पलामू में खराब होती जीवनशैली और खानपान का सीधा असर लोगों के दांतों पर साफ दिखाई दे रहा है। आज के समय में जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और ज्यादा मीठे पदार्थों के सेवन से युवा अवस्था में ही दांतों में कीड़े लगना, मसूड़ों से खून आना और सेंसिटिविटी जैसी गंभीर समस्याएं आम हो गई हैं। मुंह की सफाई में कोताही बरतने से दांत न केवल कमजोर हो रहे हैं, बल्कि सांसों में दुर्गंध जैसी परेशानी भी पैदा हो रही है। इस स्थिति को देखते हुए बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए ओरल हाइजीन यानी मुंह की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
जबड़ों की मजबूती के लिए एक्सरसाइज
स्वस्थ दांत सिर्फ भोजन को चबाने में मदद नहीं करते, बल्कि ये हमारे पाचन तंत्र और शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य की नींव भी हैं। मार्शल आर्ट विशेषज्ञ सुमित वर्मन के अनुसार, यदि आप अपने दांतों और जबड़ों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो नियमित देखभाल के साथ कुछ सरल व्यायाम बहुत प्रभावी साबित हो सकते हैं। सुमित वर्मन का मानना है कि प्रकृति से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। जंगल में रहने वाले जानवर कभी ब्रश नहीं करते, लेकिन उनके दांत हमेशा मजबूत बने रहते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि वे लगातार अपने जबड़ों का भरपूर उपयोग करते हैं। जबड़े चलाने की यह प्राकृतिक प्रक्रिया उनकी मांसपेशियों को सक्रिय और लचीला बनाए रखती है। इसी सिद्धांत को अपनाकर इंसान भी अपने जबड़ों को मजबूत कर सकते हैं।
व्यायाम का तरीका
सुमित वर्मन ने सलाह दी कि सुबह उठकर कुछ मिनट का समय निकालकर अपने जबड़ों को दाएं-बाएं और गोलाकार घुमाएं। यह एक साधारण लेकिन असरदार व्यायाम है। इसके साथ ही, ओ और एक्स जैसी ध्वनियों को स्पष्ट रूप से बोलने का अभ्यास करने से चेहरे और जबड़े की मांसपेशियों को अच्छी कसरत मिलती है। सुमित का कहना है कि अगर किसी को कोई मेडिकल समस्या नहीं है, तो सीमित मात्रा में शुगर-फ्री च्युइंगम चबाना भी फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इससे चबाने की क्षमता में सुधार होता है और जबड़े सक्रिय रहते हैं।
पारंपरिक और आधुनिक देखभाल का महत्व
दांतों को सुरक्षित रखने के लिए सही तरीके से ब्रश करना सबसे बुनियादी जरूरत है। सुमित वर्मन के मुताबिक, सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले ब्रश करना दांतों की सेहत के लिए सबसे अच्छी आदत है। उन्होंने दांतों की सफाई के पुराने और पारंपरिक तरीकों की भी चर्चा की। प्राचीन समय में लोग नमक, सरसों के तेल और कोयले जैसे प्राकृतिक चीजों का उपयोग करके दांतों को साफ रखते थे। इसके अलावा नीम और चिचड़ी जैसे पौधों की दातून का इस्तेमाल करना भी मुंह की स्वच्छता बनाए रखने का एक असरदार तरीका रहा है, जो आज भी काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।











