रातों-रात पिंपल्स गायब करने और निखार पाने के अनगिनत वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन लघु वीडियो और रील्स में अक्सर किसी खास फेयरनेस क्रीम, सीरम या मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली दवाओं को चमत्कारिक बताकर इस्तेमाल करने का दावा किया जाता है। ऐसे भ्रामक विज्ञापनों और टिप्स से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में युवा अपनी त्वचा की वास्तविक प्रकृति और शारीरिक जरूरतों को समझे बिना इन दवाओं और प्रोडक्ट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। हालांकि, त्वचा विशेषज्ञों ने इस चलन पर गंभीर चिंता जताई है और युवाओं को बिना डॉक्टरी परामर्श के ऐसी दवाओं के सेवन व प्रयोग से दूर रहने की सख्त सलाह दी है।
त्वचा की विशिष्ट प्रकृति और वायरल नुस्खों का खतरा
त्वचा विशेषज्ञ डॉक्टर रिद्धी पांडे के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति की त्वचा का प्रकार, उसकी संवेदनशीलता और उसकी आंतरिक संरचना एक दूसरे से बिल्कुल भिन्न होती है। किसी एक व्यक्ति की त्वचा पर सकारात्मक प्रभाव दिखाने वाला ब्यूटी प्रोडक्ट या सीरम अनिवार्य रूप से दूसरे व्यक्ति के लिए भी सुरक्षित और प्रभावी साबित हो, ऐसा सोचना बहुत बड़ी भूल है। सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले घरेलू नुस्खे या कमर्शियल प्रोडक्ट्स बिना किसी क्लिनिकल जांच के प्रचारित किए जाते हैं। जब युवा बिना सोचे-समझे इनका प्रयोग करते हैं, तो त्वचा का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है और त्वचा पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगते हैं।
सामान्य पिगमेंटेशन को बीमारी समझने की बड़ी भूल
अक्सर देखा जाता है कि लोग चेहरे या त्वचा पर होने वाले सामान्य पिगमेंटेशन, हल्के दाग-धब्बों अथवा धूप के प्रभाव से होने वाले कालेपन को कोई गंभीर बीमारी मान लेते हैं। इसके बाद वे सोशल मीडिया पर सुझाए गए केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स, फेयरनेस क्रीम या इंटरनेट पर बताए गए नुस्खों का लगातार इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। इस प्रकार के उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कठोर रसायन त्वचा की बाहरी परत को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके परिणामस्वरूप त्वचा में तेज जलन, लगातार खुजली, लालिमा और पिगमेंटेशन के और अधिक गहरे होने जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। कई मामलों में सामान्य से दिखने वाले हल्के दाग भी रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण स्थायी रूप से गहरे हो जाते हैं।
मुंहासों के इलाज में लापरवाही और दवाओं का अनियंत्रित उपयोग
मुंहासों यानी पिंपल्स की समस्या से जूझ रहे 20 से 40 वर्ष की आयु के युवा भी सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर मेडिकल स्टोर से सीधे दवाएं खरीदकर इस्तेमाल करने लगते हैं। डॉक्टरी परामर्श के बिना ली जाने वाली इन दवाओं से मुंहासों की समस्या ठीक होने के बजाय और अधिक बिगड़ जाती है। दवाओं के गलत चयन, अत्यधिक मात्रा में सेवन अथवा लंबे समय तक बिना निगरानी के इस्तेमाल से त्वचा के साथ-साथ आंतरिक अंगों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसी भी प्रकार की त्वचा संबंधी समस्या होने पर खुद इलाज करने की जगह किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करना ही एकमात्र सुरक्षित उपाय है।
हार्मोनल संतुलन पर असर और महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी जोखिम
बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे उत्पाद और स्टेरॉयड युक्त दवाएं उपलब्ध हैं, जिनका अनियंत्रित उपयोग शरीर के नाजुक हार्मोनल सिस्टम को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। जब शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, तो महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता, चेहरे पर अनचाहे बालों का उगना और चयापचय से जुड़ी अन्य जटिलताएं सामने आने लगती हैं। हालांकि सभी सौंदर्य प्रसाधन हार्मोनल समस्याएं पैदा नहीं करते, लेकिन संदिग्ध सामग्री वाले उत्पादों, घटिया रसायनों और बिना डॉक्टरी पर्चे के बेची जाने वाली दवाओं का इस्तेमाल इस प्रकार के स्वास्थ्य जोखिमों को कई गुना बढ़ा देता है।
सुरक्षित स्किन केयर और डॉक्टरी सलाह की आवश्यकता
आजकल 20 से 40 साल के आयु वर्ग के युवा अपनी शारीरिक उपस्थिति और त्वचा की देखभाल को लेकर बेहद संवेदनशील हैं और वे कम समय में त्वरित परिणाम पाना चाहते हैं। इसी जल्दबाजी का फायदा उठाकर सोशल मीडिया रील्स उन्हें गलत दिशा में मोड़ देती हैं। डॉक्टरों की स्पष्ट सलाह है कि केवल किसी वीडियो को देखकर कोई भी क्रीम, फेस वॉश या सीरम तुरंत खरीदना बंद करें। किसी भी प्रोडक्ट को अपनाने से पहले उसमें शामिल तत्वों, उसके संभावित दुष्प्रभावों और अपनी त्वचा के प्रकार का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना आवश्यक है। यदि त्वचा से जुड़ी कोई परेशानी लगातार बनी रहती है, तो सोशल मीडिया के नुस्खों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की परामर्श प्रक्रिया ही सबसे उत्तम मार्ग है।



















