बाजार में जब मेवों की खरीदारी की जाती है, तो दुकानों पर सजे चमचमाते बादाम, दूध जैसे सफेद काजू और बेहद खूबसूरत दिखने वाली किशमिश ग्राहकों को तुरंत आकर्षित कर लेती है। अधिकतर लोग यह मान लेते हैं कि जो ड्राई फ्रूट्स जितने ज्यादा चमकदार और साफ दिख रहे हैं, वे उतनी ही बेहतरीन गुणवत्ता के होंगे। हकीकत इससे काफी अलग हो सकती है, क्योंकि मेवों की यह ऊपरी चमक हमेशा ताजगी या शुद्धता की गारंटी नहीं होती। कई बार व्यापारी सूखे मेवों को ज्यादा आकर्षक, नया और महंगा दिखाने के लिए उन पर कृत्रिम रंग, रासायनिक पॉलिश या अवांछित केमिकल की परत चढ़ा देते हैं। जब सेहत बनाने के लिए महंगे दाम चुकाकर ये मेवे खरीदे जाते हैं, तो यह जांचना बेहद जरूरी हो जाता है कि वे शरीर के लिए फायदेमंद हैं या नुकसानदेह। कुछ बहुत ही आसान और व्यावहारिक तरीकों को अपनाकर दुकान पर ही असली, बासी या मिलावटी मेवों के बीच का फर्क साफ पहचाना जा सकता है।
रंग और बनावट की बारीक परख
सूखे मेवे खरीदते समय सबसे पहला कदम उनकी बनावट और प्राकृतिक रंग को ध्यान से देखना है। उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक मेवों का रंग कभी भी जरूरत से ज्यादा भड़कीला या अप्राकृतिक नहीं होता है। असली बादाम का छिलका हल्का भूरा होता है और उसकी सतह छूने में सामान्य रूप से खुरदरी या हल्की मुलायम महसूस होती है। यदि बादाम असामान्य रूप से गहरे लाल या चमकदार भूरे दिख रहे हैं, तो उन पर रंग या पॉलिश का इस्तेमाल किए जाने की संभावना बढ़ जाती है। इसी तरह अच्छी गुणवत्ता के काजू स्वाभाविक रूप से हल्के मटमैले या हल्के सफेद होते हैं, और उन पर बड़े काले धब्बे या गड्ढे नहीं होने चाहिए। अगर काजू प्लास्टिक जैसी एकदम कृत्रिम सफेदी बिखेर रहा हो, तो सतर्क हो जाना चाहिए। इसके अलावा, एक ही ढेर में मौजूद मेवों के आकार पर भी गौर करना चाहिए, क्योंकि एक समान साइज अक्सर सही छंटाई को दर्शाता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा चमक हमेशा केमिकल की तरफ इशारा करती है।
सूंघकर पहचानें ताजगी और बासीपन
मेवों की शुद्धता और ताजगी जांचने का दूसरा सबसे असरदार तरीका उनकी गंध को महसूस करना है। ताजे और प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रखे गए ड्राई फ्रूट्स में एक बेहद सौम्य, मीठी और प्राकृतिक नटी खुशबू पाई जाती है। जब मेवे पुराने हो जाते हैं या उन्हें अनुचित तापमान में रखा जाता है, तो उनके प्राकृतिक तेल में खराबी आने लगती है। ऐसे बासी मेवों से सीलन, पुरानी बंद अलमारी, बासी खाने के तेल या फिर खट्टी गंध आने लगती है। खुले बाजार से बिना पैकेट वाले मेवे खरीदते समय यह सूंघने वाला परीक्षण सबसे ज्यादा मददगार साबित होता है। अगर किसी भी ड्राई फ्रूट से हल्की सी भी अप्रिय या केमिकल जैसी गंध आ रही हो, तो उन्हें खरीदने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसे मेवे न सिर्फ स्वाद बिगाड़ते हैं बल्कि पाचन तंत्र पर भी बुरा असर डाल सकते हैं।
स्वाद और चबाने की बनावट का टेस्ट
