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कर्नाटक में वेटरनरी अफसर भर्ती में भारी धांधली, करोड़ों की रिश्वत और विला में पेपर लीक की खुली पोलकर्नाटक
22 सित॰ 2026, 12:52 pm (38 मिनट पहले)· 0

कर्नाटक में वेटरनरी अफसर भर्ती में भारी धांधली, करोड़ों की रिश्वत और विला में पेपर लीक की खुली पोल

कर्नाटक लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का खुलासा हुआ है, जिसमें अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से उम्मीदवारों को अवैध तरीके से पेपर मुहैया कराए गए थे।

कर्नाटक लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में वित्तीय लेनदेन और संगठित साजिश की परतें लगातार खुल रही हैं। जांच दल को उम्मीदवारों द्वारा सीधे नकद दिए गए 60 लाख रुपये और बैंक खातों के जरिए स्थानांतरित किए गए लगभग 92 लाख रुपये का सुराग मिला है। इस मामले में परीक्षा नियंत्रक रहे आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 29 अगस्त को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद 31 अगस्त को इस पूरे नेटवर्क में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले बसवराज कन्नाले को पकड़ा गया।

विला में बिठाकर कराई गई थी लीक प्रश्नों की तैयारी

जांच के दायरे में आए 40 उम्मीदवारों से सघन पूछताछ की गई, जिसमें से 29 अभ्यर्थियों को औपचारिक रूप से आरोपी बनाया गया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, हर प्रश्नपत्र के लिए उम्मीदवारों को 60 से 80 संभावित सवाल पहले ही थमा दिए गए थे। इतना ही नहीं, परीक्षा से पहले इन अभ्यर्थियों को देवनहल्ली के निकट स्थित तीन निजी विला में ठहराया गया था, जहां उन्हें लीक हुए सवालों के आधार पर विशेष कोचिंग दी गई थी।

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रिश्वत की रकम से आभूषण खरीद और खातों पर पाबंदी

इस फर्जीवाड़े में एकत्र की गई रिश्वत की रकम को ठिकाने लगाने के लिए कई वित्तीय रास्ते अपनाए गए। लेन-देन का एक बड़ा हिस्सा तिलकवाड़ी स्थित ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाते के जरिए संचालित किया गया था। इस अवैध धन में से 22 लाख रुपये खर्च करके ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के एक करीबी मित्र के लिए हीरे का हार खरीदा गया था। अधिकारियों ने विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब 1.40 करोड़ रुपये की धनराशि फ्रीज कर दी है, जबकि तलाशी के दौरान 5.76 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

लुक-आउट सर्कुलर और कानूनी शिकंजा

मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक लोक सेवा आयोग के पूर्व प्रमुख शिवशंकरप्पा साहूकार, पूर्व सदस्य शांता होसामनी तथा संबंधित बैंक के प्रमुख पदाधिकारियों के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी किए गए हैं ताकि वे देश छोड़कर न जा सकें। इस बीच, अदालत ने साहूकार, कन्नाले और कई संदिग्ध उम्मीदवारों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। वहीं गिरफ्तार अधिकारी गंगवार की जमानत अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई तय की गई है।

परीक्षा से लेकर जांच तक का पूरा घटनाक्रम

यह पूरा विवाद 400 पदों के लिए 8 जनवरी 2026 को आयोजित की गई पशु चिकित्सा अधिकारी परीक्षा से जुड़ा हुआ है। जब 17 जुलाई को इस भर्ती की अंतिम चयन सूची प्रकाशित की गई, तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने लगे। आरोप लगे कि सीटों का सौदा बिचौलियों के माध्यम से 80 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक में किया जा रहा था। नतीजतन, पूरे राज्य में अभ्यर्थियों और जनसंगठनों के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए आयोग ने चयन सूची पर रोक लगा दी और राज्य सरकार ने पूरे प्रकरण की जांच सीआईडी को सौंप दी, जिसने कई एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की धरपकड़ शुरू की।

सवाल-जवाब

कर्नाटक पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा कब आयोजित की गई थी?
यह परीक्षा 400 पदों को भरने के लिए 8 जनवरी 2026 को आयोजित की गई थी।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए आईएएस अधिकारी का क्या नाम है?
पूर्व परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को इस मामले में 29 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।
उम्मीदवारों को लीक प्रश्नों की तैयारी कहां कराई गई थी?
अभ्यर्थियों को देवनहल्ली के पास स्थित तीन निजी विला में ठहराकर 60 से 80 प्रश्नों की विशेष कोचिंग दी गई थी।
जांचकर्ताओं ने अब तक कितनी संपत्ति और नकदी पर कार्रवाई की है?
अधिकारियों ने बैंक खातों में जमा 1.40 करोड़ रुपये फ्रीज किए हैं, 5.76 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं और 22 लाख रुपये के हीरे के हार की खरीद का पता लगाया है।
किन अधिकारियों के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी किए गए हैं?
आयोग के पूर्व प्रमुख शिवशंकरप्पा साहूकार, पूर्व सदस्य शांता होसामनी और सहकारी बैंक के पदाधिकारियों के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी किए गए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·4 मिनट पहले

सरकारी नौकरियों के नाम पर ऐसा खेल चलता है तो सच में तैयारी करने वालों का भरोसा उठ जाता है। विला में बिठाकर पेपर रटाने वाले आईएएस और बैंक खातों का यह पूरा खेल देखकर लगता है कि सिस्टम अंदर से कितना खोखला हो चुका है।

Amit Patel@amit-patel·3 मिनट पहले

रवि जी, सही कहा आपने! वो 22 लाख का हीरे का हार वाला हिस्सा पढ़कर तो मेरा भी दिमाग घूम गया, रिश्वत के पैसों से ऐसी अय्याशी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 मिनट पहले

सरकारी नौकरियों के पेपर बिकने लगे हैं तो मेहनत करने वाले युवाओं का क्या होगा। आईएएस अधिकारी तक इसमें शामिल मिल रहे हैं, अब न्याय की उम्मीद किससे करें।

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 मिनट पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है, जब आईएएस ही बिक जाएं तो उम्मीद बचेगी कहां? वैसे क्या ये आईएएस अधिकारी सिर्फ मोहरा हैं या इस पूरे खेल के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा भी छिपा है?

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