झारखंड के बोकारो जिले में चास प्रखंड के चिराचास गांव में एक घर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बेड के नीचे से अचानक किसी जानवर के हिलने-डुलने की आवाज आने लगी. परिवार को पहले लगा कि शायद मगरमच्छ का कोई बच्चा घर में घुस आया है, लेकिन जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो पता चला कि यह करीब 2 फीट लंबा मॉनिटर लिजर्ड यानी गोह है. टीम ने बेहद सावधानी से इस जीव को सुरक्षित रेस्क्यू किया.
बेटे ने सुनी आवाज, पिता को किया फोन
चिराचास के रहने वाले सुनील महतो के मुताबिक सुबह करीब 10 बजे उनका बेटा शिवम कमरे में गया था. वहां उसे बेड के नीचे से कुछ हिलता हुआ महसूस हुआ. डर के मारे उसने मोबाइल की फ्लैश जलाकर नीचे झांका तो एक बड़ा और अजीब सा जीव नजर आया. यह देखकर वह घबरा गया और तुरंत अपने पिता को फोन कर पूरी बात बताई. शुरुआत में घरवालों को शक हुआ कि यह मगरमच्छ का बच्चा हो सकता है, लेकिन बाद में साफ हुआ कि वह असल में गोह है. इसके बाद परिवार ने बिना देर किए वन विभाग को इसकी जानकारी दे दी.
वन विभाग की टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू
सूचना मिलते ही फॉरेस्टर शशिकांत महतो अपनी टीम के साथ घर पहुंचे. उन्होंने बताया कि उन्हें खबर मिली थी कि किसी घर में एक अजीब जानवर घुस आया है. टीम ने कमरे की तलाशी ली तो गोह बेड के नीचे छिपी हुई मिली. काफी सावधानी बरतते हुए टीम ने उसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला. फॉरेस्टर के मुताबिक अब इस गोह को सुरक्षित जंगल में छोड़ा जाएगा ताकि वह अपने प्राकृतिक ठिकाने में लौट सके.
खेतों और पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी है गोह
फॉरेस्टर शशिकांत ने बताया कि गोह यानी मॉनिटर लिजर्ड असल में एक बड़े आकार की छिपकली होती है, जो भारत के जंगलों, खेतों और झाड़ीदार इलाकों में आमतौर पर पाई जाती है. यह चूहे, छोटे सांप, कीड़े-मकोड़े, पक्षी और उनके अंडे खाकर अपना पेट भरती है. इसी वजह से यह खेतों और आसपास के पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है. यही कारण है कि गोह को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की Schedule 1 के तहत संरक्षित जीव माना गया है, यानी इसे नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध है.
गोह को लेकर लोगों की गलतफहमी
शशिकांत ने यह भी बताया कि आम लोगों में गोह को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं हैं. बहुत से लोग मानते हैं कि यह जहरीली होती है, जबकि हकीकत में गोह जरा भी विषैली नहीं होती. उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर कहीं गोह दिखाई दे तो उसे मारने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दें. उन्होंने यह भी सलाह दी कि मानसून के मौसम में घरों के आसपास साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाए, क्योंकि इस दौरान चूहों की तलाश में गोह जैसे जीव कई बार घरों तक पहुंच जाते हैं.













