रसोई घर में काम करना केवल भोजन तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पकी हुई चीज़ों को लंबे समय तक सुरक्षित, महकदार और खाने योग्य बनाए रखना भी एक कला है। घरों में अक्सर देखा जाता है कि सुबह के वक्त तैयार की गई रोटियां दोपहर ढलते-ढलते या शाम तक रोटीदान के अंदर पसीने जैसी नमी के कारण गीली हो जाती हैं। कई बार नीचे की परत वाली रोटियां ज्यादा सीलन की वजह से गल जाती हैं या उनमें एक अजीब सी बासी गंध पैदा हो जाती है। इस आम परेशानी से पार पाने के लिए पुरानी पीढ़ियों के पास कई घरेलू उपाय हुआ करते थे, जो आज के समय में भी उतने ही असरदार साबित होते हैं। ऐसा ही एक बेहद आसान और अनोखा तरीका रोटीदान के अंदर एक खास मसाला रखना है!
नमी और सीलन से राहत पाने का तरीका
जब भी कोई व्यक्ति गरमागरम रोटियां सीधे बर्तन के अंदर रखता है, तो अंदर उठने वाली भाप ढक्कन और बर्तन की तली पर पानी की बूंदों के रूप में जम जाती है। इसी अतिरिक्त नमी के कारण सबसे नीचे और सबसे ऊपर रखी रोटियां खराब होने लगती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बर्तन के अंदर सूखी पत्तियां रखने का चलन है। इन पत्तियों में प्राकृतिक रूप से हवा की नमी को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। जब कोई व्यक्ति रोटीदान के निचले हिस्से में या रोटियों की परतों के बीच एक या दो सूखी पत्तियां रख देता है, तो वह सामग्री भाप से पैदा होने वाले अतिरिक्त पानी को अपने अंदर खींच लेती है।
बासी गंध दूर भगाकर महक बनाए रखना
लंबे समय तक बंद रहने वाले बर्तनों में रखी रोटियों से कई बार एक तरह की घुटन भरी या बासी हवा की महक आने लगती है। इस प्रकार की गंध के कारण अक्सर घर के सदस्य ऐसी रोटियां खाने से मुंह मोड़ने लगते हैं। इस मसालेदार पौधे में प्राकृतिक रूप से सुगंधित तत्व पाए जाते हैं। इसकी हल्की और भीनी खुशबू बर्तन के भीतर किसी भी तरह की अप्रिय गंध को टिकने नहीं देती। इसकी मौजूदगी की वजह से जब भी कोई बर्तन का ढक्कन उठाता है, तो भोजन में से एक बेहद सोंधी और तरोताजा महक आती है।
कीटाणुओं और फंगस से बचाव
बरसात या उमस भरे मौसम के दौरान पके हुए भोजन में बैक्टीरिया या फफूंद पनपने का खतरा काफी तेजी से बढ़ जाता है। विशेष रूप से यदि रोटी में जरा सी भी नमी रह जाए, तो उसके खराब होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इस पौधे की पत्तियों में कुछ खास प्राकृतिक तत्व और तेल पाए जाते हैं। विभिन्न अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि ये घटक सूक्ष्म जीवों और फंगस के विकास को रोकने में पूरी तरह सक्षम होते हैं। इसके अलावा इसकी तीखी गंध चींटियों और छोटे जीवों को भी प्राकृतिक रूप से दूर रखती है, जिससे भोजन सुरक्षित बना रहता है।
इस्तेमाल करने का सही तरीका
इस घरेलू उपाय का पूरा लाभ उठाने के लिए इसे सही तरीके से आजमाना बेहद आवश्यक है। सबसे पहले हमेशा साफ, सूखे और साबुत पत्तों का चुनाव करना चाहिए। बर्तन के सबसे निचले हिस्से में एक सूती कपड़ा या साफ नेपकिन बिछाया जाना चाहिए। उस कपड़े के ऊपर या बर्तन की तली में एक से दो पत्तियां व्यवस्थित कर दी जाती हैं। इसके बाद इसके ऊपर अपनी सेकी हुई रोटियां रखकर बर्तन का ढक्कन कसकर बंद कर दिया जाता है। इस बात का भी खास ध्यान रखना चाहिए कि एक ही पत्ती को हफ्तों तक लगातार इस्तेमाल न किया जाए, बल्कि हर दो से तीन दिन में या जब पत्ती ज्यादा नमी सोख ले, तब उसे बदल देना चाहिए। रसोई घर के ये छोटे-छोटे तरीके रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने के साथ खाने की बर्बादी को रोकने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।





















