पोलियो एक अत्यंत खतरनाक और संक्रामक बीमारी है जो सीधे तौर पर बच्चों के तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम को निशाना बनाती है। पोलियोवायरस के संक्रमण की वजह से होने वाला यह रोग मुख्य रूप से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। इस संक्रमण के कारण बच्चे के अंगों में हमेशा के लिए लकवा यानी विकलांगता आ सकती है। कुछ अति गंभीर परिस्थितियों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है और बच्चे की जान तक जा सकती है।
हालांकि इस लाइलाज बीमारी से सुरक्षा पाने का एकमात्र और सबसे असरदार जरिया समय पर टीकाकरण है। यही कारण है कि नवजात शिशु के जन्म के तुरंत बाद उसे पोलियो की वैक्सीन दी जाती है और दवा पिलाई जाती है। भारत को इस घातक बीमारी से मुक्त बनाने में 'दो बूंद जिंदगी की' जन अभियान ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। आइए इस विषय पर विस्तार से समझें कि टीकाकरण क्यों अनिवार्य है और बच्चों को कब तक इसकी खुराक मिलनी चाहिए।
विश्व पोलियो दिवस का क्या है महत्व
प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस मनाया जाता है। इसकी स्थापना रोटरी इंटरनेशनल द्वारा प्रसिद्ध अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. जोनास साल्क के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में की गई थी, जिन्होंने पोलियो का पहला सफल टीका विकसित किया था। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर पोलियो के प्रति जन-जागरूकता पैदा करना और इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के संकल्प को और अधिक मजबूत करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने वर्ष 2014 में भारत को आधिकारिक तौर पर पोलियो मुक्त राष्ट्र घोषित किया था, जबकि देश में पोलियो का आखिरी मामला साल 2011 में दर्ज किया गया था।
क्यों जरूरी है पोलियो का टीकाकरण
पोलियोवायरस मुख्य रूप से किसी संक्रमित व्यक्ति के मल के सीधे संपर्क में आने या फिर दूषित पानी और भोजन के सेवन से फैलता है। एक बार यह वायरस शरीर के भीतर प्रवेश कर जाए तो यह सीधे तंत्रिका तंत्र को भारी नुकसान पहुंचाता है। इसके परिणामस्वरूप बच्चे को जीवनभर के लिए स्थायी विकलांगता झेलनी पड़ सकती है। चूंकि पोलियो का कोई कारगार इलाज मौजूद नहीं है, इसलिए टीकाकरण ही इससे बचाव का सबसे अचूक उपाय है। तय समय सीमा के भीतर बच्चों को पोलियो की वैक्सीन लगवाने से उनमें इस संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
किस उम्र तक पिलानी चाहिए पोलियो की दवा
देशभर में शून्य से पांच साल तक के बच्चों को राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत ओरल पोलियो वैक्सीन यानी OPV की खुराक पिलाई जाती है। इस विशेष अभियान के दौरान हर बच्चे को यह दवा अवश्य पिलानी चाहिए, भले ही उन्हें पहले से नियमित टीकाकरण के तहत टीके लग चुके हों। बच्चों को इस बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार की वैक्सीन का उपयोग किया जाता है। ओरल पोलियो वैक्सीन मुंह के रास्ते पिलाई जाती है और पल्स पोलियो अभियान के तहत पांच साल से कम उम्र के सभी बच्चों को दी जाती है। इसके अलावा इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन यानी IPV इंजेक्शन के माध्यम से दी जाती है जिसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तय शेड्यूल के अनुसार ही लगवाना आवश्यक होता है।
पोलियो से बचाव के लिए क्या कदम उठाएं
अपने बच्चों का टीकाकरण हमेशा समय पर करवाएं और जब भी पल्स पोलियो अभियान चलाया जाए, तो मिलने वाली खुराक को बिल्कुल न छोड़ें। इसके साथ ही अपने घर और आस-पास के परिवेश में पूरी साफ-सफाई बनाए रखें, हमेशा शौचालय का ही उपयोग करें तथा कुछ भी खाने से पहले और शौच के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यह हमेशा ध्यान रखें कि भारत की पोलियो मुक्त स्थिति को भविष्य में भी बरकरार रखने के लिए देश के प्रत्येक बच्चे का समय पर टीकाकरण होना बेहद जरूरी है।

















