हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बारिश का कहर जारी है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने राज्य के सोलन और सिरमौर जिलों में सभी स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को पूरी तरह से बंद रखने का निर्णय लिया है। पिछले चौबीस घंटों से सिरमौर जिले में लगातार हो रही तेज बरसात के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जिसके बाद सिरमौर की DC प्रियंका वर्मा ने शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी घोषित करने के आदेश जारी किए। इसी तरह का सुरक्षात्मक कदम सोलन जिले में भी उठाया गया है, जहां शुक्रवार को सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का निर्देश दिया गया है।
सोलन में ऑरेंज अलर्ट और सुरक्षात्मक उपाय
सोलन जिले के DC मनमोहन शर्मा द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 10 जुलाई के लिए सोलन जिले में ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। खराब मौसम के इस पूर्वानुमान को देखते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 30 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सभी सरकारी व निजी स्कूलों, कॉलेजों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों को शुक्रवार के दिन बंद रखने का फैसला लिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक बाढ़, पेड़ों के उखड़ने और सड़कों के बंद होने से छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश के कारण संपर्क मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हालांकि, छात्रों के लिए छुट्टी होने के बावजूद सभी शिक्षकों और अन्य स्कूल कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
मौसम विभाग का त्वरित अलर्ट और आगामी घंटों का पूर्वानुमान
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला द्वारा सुबह ठीक आठ बजे एक ताजा बुलेटिन जारी किया गया है। इस मौसम पूर्वानुमान में बताया गया है कि अगले तीन से चार घंटों के भीतर प्रदेश के बिलासपुर, किन्नौर, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, मंडी, सिरमौर, सोलन और शिमला सहित आठ जिलों के अधिकांश हिस्सों में हल्की से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। इसके साथ ही, सिरमौर जिले के एक या दो स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है, जबकि शिमला और सोलन जिलों में भी कुछेक स्थानों पर मूसलाधार वर्षा की संभावना जताई गई है।
भूस्खलन के कारण मुख्य राजमार्ग और संपर्क मार्ग बाधित
पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद भूस्खलन और चट्टानें खिसकने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। शिमला के विकासनगर में भूस्खलन की चपेट में आने से दो गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। वहीं दूसरी ओर, मंडी जिले में पंडोह से आगे खोतीनाला के समीप चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाईवे पर शुक्रवार की सुबह भारी भूस्खलन होने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया था। इस मार्ग के बाधित होने से बसों की आवाजाही थम गई, हालांकि छोटे वाहनों को किसी तरह निकाला जा रहा था। कड़ी मशक्कत के बाद अब इस हाईवे को बड़ी गाड़ियों के लिए भी बहाल कर दिया गया है। इसके अलावा, कुल्लू जिले में भी यातायात प्रभावित हुआ है, जहां गुशैणी रोड़ पर देहूरी से थोड़ा पीछे सड़क पर अचानक बड़ी चट्टानें गिरने के कारण मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। साथ ही, सैंज न्यूली संपर्क मार्ग भी एक बड़े लैंडस्लाइड की वजह से बंद पड़ा है। औट लुहरी नेशनल हाईवे 305 पर खनाग के समीप देवदार का एक विशालकाय पेड़ गिरने से सड़क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है, जिसे साफ करने का प्रयास किया जा रहा है।
लाहौल-स्पीति में मौसम की दोहरी मार, किसानों की बढ़ी चिंता
जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में पिछले कई दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पूरी घाटी में कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है। मौसम का यह बदलाव वनस्पति और स्थानीय घास के मैदानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। पर्याप्त नमी मिलने के कारण प्राकृतिक चारागाह हरे-भरे हो गए हैं, जिससे पशुपालकों को बड़ी राहत मिली है। लेकिन इसके विपरीत, क्षेत्र के नकदी फसलों के किसानों की रात की नींद उड़ गई है। लाहौल घाटी में इस समय मटर, गोभी और अन्य नकदी फसलें पूरी तरह से पककर तैयार हैं और उन्हें जल्द ही मंडियों में बेचने के लिए भेजा जाना था। इस नाजुक समय पर हो रही लगातार बारिश के कारण खेतों में अत्यधिक नमी जमा हो गई है। इससे फसलों में फंगस या अन्य बीमारियां लगने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे फसलों की गुणवत्ता खराब हो सकती है और पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। किसानों को डर है कि इस गीले मौसम के कारण कटाई का काम भी समय पर पूरा नहीं हो पाएगा, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी घाटी के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने का अनुमान लगाया है।











