कर्नाटक के गृह, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खरगे ने राज्य भर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मार्च कार्यक्रमों को लेकर एक विस्तृत बयान दिया है। 4 नवंबर को बेंगलुरु में बातचीत करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन ने इस बार सभी वैधानिक नियमों का पालन किया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन के पास पहले यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी कि इन मार्चों का संयोजन कौन लोग कर रहे हैं, लेकिन अब संगठन की ओर से अपनी विभिन्न शाखाओं से जुड़े व्यक्तियों के नामों सहित संपूर्ण आवश्यक ब्योरा प्रशासन को औपचारिक रूप से सौंप दिया गया है।
प्रशासनिक नियमों के अनुपालन पर मंत्री की टिप्पणी
प्रियांक खरगे ने कहा कि संगठन के लोग अच्छे हैं क्योंकि उन्होंने जहां भी मार्च निकालने की योजना बनाई, वहां प्रशासन को विधिवत जानकारी दी और निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति मांगी। कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा अथवा प्रशासनिक कारणों से अनुमति नहीं दी गई, लेकिन संगठन ने उस निर्णय को स्वीकार करते हुए पूरा सहयोग दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मीडिया द्वारा पहले यह माहौल बनाया जा रहा था कि संगठन न तो औपचारिक अनुमति के लिए आवेदन करेगा और न ही अपने कार्यकर्ताओं की जानकारी साझा करेगा, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत रही। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन किए जाने के बावजूद अनावश्यक रूप से भ्रामक बातें फैलाई जा रही थीं।
शाखाओं के ब्योरे और पारदर्शिता की उम्मीद
गृह मंत्री के अनुसार संगठन द्वारा दी गई विस्तृत सूची से सरकार को यह सटीक आकलन करने में सहायता मिली है कि राज्य में प्रत्येक शाखा से कौन-कौन से व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इस कदम का स्वागत करते हुए उन्होंने एक नई अपेक्षा भी रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह संगठन ने इस बार अनुमति के नियमों का पालन किया है, उसी तरह आने वाले समय में वे अपना विधिवत पंजीकरण भी करवा सकते हैं। इसके अलावा वे अपने वित्तीय स्रोतों और फंड का पूरा ब्योरा भी सार्वजनिक कर सकते हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि धन देश के भीतर से आ रहा है अथवा विदेशों से प्राप्त हो रहा है। उन्होंने माना कि ऐसी व्यवस्था से पूरी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
औपचारिक अनुमति बनाम केवल सूचना का विवाद
आवेदन की भाषा और प्रक्रिया को रेखांकित करते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि संगठन ने अपने दस्तावेजों में इसे केवल पुलिस विभाग को दी जाने वाली एकतरफा सूचना के रूप में प्रस्तुत नहीं किया है। उन्होंने सही प्रक्रिया अपनाते हुए पूरे कर्नाटक में बाकायदा अनुमति की मांग की है। खरगे ने टिप्पणी की कि संगठन पिछले सौ वर्षों से अपने तय ढर्रे पर काम करता आ रहा है, इसलिए प्रशासनिक व्यवस्थाओं और कानूनी प्रक्रियाओं के पूर्ण अनुकूलन में थोड़ा समय लगना स्वाभाविक है, लेकिन बदलाव की शुरुआत दिखाई दे रही है।
विजयादशमी पथ संचलन की पृष्ठभूमि और सुरक्षा प्रबंधन
आरएसएस के विजयादशमी पथ संचलन को लेकर उपजा यह विवाद मुख्य रूप से प्रशासनिक अनुमतियों और कानूनी प्रावधानों के पालन से जुड़ा रहा है। यह मामला तब चर्चा में आया था जब गृह मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट किया था कि संगठन को केवल मार्ग का नक्शा सौंपकर 'सूचित' करने की पुरानी व्यवस्था छोड़नी होगी और विधिवत पुलिस अनुमति हासिल करनी होगी। उन्होंने वे आंतरिक पत्र भी सामने रखे थे जिनमें पहले स्थानीय पुलिस को केवल समन्वय के लिए सूचित किया जाता था। गृह विभाग का स्पष्ट मत था कि चूंकि इन जुलूसों में सैकड़ों अलग-अलग रास्तों पर दो लाख से अधिक प्रतिभागी एकत्र होते हैं, इसलिए यातायात व्यवस्था, नागरिक सुरक्षा और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की देखरेख के लिए पूर्व औपचारिक आवेदन अनिवार्य है। उन्होंने दोहराया कि सार्वजनिक सभाओं और रैलियों से जुड़े कानून सभी पर समान रूप से लागू होते हैं।























