हरियाणा और हिमाचल प्रदेश दोनों राज्यों में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और अगले एक हफ्ते तक झमाझम बारिश का सिलसिला थमने वाला नहीं है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने हरियाणा में 12 जुलाई तक रुक-रुक कर बारिश का पूर्वानुमान जताया है, जिसमें कुछ इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी भी शामिल है। वहीं पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा से लेकर सिरमौर तक कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जो बताता है कि अगले दो दिन प्रदेश के लिए बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं।
हरियाणा में सात दिन कैसे बदलेगा मौसम
7 जुलाई के लिए मौसम विभाग ने तेज बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है, यानी हफ्ते की शुरुआत ही बारिश के साथ होगी। 7 से 9 जुलाई के बीच राज्य में सबसे ज्यादा बारिश देखने को मिलेगी। 8 जुलाई को अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र और आसपास के जिलों में रुक-रुक कर बारिश जारी रहेगी, जिससे इन इलाकों में जनजीवन प्रभावित हो सकता है। 9 जुलाई को राज्य के ज्यादातर जिलों में आसमान में बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश होगी। इसी दिन कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी परेशानी बढ़ा सकती हैं। 10 जुलाई को भी बारिश थमने का नाम नहीं लेगी, और निचले इलाकों में पानी भरने से आवाजाही में दिक्कत आ सकती है। 11 जुलाई को बारिश की तीव्रता में कुछ कमी आएगी, हालांकि गरज-चमक के साथ हल्की फुहारें पड़ती रहेंगी। 12 जुलाई को मौसम एक बार फिर करवट लेगा और मानसूनी हलचल दोबारा तेज हो जाएगी। 13 जुलाई को भी हरियाणा के कई जिलों में बारिश दर्ज की जाएगी, जबकि जिन इलाकों में बादल नहीं बरसेंगे, वहां उमस लोगों को बेहाल कर सकती है।
हिमाचल के पहाड़ी जिलों में ऑरेंज अलर्ट, कब थमेगी बारिश
हिमाचल प्रदेश में अगला पूरा हफ्ता बारिश के नाम रहने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार के मुताबिक मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय बना हुआ है और अगले 5 से 7 दिनों तक ज्यादातर इलाकों में रुक-रुक कर बारिश जारी रहेगी। बीते कुछ दिनों में कांगड़ा, ऊना और उनके आसपास के इलाकों में पहले ही भारी बारिश दर्ज की जा चुकी है। इसी को देखते हुए मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, क्योंकि इन जिलों में भारी बारिश की पूरी आशंका जताई गई है।
शोभित कटियार ने यह भी बताया कि 11 जुलाई के आसपास मानसून की रफ्तार एक बार फिर तेज हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जैसे मध्य पर्वतीय जिलों में मानसून 22 जुलाई तक पूरी तरह सक्रिय रहेगा, जबकि निचले और मैदानी इलाकों में बारिश का असर 16 जुलाई तक ज्यादा दिखेगा। 23 जुलाई से मानसूनी गतिविधियों में कुछ हद तक कमी आने की उम्मीद जताई गई है।
भारी बारिश से कौन-कौन से खतरे, किन बातों का रखें ध्यान
लगातार और भारी बारिश की वजह से पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, मडस्लाइड और नदी-नालों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इससे कई जगह सड़कें बंद होने की नौबत भी आ सकती है। बारिश के दौरान दृश्यता कम होने से सफर करना खतरनाक हो जाता है, वहीं खेती और बागवानी से जुड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। ऐसे हालात में मौसम विभाग, राज्य सरकार और जिला प्रशासन की तरफ से जारी एडवाइजरी का पालन करना जरूरी है। भारी बारिश के दौरान बेवजह घर से निकलने से बचना चाहिए और नदी-नालों या संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों के पास जाने से भी परहेज करना चाहिए।
तीन साल से हिमाचल झेल रहा है बारिश की मार
हिमाचल प्रदेश में जैसे ही मानसून सक्रिय होता है, आपदा का खतरा भी साथ-साथ बढ़ जाता है। बीते तीन सालों के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि पहाड़ी राज्य के लिए मानसून हर साल कितनी बड़ी चुनौती बनकर आता है। साल 2023 में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में करीब 509 लोगों की जान चली गई थी, जबकि राज्य को करीब 12,000 करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा था। 2024 में आपदा का असर उस मुकाबले कुछ कम रहा, लेकिन फिर भी बारिश से जुड़ी घटनाओं में करीब 174 लोगों की मौत हुई। 2025 में एक बार फिर रिकॉर्ड बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई, जिसमें करीब 454 लोगों की जान गई। इस साल भी हालात राहत देने वाले नहीं रहे हैं, 30 जून से अब तक प्रदेश में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा 7 मौतें अकेले सोलन जिले में दर्ज हुई हैं। अभी तक की गिनती में हिमाचल प्रदेश को करीब 15 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ चुका है। राज्य सरकार का कहना है कि पिछले तीन सालों में मिले सबक को देखते हुए इस बार आपदा से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं।











