हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में जमीनों के रिकॉर्ड को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। जिले के ही रहने वाले और आर्मी इंटेलिजेंस से सेवानिवृत्त अधिकारी मनोज कुमार कौशल ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता कर दावा किया कि घनारी और अम्ब तहसीलों में जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी और रजिस्ट्री से जुड़े कामकाज में गंभीर गड़बड़ी हुई है। उन्होंने इस दौरान कुछ दस्तावेज भी सामने रखे।
क्या आरोप लगाए गए
मनोज कौशल का कहना है कि हरियाणा के कुछ लोगों के जरिए इन तहसीलों में जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी की पूरी प्रक्रिया निपटा दी गई, जबकि जिन जमीनों को लेकर यह कागजी कार्रवाई हुई, उनके असली मालिकों को इसकी भनक तक नहीं लगी। उनके मुताबिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए, तस्वीरें भी खिंचवाई गईं और बाकी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गईं, मानो सब कुछ नियम के मुताबिक हो रहा हो। कौशल का आरोप है कि यह पूरा खेल राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था, क्योंकि असली मालिकों को कभी इस प्रक्रिया की जानकारी ही नहीं दी गई।
हरियाणा में जांच शुरू होने पर खुला मामला
कौशल के अनुसार, हरियाणा से जो लोग यहां पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाने पहुंचे थे, उनसे जुड़ी शिकायतें जब हरियाणा में सामने आईं तो वहां जांच शुरू हुई। इसी जांच के दौरान यह तथ्य उजागर हुआ कि जिन जमीनों की पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई थी, उनके वास्तविक मालिकों को इस पूरे घटनाक्रम की कोई सूचना ही नहीं थी। कौशल ने कहा कि हरियाणा में चल रही इस जांच का दायरा अगर आगे बढ़ा और मामले की निष्पक्ष पड़ताल हुई, तो हिमाचल प्रदेश के जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की इसमें भूमिका रही होगी, वह भी सामने आ सकती है।
सरकार और विभाग पर उठाए सवाल
पत्रकार वार्ता में मनोज कौशल ने आरोप लगाया कि इस तरह की शिकायतें मिलने के बावजूद न तो राज्य सरकार इस मसले को गंभीरता से ले रही है और न ही संबंधित विभाग की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना था कि आम जनता की जमीन जायदाद से जुड़े मामलों में इस तरह की लापरवाही या मिलीभगत बर्दाश्त करने लायक नहीं है।
डीसी ऊना को सौंपी लिखित शिकायत
मनोज कुमार कौशल ने बताया कि वह इस मामले को लेकर उपायुक्त ऊना जतिन लाल से मिले और उन्हें लिखित शिकायत सौंपी। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो निष्पक्ष तरीके से इसकी तह तक जाया जा सके और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। कौशल का कहना है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड, पावर ऑफ अटॉर्नी के दस्तावेजों और संबंधित अभिलेखों की बारीकी से जांच कराई जाए तो पूरे मामले की असलियत सामने आ जाएगी। उन्होंने कहा कि आम लोगों की संपत्ति से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता बेहद गंभीर विषय है, और अगर जांच में कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।













