हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में मानसून की पहली भारी बारिश ने ही तबाही मचा दी है। रिकॉन्गपिओ से मिली जानकारी के मुताबिक चोलिंग गांव के पास मीरू नाले में अचानक आई बाढ़ ने काजा, किन्नौर और शिमला को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया। सड़क पर भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े पत्थर आ गिरे, जिससे आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। इसी बीच किन्नौर के ही रिब्बा गांव में भी रात के अंधेरे में फ्लैश फ्लड ने दस्तक दी और गांव वालों को पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ी। राहत की बात यह रही कि दोनों जगहों से अब तक किसी जनहानि की खबर सामने नहीं आई है।
चोलिंग नाले की बाढ़ में दबीं दो गाड़ियां
चोलिंग स्थित प्राइमरी स्कूल के पास नाले में उमड़े पानी और मलबे में दो वाहन पूरी तरह दब गए, इनमें एक स्कॉर्पियो और एक पिकअप गाड़ी शामिल है। हालांकि इन दोनों वाहनों में सवार किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। नाले के दोनों तरफ बड़ी तादाद में गाड़ियां फंसी रहीं, जिनमें ट्रकों की संख्या सबसे ज्यादा थी।
रिब्बा में भी रतजगा, कण्डे मार्ग बंद
किन्नौर के रिब्बा में सुबह करीब तीन बजे रिब्बा खड्ड में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे रिब्बा को कण्डे से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग बंद हो गया। यहां भी किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन बाढ़ की चपेट में आकर कुछ छोटे वाहनों को आंशिक नुकसान जरूर पहुंचा। ग्रामीण देर रात ही सड़कों पर उतर आए और अपने वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया।
मटर सीजन में हाईवे बंद होने से किसान परेशान
इन दिनों किन्नौर में मटर की फसल का सीजन पूरे उफान पर है। ऐसे समय में हाईवे के बंद होने से मटर लदे ट्रकों के चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ा। समय पर फसल मंडियों तक न पहुंच पाने से किसानों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ गई, क्योंकि मटर जैसी नाशवान फसल में देरी सीधे नुकसान में बदल जाती है।
प्रशासन ने संभाला मोर्चा, करीब 6 घंटे बाद खुला रास्ता
किन्नौर के डीसी डॉ. अमित कुमार शर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि चोलिंग के पास सड़क साफ करने और फंसे वाहनों को निकालने के लिए भारी मशीनरी मौके पर भेज दी गई है। प्रशासन की टीम लगातार मौके पर डटी रही और बंद पड़े राष्ट्रीय उच्च मार्ग को जल्द से जल्द चालू करने में जुटी रही। मशक्कत रंग लाई और करीब 6 घंटे की जद्दोजहद के बाद हाईवे को अस्थायी तौर पर यातायात के लिए खोल दिया गया।
लिप्पा, चोलिंग और रिस्पा में सबसे ज्यादा नुकसान: सूरत सिंह नेगी
किन्नौर से भाजपा नेता सूरत सिंह नेगी ने कहा कि मानसून की पहली ही बारिश ने जिले में भारी तबाही मचाई है और लिप्पा, चोलिंग तथा रिस्पा क्षेत्रों में सड़कों, संपर्क मार्गों और आम जनजीवन को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कई जगहों पर बाढ़ और भूस्खलन से आवागमन बाधित हुआ है और स्थानीय लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। नेगी ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि प्रभावित इलाकों का तुरंत मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाए और नुकसान का पूरा आकलन कर सड़क, पेयजल, बिजली जैसी जरूरी सेवाओं को जल्द बहाल किया जाए। साथ ही उन्होंने प्रभावित परिवारों, किसानों और बागवानों को उचित मुआवजा और हरसंभव राहत देने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में वे जनता के साथ खड़े हैं।
पूरे हिमाचल में बारिश का असर, 46 सड़कें और 181 ट्रांसफॉर्मर ठप
अकेले किन्नौर ही नहीं, भारी बारिश की मार पूरे हिमाचल प्रदेश पर पड़ी है। राज्यभर में 46 सड़कें और 181 बिजली ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं, जिन्हें ठीक करने में लोक निर्माण विभाग और बिजली बोर्ड की टीमें जुटी हुई हैं। मौसम विभाग ने कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि बाकी कई जिलों में येलो अलर्ट लागू है। राजधानी शिमला में भी हालात सामान्य नहीं रहे, यहां सचिवालय परिसर की पार्किंग में मानसून की पहली बारिश के बाद ही दरारें दिखाई देने लगीं, जो प्रशासन के लिए चिंता का एक और कारण बन गई हैं।













