दक्षिण भारतीय राज्य केरल में मानसून की भयंकर बारिश और नदियों के उफान ने व्यापक तबाही मचा रखी है। उफनती नदियों, भूस्खलन और तटीय क्षेत्रों में समुद्र के भीषण कटाव के कारण अब तक 15 नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि 7 अन्य लोग लापता बताए जा रहे हैं। बिगड़ते हालातों की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन की अगुवाई में राज्य प्रशासन की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई है। इस दौरान भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने वर्षा पूर्वानुमान को और अधिक गंभीर श्रेणी में डालते हुए राज्य के 14 में से 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकालकर सुरक्षित आश्रयों में पहुंचाने का कार्य तेजी से जारी है।
राज्यभर में बढ़ा मौतों का आंकड़ा और बड़े पैमाने पर विस्थापन
सोमवार सुबह आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि वर्षा जनित विभिन्न हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो चुकी है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लापता 7 व्यक्तियों की तलाश के लिए खोज एवं बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं। बेघर और प्रभावित नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सोमवार सुबह 9 बजे तक पूरे राज्य में 316 राहत शिविर क्रियान्वित किए जा चुके थे, जिनमें 11,018 लोगों को सुरक्षित ठहराया गया है।
विशेष रूप से अलाप्पुझा जिले में जलभराव के कारण जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हुआ है। जिला प्रशासन के अनुसार विभिन्न तालुकों के शिविरों में कुल 377 परिवारों के 1,300 लोगों ने शरण ली है। इस विस्थापित आबादी में 541 पुरुष, 543 महिलाएं तथा 216 बच्चे शामिल हैं। अलाप्पुझा के अंतर्गत आने वाले चेंगनूर तालुका में सबसे अधिक दबाव देखा गया है, जहां 17 केंद्रों में 213 परिवारों के 759 लोग रह रहे हैं। इसके अलावा कार्तिकपल्ली तालुका के 2 शिविरों में 94 परिवारों के 303 लोग, कुट्टनाड के 6 केंद्रों में 57 परिवारों के 183 लोग, मावेलिकारा के 3 शिविरों में 5 परिवारों के 27 लोग तथा अंबलपुझा तालुका के 1 राहत केंद्र में 6 परिवारों के 23 नागरिक शरण लिए हुए हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी: 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट
मौसम के बिगड़े मिजाज को देखते हुए IMD ने बारिश की चेतावनियों को अपग्रेड किया है। शुरुआती बुलेटिन में जहां 10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित था, वहीं ताजा अनुमान के तहत 12 जिलों को ऑरेंज अलर्ट के दायरे में रखा गया है। शुरुआती चरण में तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, त्रिशूर और पालक्काड को छोड़कर बाकी जिलों के लिए यह चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन लगातार बढ़ते बादलों और मानसूनी दबाव के चलते राज्य के विशाल हिस्से पर अत्यधिक भारी वर्षा का संकट मंडरा रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ऑरेंज अलर्ट वाले क्षेत्रों में अगले 24 घंटों की अवधि के दौरान 115.6 मिलीमीटर से लेकर 204.4 मिलीमीटर तक मूसलाधार बारिश दर्ज हो सकती है। शेष अन्य जिलों में भी पृथक स्थानों पर निरंतर भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और नदियों में उफान की स्थिति बनी रहेगी।
जलाशयों के स्पिलवे खुले, नदियां खतरे के निशान के पार
