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पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगी वन तुलसी के इस्तेमाल को लेकर एक्सपर्ट ने दी बड़ी सलाहस्वास्थ्य
9 जुल॰ 2026, 1:27 pm (45 दिन पहले)· 1

पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगी वन तुलसी के इस्तेमाल को लेकर एक्सपर्ट ने दी बड़ी सलाह

वन तुलसी पारंपरिक चिकित्सा में सर्दी, खांसी और त्वचा संबंधी दिक्कतों के लिए बेहद गुणकारी मानी जाती है, लेकिन गंभीर संक्रमणों के इलाज में विशेषज्ञ की देखरेख और सही खुराक का होना अनिवार्य है।

आयुर्वेद में वन तुलसी को औषधीय गुणों का एक बेहतरीन और प्राकृतिक भंडार माना गया है। ग्रामीण अंचलों, खेतों की मेड़ों और खाली पड़े मैदानों में आसानी से स्वतः उग जाने वाला यह पौधा सदियों से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक अहम हिस्सा रहा है। जानकारों का कहना है कि इस गुणकारी पौधे की पत्तियां, तना और इसके बीज कई तरह के पारंपरिक घरेलू नुस्खों में बहुत काम आते हैं। हालांकि, इसके तमाम फायदों के बावजूद इसका किसी भी प्रकार का इस्तेमाल हमेशा स्वास्थ्य विशेषज्ञों की उचित सलाह के बाद ही किया जाना चाहिए।

विभिन्न शारीरिक समस्याओं में वन तुलसी के फायदे

आयुर्वेदाचार्य वैद्य अभिषेक कुमार मिश्र के अनुसार, वन तुलसी में कई ऐसे प्राकृतिक और औषधीय गुण मौजूद होते हैं जो शरीर को सेहतमंद रखने में मदद करते हैं। इसकी हरी पत्तियों से तैयार किया गया लेप त्वचा की कुछ सामान्य समस्याओं और विकारों को दूर करने के लिए प्रभावित स्थान पर लगाया जाता है। इसके अलावा, बदलते मौसम में होने वाली सर्दी, खांसी, गले में होने वाली खराश से राहत पाने के लिए और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में इसका पारंपरिक उपयोग बेहद फायदेमंद माना गया है।

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ब्लैक फंगस जैसी गंभीर बीमारियों पर विशेषज्ञ की चेतावनी

यद्यपि आयुर्वेद के सिद्धांतों में वन तुलसी का उपयोग कुछ सामान्य फंगल संक्रमणों के इलाज में एक सहायक औषधि के तौर पर करने का जिक्र मिलता है, लेकिन ब्लैक फंगस जैसी जानलेवा बीमारी का इलाज अकेले वन तुलसी से करना कतई मुमकिन नहीं है। वैद्य अभिषेक कुमार मिश्र बताते हैं कि म्यूकरमाइकोसिस, जिसे आमतौर पर ब्लैक फंगस कहा जाता है, एक बहुत ही गंभीर और तेजी से फैलने वाला संक्रमण है। इस बीमारी का उचित इलाज केवल और केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में ही होना चाहिए। ऐसे गंभीर मामलों में किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को केवल डॉक्टर की सलाह पर ही सहायक चिकित्सा के रूप में शामिल करना चाहिए।

सही खुराक और विशेषज्ञ की सलाह क्यों है अनिवार्य

वन तुलसी का काढ़ा बनाने, इसका रस निकालने या इसकी पत्तियों का औषधीय लेप तैयार करने का एक तय पैमाना और सही तरीका होता है। इस बात की सही जानकारी न होने पर यदि इसका जरूरत से ज्यादा मात्रा में सेवन कर लिया जाए, तो इसका सेहत पर विपरीत असर भी पड़ सकता है। इसलिए बिना पूरी जानकारी के किसी भी औषधीय पौधे को जादुई इलाज मानकर खुद से उपचार शुरू करने की गलती नहीं करनी चाहिए। अगर कोई बीमारी या संक्रमण लंबे समय तक ठीक न हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराकर वैज्ञानिक इलाज करवाना ही सबसे सुरक्षित और सही कदम है।

सवाल-जवाब

वन तुलसी का उपयोग किन सामान्य समस्याओं में किया जा सकता है?
वन तुलसी का पारंपरिक रूप से सर्दी, खांसी, गले की खराश, इम्यूनिटी बढ़ाने और त्वचा की सामान्य समस्याओं के लिए लेप के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
क्या वन तुलसी से ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) का इलाज किया जा सकता है?
नहीं, ब्लैक फंगस एक अत्यंत गंभीर संक्रमण है जिसका इलाज वन तुलसी से संभव नहीं है। इसके लिए तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से वैज्ञानिक उपचार कराना जरूरी है।
बिना डॉक्टरी सलाह के वन तुलसी का अधिक सेवन करने से क्या नुकसान हो सकता है?
सही मात्रा और तरीके की जानकारी न होने पर वन तुलसी के अत्यधिक सेवन से शरीर पर विपरीत या हानिकारक असर पड़ सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार गंभीर बीमारियों में वन तुलसी की क्या भूमिका है?
गंभीर बीमारियों में आयुर्वेदिक औषधियों या वन तुलसी को केवल डॉक्टर की सलाह के अनुसार सहायक उपचार (सपोर्टिव थेरेपी) के रूप में ही शामिल किया जाना चाहिए।
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