स्मार्टफोन की स्क्रीन पर अंगुलियां फिराते रहना, सोशल मीडिया पर लगातार स्क्रॉल करना और हर पल खुद को दूसरों के मुकाबले बेहतर दिखाने की होड़ आज के दौर में रोजमर्रा के तनाव की सबसे बड़ी वजह बन चुकी है। हर समय ऑनलाइन रहने का यह दबाव लोगों की मानसिक सेहत पर भारी पड़ रहा है, जिससे एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी दिक्कतें आम हो गई हैं। इसी डिजिटल शोरगुल के बीच एक बेहद अनोखा और दिल छू लेने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसे लोग दादी-नानी वाले शौक के रूप में अपना रहे हैं। जब इंटरनेट का वजूद नहीं था, तब घरों में बुजुर्ग महिलाएं और मांएं अपने फुर्सत के पलों को बेहद रचनात्मक, धैर्य से भरे और सुकून देने वाले कामों में लगाती थीं। यह कोई जल्दबाजी वाले काम नहीं थे, बल्कि हाथों से धीरे-धीरे संवारे जाने वाले हुनर थे, जो अब आधुनिक जीवन में मानसिक शांति का एक मजबूत जरिया बन रहे हैं।
तकनीक से दूरी और संवेदी अनुभवों की वापसी
दादी-नानी वाले शौक किसी को चिढ़ाने वाला शब्द नहीं, बल्कि पिछली पीढ़ियों से विरासत में मिली उन सरल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक प्यार भरा नाम है, जिनमें किसी गैजेट या तकनीक की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती। स्क्रीन और नोटिफिकेशन की निरंतर आवाज से दूर होकर जब कोई व्यक्ति अपने हाथों से कुछ गढ़ता है, तो दिमाग को आराम करने का स्वाभाविक अवसर मिलता है।
आर्ट थेरेपिस्ट एमिली शार्प के अनुसार, इन शौकों की सबसे खास बात यही है कि इनमें तकनीक का कोई दखल नहीं होता। जब हम इन कामों में समय बिताते हैं, तो हमें अपनी गति को धीमा करना पड़ता है, अपनी इंद्रियों से चीजों को महसूस करने का मौका मिलता है और बिना किसी मानसिक दबाव के हम अपनी रचनात्मकता को व्यक्त कर पाते हैं। मॉर्डन जीवनशैली में लोगों के पास से यही ठहराव और संवेदी अनुभव गायब हो गए थे, जिनकी कमी अब शिद्दत से महसूस हो रही है।
मानसिक राहत देने वाले 10 पारंपरिक शौक
अगर आप भी रोजमर्रा की आपाधापी और स्क्रीन टाइम के भारीपन से बाहर निकलना चाहते हैं, तो पिछली पीढ़ियों के ये दस हुनर दिमाग को शांत करने में बेहद असरदार साबित होते हैं
- ऊन की बुनाई और क्रोशिया: सलाई या क्रोशिया की मदद से ऊन के फंदे गिनना और स्वेटर या शॉल तैयार करना बिखरे हुए ध्यान को एक जगह बांध देता है। इस प्रक्रिया में होने वाला दोहराव मन को एकाग्र करता है और चिंता को दूर भगाता है।
- हाथ की कढ़ाई और सिलाई (क्रॉस-स्टिच): कपड़े पर सुई और धागे से महीन आकृतियां उकेरना तनाव कम करने का सबसे पुराना और परखा हुआ साधन है। सुई के हर टांके पर लगने वाला ध्यान बेचैन विचारों को थामने में मदद करता है।
- मिट्टी के बर्तन बनाना: पहिए पर घूमती गीली मिट्टी को हाथों से छूकर उसे बर्तन का रूप देना स्पर्श की इंद्रिय को शांत करता है। यह काम इंसान को जमीन से जोड़ता है और मन को गहरा विश्राम देता है।
- पेंटिंग और ड्राइंग: खाली कागज पर रंगों के जरिए अपने विचारों और कल्पनाओं को उतारना आंतरिक भावनाओं को बाहर निकालने का सबसे सुरक्षित तरीका है। इसमें किसी खास नियम की बंदिश नहीं होती, जिससे भावनात्मक राहत मिलती है।
