धूप हमारे शरीर के लिए बेहद आवश्यक मानी जाती है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से हमारे शरीर में विटामिन D के निर्माण को सक्रिय करने में मदद करती है। हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा की संवेदनशीलता एक जैसी नहीं होती और सभी लोग सूर्य की तेज किरणों को आसानी से सहन नहीं कर पाते हैं। कुछ लोगों के साथ यह समस्या होती है कि वे जैसे ही थोड़ी देर के लिए भी तेज धूप में बाहर कदम रखते हैं, वैसे ही उनकी त्वचा पर गंभीर खुजली, लालिमा या छोटे-छोटे लाल दाने उभरने लगते हैं। अधिकांश लोग इस तरह की समस्या को सामान्य गर्मी के कारण होने वाले रैशेज, घमौरियां या पसीने की जलन समझकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि असल में यह सन एलर्जी की गंभीर समस्या हो सकती है। सामान्य तौर पर इस एलर्जी का असर शरीर के उन हिस्सों पर सबसे ज्यादा दिखाई देता है जो सीधे तौर पर सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आते हैं, जिनमें हमारा चेहरा, गर्दन, हाथ, कंधे और बाहें शामिल हैं।
सन एलर्जी के प्रमुख लक्षण और उनकी पहचान
जब किसी व्यक्ति को सन एलर्जी होती है, तो उसके लक्षण त्वचा पर बहुत स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं। इस समस्या की शुरुआत में सबसे पहले प्रभावित हिस्से पर तेज खुजली का अहसास होता है। खुजली शुरू होने के कुछ ही देर बाद त्वचा का वह हिस्सा पूरी तरह से लाल होने लगता है। बहुत से लोगों की संवेदनशील त्वचा पर छोटे-छोटे लाल रंग के दाने या उभरे हुए चकत्ते निकल आते हैं, जिनमें लगातार असहनीय खुजली होती रहती है। कुछ गंभीर मामलों में प्रभावित हिस्से की त्वचा पर सूजन भी आ सकती है। यदि एलर्जी का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाए, तो त्वचा पर पानी से भरे छोटे-छोटे फफोले भी विकसित हो सकते हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि धूप से हटकर छांव या ठंडी जगह पर आने के बाद भी जलन और असहजता कई घंटों तक कम नहीं होती है। कुछ प्रभावित लोगों को ऐसा भी महसूस होता है जैसे उनकी त्वचा के भीतर कोई सुई जैसी कोई चीज लगातार चुभ रही हो।
किन लोगों को होता है सन एलर्जी का सबसे अधिक खतरा?
सन एलर्जी की यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में इसका जोखिम काफी बढ़ जाता है। जिन लोगों की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील होती है, उनमें इस एलर्जी के होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। इसके अलावा, यदि किसी परिवार में पहले से ही किसी सदस्य को धूप से एलर्जी होने का इतिहास रहा है, तो अगली पीढ़ी में भी इसका जोखिम स्वाभाविक रूप से बढ़ सकता है। कुछ विशेष प्रकार की दवाएं भी इस समस्या को बढ़ाने का काम करती हैं। उदाहरण के लिए, कुछ एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएं या मुंहासों के उपचार में उपयोग की जाने वाली कुछ विशेष दवाएं त्वचा को सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों के प्रति सामान्य से कहीं अधिक संवेदनशील बना देती हैं। इनके अतिरिक्त, जो लोग किसी ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित हैं, उनमें भी धूप के प्रति इस प्रकार की संवेदनशीलता और एलर्जी अधिक देखी जाती है।
सामान्य टैनिंग और सन एलर्जी के बीच का मुख्य अंतर
अक्सर लोग त्वचा के काले पड़ने यानी टैनिंग को ही सन एलर्जी समझने की भूल कर बैठते हैं, लेकिन इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर होता है। जब हम लंबे समय तक धूप में रहते हैं, तो त्वचा का रंग गहरा या काला हो जाता है, जिसे टैनिंग कहा जाता है और यह एक अत्यंत सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है जिसमें किसी भी प्रकार की खुजली, दर्द या दाने नहीं होते हैं। इसके विपरीत, सन एलर्जी एक प्रकार की प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया है। इसमें धूप के संपर्क में आने के कुछ ही मिनटों या कुछ घंटों के भीतर ही त्वचा पर तीव्र खुजली, लालिमा, रैशेज या पानी से भरे फफोले दिखाई देने लगते हैं। यही कारण है कि इन दोनों स्थितियों को एक समान मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और त्वचा की स्थिति को गंभीरता से समझना चाहिए।
सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाव के कारगर उपाय
यदि आपको धूप में बाहर निकलने के बाद बार-बार इस तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो आपको अपनी जीवनशैली में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करने की आवश्यकता है। सबसे पहले, सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर बाद 4 बजे के बीच, जब सूरज की किरणें सबसे तेज और तीखी होती हैं, उस दौरान लंबे समय तक सीधे धूप में रहने से पूरी तरह बचें। जब भी किसी आवश्यक कार्य से बाहर जाना हो, तो हमेशा पूरी बाजू के हल्के और ढीले कपड़े पहनें ताकि त्वचा ढकी रहे। इसके साथ ही एक चौड़ी पट्टी वाली टोपी और UV-प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस का उपयोग अवश्य करें ताकि आंखों और चेहरे का बचाव हो सके। त्वचा के जो हिस्से सीधे हवा और धूप के संपर्क में रहते हैं, उन पर बाहर निकलने से कम से कम बीस मिनट पहले ब्रॉड-स्पेक्ट्रम SPF 30 या उससे अधिक क्षमता वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं और आवश्यकता पड़ने पर इसे दोबारा लगाते रहें। अपने शरीर में पानी की कमी न होने दें, प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें और त्वचा को हमेशा अच्छी तरह से मॉइस्चराइज रखें।
गंभीर लक्षण दिखने पर डॉक्टर से कब संपर्क करें?
धूप के संपर्क में आने के बाद यदि आपकी त्वचा पर हर बार बहुत अधिक गंभीर खुजली होती है, बड़े-बड़े लाल चकत्ते बन जाते हैं, त्वचा पर फफोले पड़ने लगते हैं, चेहरे पर अत्यधिक सूजन आ जाती है, या फिर धूप में रहने के कारण सांस लेने में कठिनाई अथवा चक्कर आने जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर बिना समय गंवाए तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बार-बार होने वाली सन एलर्जी के वास्तविक कारणों की पहचान करने और उसके सही तथा सुरक्षित उपचार के लिए किसी विशेषज्ञ त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना ही सबसे सुरक्षित और सही तरीका माना जाता है।











