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चास के एक घर में पलंग के नीचे छिपा मिला दो फीट लंबा गोह, मगरमच्छ समझ बैठा था परिवारझारखंड
5 जुल॰ 2026, 6:34 am (45 दिन पहले)· 2

चास के एक घर में पलंग के नीचे छिपा मिला दो फीट लंबा गोह, मगरमच्छ समझ बैठा था परिवार

बोकारो के चास प्रखंड स्थित चिराचास में एक घर के बेड के नीचे से आवाज आने पर परिवार को मगरमच्छ के बच्चे का शक हुआ, लेकिन वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर करीब 2 फीट लंबे गोह को सुरक्षित रेस्क्यू किया.

झारखंड के बोकारो जिले में चास प्रखंड के चिराचास गांव में एक घर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बेड के नीचे से अचानक किसी जानवर के हिलने-डुलने की आवाज आने लगी. परिवार को पहले लगा कि शायद मगरमच्छ का कोई बच्चा घर में घुस आया है, लेकिन जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो पता चला कि यह करीब 2 फीट लंबा मॉनिटर लिजर्ड यानी गोह है. टीम ने बेहद सावधानी से इस जीव को सुरक्षित रेस्क्यू किया.

बेटे ने सुनी आवाज, पिता को किया फोन

चिराचास के रहने वाले सुनील महतो के मुताबिक सुबह करीब 10 बजे उनका बेटा शिवम कमरे में गया था. वहां उसे बेड के नीचे से कुछ हिलता हुआ महसूस हुआ. डर के मारे उसने मोबाइल की फ्लैश जलाकर नीचे झांका तो एक बड़ा और अजीब सा जीव नजर आया. यह देखकर वह घबरा गया और तुरंत अपने पिता को फोन कर पूरी बात बताई. शुरुआत में घरवालों को शक हुआ कि यह मगरमच्छ का बच्चा हो सकता है, लेकिन बाद में साफ हुआ कि वह असल में गोह है. इसके बाद परिवार ने बिना देर किए वन विभाग को इसकी जानकारी दे दी.

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वन विभाग की टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

सूचना मिलते ही फॉरेस्टर शशिकांत महतो अपनी टीम के साथ घर पहुंचे. उन्होंने बताया कि उन्हें खबर मिली थी कि किसी घर में एक अजीब जानवर घुस आया है. टीम ने कमरे की तलाशी ली तो गोह बेड के नीचे छिपी हुई मिली. काफी सावधानी बरतते हुए टीम ने उसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला. फॉरेस्टर के मुताबिक अब इस गोह को सुरक्षित जंगल में छोड़ा जाएगा ताकि वह अपने प्राकृतिक ठिकाने में लौट सके.

खेतों और पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी है गोह

फॉरेस्टर शशिकांत ने बताया कि गोह यानी मॉनिटर लिजर्ड असल में एक बड़े आकार की छिपकली होती है, जो भारत के जंगलों, खेतों और झाड़ीदार इलाकों में आमतौर पर पाई जाती है. यह चूहे, छोटे सांप, कीड़े-मकोड़े, पक्षी और उनके अंडे खाकर अपना पेट भरती है. इसी वजह से यह खेतों और आसपास के पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है. यही कारण है कि गोह को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की Schedule 1 के तहत संरक्षित जीव माना गया है, यानी इसे नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध है.

गोह को लेकर लोगों की गलतफहमी

शशिकांत ने यह भी बताया कि आम लोगों में गोह को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं हैं. बहुत से लोग मानते हैं कि यह जहरीली होती है, जबकि हकीकत में गोह जरा भी विषैली नहीं होती. उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर कहीं गोह दिखाई दे तो उसे मारने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दें. उन्होंने यह भी सलाह दी कि मानसून के मौसम में घरों के आसपास साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाए, क्योंकि इस दौरान चूहों की तलाश में गोह जैसे जीव कई बार घरों तक पहुंच जाते हैं.

सवाल-जवाब

बोकारो में आखिर हुआ क्या था?
चास प्रखंड के चिराचास में एक घर के बेड के नीचे करीब 2 फीट लंबा गोह (मॉनिटर लिजर्ड) छिपा मिला, जिसे वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू किया.
परिवार को पहले क्या लगा था?
परिवार को लगा था कि बेड के नीचे मगरमच्छ का कोई बच्चा घुस आया है.
इस जीव का पता कैसे चला?
सुनील महतो के बेटे शिवम को कमरे में बेड के नीचे से हलचल महसूस हुई, मोबाइल की फ्लैश जलाकर देखने पर उसे बड़ा अजीब जीव दिखा, जिसके बाद उसने पिता को फोन किया.
रेस्क्यू के बाद गोह का क्या होगा?
फॉरेस्टर शशिकांत महतो के मुताबिक रेस्क्यू किए गए गोह को अब सुरक्षित जंगल में छोड़ा जाएगा.
क्या गोह जहरीला जीव होता है?
नहीं, फॉरेस्टर शशिकांत के अनुसार गोह विषैला नहीं होता, हालांकि लोग गलती से इसे जहरीला समझ लेते हैं.
गोह किस कानून के तहत संरक्षित है?
गोह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की Schedule 1 के तहत संरक्षित जीव है.
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