- बागवानी: क्यारियों में हाथ से मिट्टी तैयार करना, पौधों की जड़ों में पानी डालना और घरेलू हर्ब्स उगाना इंसान को सीधे कुदरत के करीब ले जाता है। मिट्टी की खुशबू और हरी पत्तियों की देखरेख मूड को तरोताजा कर देती है।
- घर की रसोई में बेकिंग: बाजार से पैकेटबंद सामान खरीदने के बजाय खुद अपने हाथों से ब्रेड या कुकीज तैयार करने का संतोष अलग ही अहसास कराता है। आटे को गूंथना और ओवन से उठती खुशबू को महसूस करना मन को तृप्त करता है।
- कागज पर हाथ से चिट्ठियां लिखना: तुरंत मैसेज भेजने के दौर में फाउंटेन पेन या कलम से सादे कागज पर अपने विचार लिखना किसी मानसिक चिकित्सा जैसा प्रभाव छोड़ता है। यह प्रक्रिया विचारों को व्यवस्थित करने का मौका देती है।
- पहेलियां और पारंपरिक बोर्ड गेम्स: सुडोकू, क्रॉसवर्ड या पुराने बोर्ड गेम्स खेलना दिमाग को स्वस्थ चुनौती देता है। बिना किसी स्क्रीन के यह दिमागी कसरत एकाग्रता को मजबूत बनाती है और तनाव से मुक्त रखती है।
- सुबह के समय बर्ड वॉचिंग: सुबह के शांत माहौल में खुले आसमान या पेड़ों पर पक्षियों की हरकतों को देखना और उनकी चहचहाहट सुनना मानसिक थकान को कुछ ही मिनटों में खत्म कर देता है।
- पैचवर्क या रजाई तैयार करना: बचे हुए कपड़ों के छोटे-छोटे टुकड़ों को आपस में जोड़कर खूबसूरत रजाई या चादर बनाना रचनात्मकता को पंख देता है। अलग-अलग रंगों और कतरनों को सलीके से सजाना मन को खुशी और संतुष्टि देता है।
हसल कल्चर से ऊबकर लोग क्यों लौट रहे जड़ों की तरफ
सोशल मीडिया पर शॉर्ट वीडियो या रील्स स्क्रॉल करना बहुत आसान लग सकता है, जबकि किसी नए हुनर को सीखने में थोड़ी मेहनत और सब्र जरूर लगता है। लेकिन जो सुकून और स्थिरता हाथों से काम करने के बाद हासिल होती है, उसकी तुलना स्क्रीन के क्षणिक मनोरंजन से नहीं की जा सकती।
केप टाउन क्राफ्ट क्लब की संस्थापक, लेखिका और फाइबर आर्टिस्ट एंडी रीव्स के अनुसार, पारंपरिक क्राफ्ट की लोकप्रियता आज बहुत तेजी से बढ़ रही है। आज के युवा हर वक्त व्यस्त दिखने और लगातार भागते रहने की तथाकथित हसल कल्चर वाली सोच से पूरी तरह थक चुके हैं। वे अब स्क्रीन से अपना ध्यान हटाकर ऐसी चीजों की तलाश में हैं जिन्हें वे अपनी उंगलियों से छू सकें, महसूस कर सकें और बिना किसी मशीनी मदद के खुद अपने दम पर तैयार कर सकें। इसके अलावा, एक ऐसी दुनिया में जहां बाजार में मिलने वाली ज्यादातर चीजें मशीनों से तैयार होकर एक जैसी दिखती हैं, अपने हाथों से बनाई गई कोई भी कलाकृति इंसान को अपनी विशिष्ट पहचान और व्यक्तिगत गर्व का अनुभव कराती है।
अपनी व्यस्त दिनचर्या में से थोड़ा समय निकालकर इनमें से किसी भी पारंपरिक हुनर को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना अवसाद और मानसिक उलझनों से उबरने में किसी प्राकृतिक उपचार की तरह असर दिखा सकता है। इस सप्ताहांत स्मार्टफोन को खुद से थोड़ा दूर रखकर अपने मनपसंद पुराने शौक को चुनना मानसिक शांति की तरफ एक बेहतरीन शुरुआत हो सकता है।


















