ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई का पार्थिव शरीर रविवार शाम पवित्र नगरी क़ोम लाया गया। यह शोक यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण था, क्योंकि इससे पहले राजधानी तेहरान में लाखों लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी थी। तेहरान की सड़कों पर आज़ादी चौक की ओर बढ़ते हुए एक ट्रक पर ख़ामेनेई के साथ उनके चार परिजनों के शव रखे गए थे, जो 28 फरवरी को अमेरिकी-इज़रायली हवाई हमले में मारे गए थे। यह शोक प्रदर्शन केवल आम जनता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने भी शिरकत की।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनावपूर्ण स्थिति
विश्व के प्रमुख ऊर्जा पारगमन मार्गों में शुमार होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अचानक सुरक्षा स्थिति बिगड़ गई है। यूनाइटेड किंगडम मेरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने ओमान तट के पास लिमाह से आठ समुद्री मील पूर्व में एक तेल टैंकर पर 'अज्ञात प्रक्षेप्य' के हमले की पुष्टि की, जिससे जहाज़ में आग लग गई। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और समुद्री पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस क्षेत्र से गुजर रहे व्यापारिक पोतों पर कम से कम दो मिसाइलें दागीं, जिससे दो जहाज़ों को गंभीर नुकसान हुआ है। क़तर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि क़तरी टैंकर अल-रेकय्यात पर हुआ हमला अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है और इसकी पूरी क़ानूनी ज़िम्मेदारी तेहरान पर है।
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तल्खी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ़ शब्दों में कहा है कि यदि ईरान कोई समझौता नहीं करता है, तो अमेरिका अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करके इसका 'काम तमाम' कर देगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं। इस तनाव के बीच मंगलवार, 7 जुलाई को अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्री खाड़ी अरब देशों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाले हैं, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से फिर से खोलने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। इसमें फ्रांस और ब्रिटेन का एक संयुक्त प्रस्ताव भी शामिल है, जिसे ईरान ने अब तक स्वीकार करने से मना कर दिया है।
धार्मिक और राजनीतिक केंद्र में अंतिम संस्कार
मंगलवार, 7 जुलाई को पवित्र शहर क़ोम में हज़ारों शोकाकुल लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सरकारी टेलीविज़न द्वारा प्रसारित हवाई दृश्यों में क़ोम की गलियों को पूरी तरह भरा हुआ दिखाया गया। ख़ामेनेई का पार्थिव शरीर क़ुम की जमकरान मस्जिद में रखा गया है। यह छह दिवसीय शोक समारोह का हिस्सा है। बुधवार, 8 जुलाई 2026 को यह यात्रा इराक की पवित्र नगरियों नजफ़ और कर्बला तक जाएगी, जबकि अंतिम दफ़न मशहद में इमाम रज़ा मज़ार पर होगा। कर्नाटक के अलीपुरा से लगभग 100 लोगों का एक दल तेहरान पहुँचा है, जो ख़ामेनेई के प्रति अपने समुदाय की गहरी निष्ठा को दर्शाता है।
क्षेत्रीय संघर्ष का व्यापक प्रभाव
ईरान के लिए यह समय अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। ख़ामेनेई का शासनकाल सुधारवादी और कट्टरपंथी तत्वों के बीच संतुलन का दौर था, लेकिन हाल के वर्षों में आंतरिक असंतोष और बाहरी दबाव ने तेहरान की नीतियों को कमजोर किया है। 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद इज़राइल ने ईरान समर्थित 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' के नेटवर्क पर लगातार हमले किए हैं। साथ ही, दक्षिण लेबनान के नबातिये में एक इज़रायली ड्रोन हमले में चार लोगों की मौत की खबर ने लेबनानी सीमा पर तनाव और बढ़ा दिया है। इस बीच, इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने पुष्टि की है कि लेबनान के साथ 15 और 16 जुलाई को रोम में कूटनीतिक वार्ता का अगला दौर आयोजित होगा ताकि क्षेत्रीय शांति के लिए बनाए गए ढांचे को मजबूत किया जा सके।



















