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क्या शराब सिर्फ लिवर को ही नुकसान पहुंचाती है? डॉक्टर ने बताया दिमाग और अन्य अंगों पर पड़ने वाले घातक असरस्वास्थ्य
8 जुल॰ 2026, 9:38 am (112 दिन पहले)· 2

क्या शराब सिर्फ लिवर को ही नुकसान पहुंचाती है? डॉक्टर ने बताया दिमाग और अन्य अंगों पर पड़ने वाले घातक असर

अक्सर लोगों को लगता है कि शराब का सेवन केवल लिवर को खराब करता है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मस्तिष्क और हृदय को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है। यह लेख शराब के कारण होने वाले याददाश्त के नुकसान और अन्य शारीरिक जटिलताओं के बारे में विस्तार से बताता है।

यह एक आम धारणा है कि शराब का सेवन केवल लिवर को नुकसान पहुंचाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि शराब का घातक प्रभाव लिवर से कहीं आगे तक जाता है। शराब आपके दिल और मस्तिष्क पर भी उतना ही गहरा और बुरा असर डालती है। चिकित्सा जानकारों के अनुसार, शराब हृदय रोगों के जोखिम को काफी बढ़ा देती है। इतना ही नहीं, हमारा मस्तिष्क भी शराब से होने वाली क्षति के प्रति बेहद संवेदनशील है। शोध और क्लिनिकल अनुभव बताते हैं कि शराब की मामूली मात्रा भी मस्तिष्क की सूचनाओं को ग्रहण करने, उन्हें प्रोसेस करने और याद रखने की क्षमता में बाधा डालती है।

मस्तिष्क के कामकाज पर शराब का प्रभाव

फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा में वरिष्ठ सलाहकार न्यूरोलॉजिस्ट और क्लिनिकल लीड डॉक्टर नेहा पंडिता के अनुसार, शराब के प्रभाव से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर निरंतर बुरा असर पड़ता है। भले ही ये बदलाव शुरुआती दौर में सूक्ष्म या मामूली लग सकते हैं, लेकिन समय के साथ वे मस्तिष्क की सक्रियता में बड़ी गिरावट ला सकते हैं। शराब से प्रभावित होने वाली सबसे महत्वपूर्ण संरचनाओं में हिप्पोकैम्पस शामिल है, जो हमारे सीखने और याददाश्त की प्रक्रियाओं का केंद्र है। शराब के कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, जिससे दैनिक घटनाओं को याद रखना कठिन हो जाता है। यह स्थिति ब्लैकआउट जैसी हो सकती है, जहां व्यक्ति सक्रिय होते हुए भी कुछ याद नहीं रख पाता, जिससे याददाश्त कमजोर होती है और बेहोशी जैसा अनुभव हो सकता है।

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एकाग्रता और निर्णय क्षमता में गिरावट

शराब केवल याददाश्त पर ही चोट नहीं करती, बल्कि यह मस्तिष्क के फ्रंटल लोब को भी नुकसान पहुंचाती है। यह हिस्सा योजना बनाने, ध्यान केंद्रित करने, निर्णय लेने और आवेग पर नियंत्रण रखने के लिए जिम्मेदार है। जब कोई व्यक्ति कॉग्निटिव डिक्लाइन का शिकार होता है, तो उसका असर केवल याद रखने में कमी तक सीमित नहीं रहता। बातचीत को सही तरीके से समझना, नामों को याद रखना, कठिन समस्याओं को हल करना या छोटे निर्णय लेना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। धीरे-धीरे पेशेवर जीवन, स्कूल की गतिविधियों या रोजमर्रा के कामों में ध्यान लगाना और मल्टीटास्किंग करना अत्यंत कठिन और धीमा हो जाता है।

नींद की गुणवत्ता पर बुरा असर

बहुत से लोग यह मानकर शराब का सेवन करते हैं कि इससे अच्छी नींद आएगी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। डॉक्टर पंडिता के मुताबिक, शराब गहरी नींद और आरईएम (REM) स्लीप दोनों को बाधित करती है। ये दोनों अवस्थाएं यादों को सुदृढ़ करने और मस्तिष्क को पुनर्जीवित करने के लिए अनिवार्य हैं। नींद की गुणवत्ता में कमी के कारण अगले दिन ध्यान की कमी, सोचने में सुस्ती और नई चीजों को सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय गिरावट महसूस की जा सकती है।

पोषक तत्वों की कमी और न्यूरोलॉजिकल विकार

लगातार और अत्यधिक शराब पीने का सीधा असर शरीर के पोषण पर भी पड़ता है। शराब के कारण शरीर में विटामिन बी1 या थायमिन का स्तर खतरनाक रूप से कम होने लगता है। थायमिन एक स्वस्थ मस्तिष्क के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक पोषक तत्व है। इसकी कमी मस्तिष्क के उन हिस्सों को क्षतिग्रस्त कर सकती है जो संज्ञानात्मक कार्यों के लिए जरूरी हैं। लंबे समय तक थायमिन की कमी से वर्निके एन्सेफेलोपैथी और कोर्साकॉफ सिंड्रोम जैसे गंभीर तंत्रिका संबंधी विकारों का खतरा बढ़ जाता है, जो जीवन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

व्यक्तिगत भिन्नता और बचाव के उपाय

शराब का असर हर व्यक्ति पर अलग होता है। आपके पीने की अवधि और मात्रा सीधे तौर पर स्वास्थ्य गिरावट के जोखिम को तय करती है। इसके अलावा, उम्र, आनुवंशिकी, पूर्व से मौजूद बीमारियां और व्यक्तिगत पोषण स्तर भी इस पर प्रभाव डालते हैं कि आपका मस्तिष्क शराब के प्रति कैसे प्रतिक्रिया करेगा। डॉक्टर पंडिता का सुझाव है कि भूलने की बीमारी, ध्यान की कमी या निर्णय लेने में स्पष्ट बदलावों को केवल उम्र या व्यस्त जीवनशैली मानकर नजरअंदाज न करें। इनके पीछे शराब का सेवन एक प्रमुख कारण हो सकता है। मस्तिष्क और समग्र स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का एकमात्र उपाय है शराब से दूरी बनाना और एक स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना।

सवाल-जवाब

क्या शराब का असर केवल लिवर पर होता है?
नहीं, शराब का सेवन हृदय और मस्तिष्क पर भी गंभीर और घातक प्रभाव डालता है, जो याददाश्त और संज्ञानात्मक कार्यों को प्रभावित करता है।
शराब याददाश्त को कैसे प्रभावित करती है?
शराब मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस को नुकसान पहुंचाती है, जो सीखने और याद रखने के लिए जिम्मेदार है, जिससे याददाश्त में कमी और ब्लैकआउट की स्थिति हो सकती है।
क्या शराब पीने से नींद अच्छी आती है?
बिल्कुल नहीं, शराब गहरी नींद और आरईएम स्लीप को बाधित करती है, जो यादों को मजबूत करने और मस्तिष्क को पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक है।
शराब और विटामिन बी1 के बीच क्या संबंध है?
अधिक शराब के सेवन से शरीर में थायमिन यानी विटामिन बी1 की कमी हो जाती है, जो गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकारों का कारण बन सकती है।
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