सरकारी दफ्तरों में अक्सर लोगों को कागजी कार्यवाही, फाइलों की तलाश और लंबे इंतज़ार जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लेकिन कर्नाटक के मांड्या जिले में स्थित एक ग्रामीण प्रशासनिक इकाई ने इस पुरानी छवि को तोड़कर एक आधुनिक और चुस्त व्यवस्था की मिसाल पेश की है. यहां किसी नागरिक को अपनी जमीन या मकान के कागजात की पड़ताल के लिए दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ते, बल्कि कुछ ही पलों में संबंधित ब्योरा हासिल हो जाता है. रिकॉर्ड्स को इतने करीने से श्रेणीबद्ध किया गया है कि किसी भी संपत्ति का पूरा इतिहास सिर्फ 3 से 4 मिनट में मेज पर आ जाता है.
यह आधुनिक व्यवस्था मांड्या जिले के श्रीरंगपट्टनम तालुक अंतर्गत आने वाली के. शेट्टीहल्ली ग्राम पंचायत में स्थापित की गई है. लगभग 9 हजार नागरिकों की आबादी वाले इस इलाके में सिर्फ कागजी कामकाज को ही दुरुस्त नहीं किया गया, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड, ई-फाइलिंग, सोलर पावर, बायोगैस और इको-फ्रेंडली तौर-तरीकों का शानदार समन्वय तैयार किया गया है. प्रशासन ने अपने रोजमर्रा के दायित्वों को नागरिक-अनुकूल बनाने के साथ ही पूरे पंचायत परिसर को प्रकृति के करीब रखने का अनूठा प्रयास किया है.
2,172 संपत्तियों की अलग फाइल और सिंगल-विंडो डेटा सिस्टम
के. शेट्टीहल्ली ग्राम पंचायत की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि उसका सटीक फाइल प्रबंधन ढांचा है. इस पंचायत के भौगोलिक और प्रशासनिक दायरे में कुल 2,172 संपत्तियां दर्ज हैं. पंचायत प्रशासन ने प्रत्येक संपत्ति के लिए एक अलग, स्वतंत्र फाइल तैयार की है. इस सिंगल फाइल प्रणाली में उस विशिष्ट संपत्ति और उसके वैध स्वामी से जुड़े तमाम जरूरी दस्तावेज, टैक्स रसीदें और अन्य प्रशासनिक विवरण एक ही स्थान पर सहेज कर रखे गए हैं.
पुरानी व्यवस्था में जब किसी नागरिक को एनओसी, व्यापारिक लाइसेंस या किसी अन्य नागरिक सेवा की दरकार होती थी, तो हर नए आवेदन के लिए एक नई फाइल तैयार करनी पड़ती थी. इसका नतीजा यह होता था कि एक ही व्यक्ति या संपत्ति के कागजात कई अलग-अलग रजिस्टरों और बस्तों में बिखर जाते थे, जिन्हें ढूंढने में कर्मचारियों के घंटों बर्बाद होते थे. अब पंचायत की नई कार्यप्रणाली के तहत एक व्यक्ति या उसकी संपत्ति से संबंधित सभी जरूरी स्वीकृतियां और सेवाएं उसी की मूल फाइल में दर्ज की जाती हैं. इससे फाइल तलाशने में लगने वाला समय लगभग शून्य हो गया है.
10, 20 और 30 साल के आधार पर रिकॉर्ड्स का वर्गीकरण
नागरिकों को बिना किसी असुविधा के तुरंत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए दस्तावेजों को उनकी समय-सीमा के अनुसार 10, 20 और 30 वर्ष के कालखंडों में बांटा गया है. इस वैज्ञानिक वर्गीकरण का लाभ यह है कि दशकों पुराने ऐतिहासिक कागजात भी पूरी सुरक्षा के साथ संरक्षित रहते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें बिना किसी जद्दोजहद के निकाला जा सकता है.
रिकॉर्ड संधारण का यह सटीक नियम केवल रिहायशी या निजी संपत्तियों तक ही सीमित नहीं है. पंचायत क्षेत्र में संचालित होने वाले सरकारी स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक भवनों के लिए भी इसी प्रकार अलग-अलग फाइलें बनाकर रिकॉर्ड रखा गया है. इसके अलावा, दिव्यांग नागरिकों से जुड़े दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने और उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित कराने के लिए भी विशेष प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं.
ई-फाइलिंग से कागज की बचत और 95 फीसदी प्लास्टिक-मुक्त परिसर
कार्यालय के कामकाज में कागजों के अंधाधुंध उपयोग को समाप्त करने की दिशा में ई-फाइलिंग प्रणाली को व्यापक रूप से लागू किया गया है. समूची प्रशासनिक प्रक्रिया को डिजिटल स्वरूप देकर डाटा के नुकसान की आशंका को खत्म किया गया है और जरूरत के समय डिजिटल खोज आसान बनाई गई है.
प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा गया है. पंचायत कार्यालय में प्लास्टिक की खपत में करीब 95 प्रतिशत तक की भारी कटौती दर्ज की गई है. पूरे दफ्तर परिसर में हरियाली को बढ़ावा देने के लिए पौधे लगाए गए हैं और स्वच्छता के कड़े मानक लागू किए गए हैं. इस पहल का स्पष्ट उद्देश्य यह संदेश देना है कि बुनियादी स्तर पर प्रशासनिक दृढ़ता के जरिए न सिर्फ जनसेवाओं की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ठोस योगदान दिया जा सकता है.
छत पर सोलर पैनल और ईवी चार्जिंग स्टेशन की सुविधा
कावेरी नदी के तटवर्ती क्षेत्र में बसी इस ग्राम पंचायत ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पारंपरिक ग्रिड पर अपनी निर्भरता काफी हद तक घटा दी है. पंचायत भवन की छत पर आधुनिक सोलर पैनल लगाए गए हैं. इन सौर पैनलों से उत्पन्न हरित बिजली के जरिए दफ्तर के तमाम कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर और अन्य आवश्यक उपकरण निर्बाध रूप से संचालित होते हैं.
पंचायत अपनी अतिरिक्त सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करने के लिए चार्जिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी लगातार काम कर रही है. इसी क्रम में कार्यालय परिसर में एनआईई-क्रेस्ट के तकनीकी सहयोग से सौर ऊर्जा संचालित इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया गया है. यह पहल ग्रामीण भारत में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल और इलेक्ट्रिक आवागमन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. इसके अतिरिक्त, जल संरक्षण के लिए पंचायत ने वर्षा जल संचयन यानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक को अपनाया है, जिससे बारिश की हर बूंद का संचय कर भूमिगत जल स्तर और दैनिक जरूरतों के लिए उसका सदुपयोग किया जा सके.





