यदि दुकानदार खरीदारी से पहले सैंपल चखने की सुविधा देता है, तो मेवों का थोड़ा सा हिस्सा चखकर जरूर देखना चाहिए। स्वाद कभी झूठ नहीं बोलता और ताजे मेवों का असली स्वाद मुंह में जाते ही उनकी गुणवत्ता साफ कर देता है। ताजे बादाम, अखरोट और काजू का स्वाद हल्का मीठा और प्राकृतिक रूप से क्रंची होता है। किशमिश और खजूर जैसे सूखे फलों में एक प्राकृतिक और संतुलित मिठास होनी चाहिए। अगर किसी मेवे का स्वाद कड़वा, कसैला, बेस्वाद या बासी तेल जैसा महसूस हो, तो इसका सीधा मतलब है कि वे अपनी प्राकृतिक उम्र पार कर चुके हैं या खराब हो चुके हैं। इसके साथ ही किशमिश और खजूर में चबाने लायक लचीलापन होना जरूरी है। अगर किशमिश पत्थर की तरह सख्त, बिल्कुल सूखी या अत्यधिक चिपचिपी महसूस हो, तो यह लंबे समय से खराब तरीके से स्टोर किए जाने का स्पष्ट लक्षण है।
सफेद कपड़े से करें पॉलिश और कृत्रिम चमक की जांच
व्यापारी अक्सर पुराने और चमक खो चुके मेवों को दोबारा नया रूप देने के लिए उन पर हल्के खाद्य तेल की परत, शुगर सिरप की कोटिंग या सिंथेटिक पॉलिश का इस्तेमाल करते हैं। केवल बाहरी चमक को देखकर कभी भी गुणवत्ता का फैसला नहीं करना चाहिए। इस मिलावट को पकड़ने के लिए एक छोटा और आसान तरीका अपनाया जा सकता है। एक साफ सफेद सूती कपड़ा या टिशू पेपर लेकर मेवे को उस पर हल्के हाथ से रगड़ें। अगर कपड़े पर असामान्य रूप से गाढ़ा रंग, पीलापन या चिकना चिपचिपा पदार्थ चिपक जाता है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि उस मेवे पर कोई बाहरी केमिकल या कोटिंग लगाई गई है। हालांकि कुछ मेवों में अपना प्राकृतिक तेल भी मौजूद होता है, जिससे हल्का सा तेल का दाग आ सकता है, लेकिन किसी भी तरह का कृत्रिम रंग या चिपचिपापन तुरंत पकड़ में आ जाता है।
पैकेट पर लेबल, निर्माण तिथि और लाइसेंस की जांच
यदि खुले मेवों के बजाय पैकेट बंद ड्राई फ्रूट्स खरीदे जा रहे हैं, तो पैकेट पर दी गई हर एक जानकारी को पढ़ना बेहद जरूरी है। सबसे पहले पैकेट पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई का वैध लाइसेंस नंबर अवश्य देखें। इसके साथ ही पैकेजिंग की तारीख और उसकी एक्सपायरी या उपयोग की अंतिम तारीख की जांच करें। कभी भी ऐसा पैकेट न खरीदें जिसकी सील खुली हो, पैकेजिंग फटी हुई हो या पैकेट के अंदर किसी भी तरह की नमी की बूंदें दिखाई दे रही हों। सीलबंद पैकेट हमेशा जाने-माने और भरोसेमंद ब्रांड्स या प्रमाणित दुकानों से ही लेने चाहिए, क्योंकि वहां गुणवत्ता और स्वच्छता के नियमों का पालन अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से किया जाता है।
नमी, कीड़ों और फफूंद से बचाव और सही स्टोरेज
मेवे चाहे कितनी भी बेहतरीन किस्म के क्यों न हों, अगर उन्हें गलत तरीके से रखा जाए तो वे बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं। खुले मेवे खरीदते वक्त डिब्बे या बोरी के निचले हिस्से को भी देखना चाहिए कि कहीं उसमें बारीक जाले, कीड़े, फफूंद या सफेद फंगस तो नहीं लगी है। नमी सूखे मेवों की सबसे बड़ी दुश्मन होती है। घर लाने के बाद भी इनकी सही देखभाल जरूरी है। मेवों को हमेशा सीधी धूप, गर्मी और सीलन से दूर किसी ठंडी और सूखी जगह पर रखना चाहिए। इन्हें हमेशा पूरी तरह साफ, सूखे और एयर-टाइट कंटेनर में बंद करके रखना चाहिए ताकि हवा के संपर्क में आकर इनका कुरकुरापन खत्म न हो और ये लंबे समय तक बिल्कुल सुरक्षित, ताजे और पोषक तत्वों से भरपूर बने रहें।












