हिमाचल प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू को बड़ी कानूनी राहत मिली है। राज्य के हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दायर की गई उस शिकायत को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें उन पर होटल कारोबारी को धमकाने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधवालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले में चल रही कार्यवाही को औपचारिक रूप से समाप्त करने का आदेश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 28 अक्टूबर 2023 को हुई थी, जब पालमपुर के एक होटल व्यवसायी निशांत शर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को एक ईमेल और लिखित आवेदन भेजा था। अपनी शिकायत में निशांत शर्मा ने आरोप लगाया था कि राज्य के तत्कालीन डीजीपी संजय कुंडू उन्हें डरा-धमका रहे हैं और अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इन आरोपों को काफी संवेदनशील मानते हुए उच्च न्यायालय ने 10 नवंबर 2023 को स्वत: संज्ञान लेकर मामले में हस्तक्षेप किया था और सरकार से स्थिति रिपोर्ट की मांग की थी।
जांच में निकलकर आए तथ्य
अदालत में पेश की गई एसआईटी की रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि निशांत शर्मा द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए तमाम आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत थे। अदालत ने अपने अवलोकन में साफ कहा कि शिकायतकर्ता का असली मकसद न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करना, चल रही जांच की दिशा को प्रभावित करना और अपने व्यक्तिगत व्यावसायिक विवादों में लाभ हासिल करना था।
व्यावसायिक विवाद और सच्चाई
अदालत ने पाया कि निशांत शर्मा का अपने बिजनेस पार्टनर केशव दत्त श्रीधर के साथ कंपनी के पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। निशांत शर्मा ने आरोप लगाया था कि धर्मशाला के मैक्लोडगंज में उन पर और उनके परिवार पर हमला किया गया, लेकिन जांच में यह दांव उल्टा पड़ गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता ने कानूनी शिकंजे से बचने और सहानुभूति बटोरने के लिए यह झूठी कहानी रची थी।
फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने संजय कुंडू को यह अनुमति भी दी कि वह निशांत शर्मा के खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी को रद्द करवाने के लिए कानूनी रूप से अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। साथ ही, अदालत ने दोनों पक्षों को निर्देश दिए कि वे अपने बाकी बचे विवादों के समाधान के लिए संबंधित निचली अदालतों, जैसे कि सीजेएम कांगड़ा और एसीजेएम शिमला में अपना पक्ष रखें।