कोझिकोड जिले में स्थिति तब अत्यधिक चिंताजनक हो गई जब मूसलाधार वर्षा के कारण कक्कयम जलाशय का जलस्तर अपनी अधिकतम सीमा के करीब पहुंच गया। जलस्तर को नियंत्रित करने और किसी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने डैम के स्पिलवे गेट खोलकर पानी छोड़ना शुरू कर दिया, जिसके बाद पूरे जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप कोझिकोड के परम्बिल बाज़ार क्षेत्र में जलभराव हो गया और लगभग 200 परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा। पास में बहने वाली पूणूर नदी के उफान पर आने के कारण एहतियात के तौर पर प्रभावित इलाकों की विद्युत आपूर्ति काट दी गई है।
मध्य तिरुवांकुर क्षेत्र में रातभर हुई भारी वर्षा ने जल निकायों को उफान पर ला दिया है। एर्नाकुलम जिले की प्रमुख नदियों मुवाट्टुपुझा, थोडुपुझा और कालियारु का जलस्तर चेतावनी के स्तर को पार कर चुका है, जिससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए विशेष चेतावनी जारी की गई है। इसके अतिरिक्त पथानामथिट्टा जिले में बाढ़ की स्थिति पर कड़ा पहरा रखने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आपातकालीन तैयारियों के सख्त निर्देश दिए हैं।
भूस्खलन, तटीय कटाव और संरचनात्मक तबाही
बारिश के कारण राज्य के पहाड़ी और तटीय इलाकों में भारी तबाही देखने को मिल रही है। मलप्पुरम जिले के पनाक्कड में हुए एक बड़े भूस्खलन के कारण मुख्य राजमार्ग पर मलबा आ गिरा, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में और अधिक भूस्खलन होने की आशंका जताते हुए सतर्कता बढ़ा दी है। इसी जिले के करूवारकुंडू स्थित इरिंगात्तिरी में मूसलाधार बारिश के दबाव के चलते एक निर्माणाधीन दो मंजिला कंक्रीट का मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।
कन्नूर जिले में वर्षा जनित हादसों में 1 व्यक्ति की मौत हुई है और 2 लोग लापता बताए जा रहे हैं। कन्नूर में 5 अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनसे 521 नागरिक विस्थापित हुए हैं। वहीं पहाड़ी जिले इडुक्की में भी नदियों व बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन ने भूस्खलन के अत्यधिक खतरे को देखते हुए यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिए हैं और सभी पर्यटन स्थलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इडुक्की के पीरमेडु स्थित पांचालीमेडू पर्यटन केंद्र में रविवार शाम बारिश के कारण एक रिसॉर्ट की सुरक्षा दीवार गिर जाने से पास में खड़ी दो गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं।
उत्तर केरल के कासरगोड जिले में मानसून के रौद्र रूप ने समुद्र में भयंकर कटाव पैदा कर दिया है। कवुंगोली इलाके में समुद्र की लहरें लगभग 100 मीटर अंदर तक प्रवेश कर गईं, जिससे चेरंगाई-कवुंगोली तटीय मार्ग पूरी तरह बह गया। सड़क नष्ट होने से करीब 200 परिवारों का मुख्य भूमि से सीधा संपर्क टूट गया है। तटबंध की सुरक्षा के लिए लगाए गए जियोबैग लहरों के बहाव में बह गए। कवुंगोली के अलावा उप्पला के मुसोडी, नेल्लिकुन्नू, चेरंगाई, उदुमा और पल्लीकरा क्षेत्रों में भी भयंकर तटीय कटाव जारी है। मुसोडी में एक आवासीय मकान समुद्र में समाने की कगार पर पहुंच गया है, जिसके चलते जोखिम वाले इलाकों से लोगों को बाहर निकाला जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली बहाली और व्यापारियों का आर्थिक संकट
राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे की बहाली और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन के लिए प्रशासनिक तंत्र को मुस्तैद किया है। विद्युत मंत्री सन्नी जोसेफ ने जानकारी दी कि मानसूनी तूफानों से बिजली के खंभे टूटने और ट्रांसफार्मर खराब होने के बावजूद 92 प्रतिशत बिजली कनेक्शनों को सफलता पूर्वक बहाल कर लिया गया है। शेष प्रभावित क्षेत्रों में लाइन की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने विपक्षी दलों द्वारा राहत कार्यों पर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार प्रभावित इलाकों तथा शिविरों में संक्रामक बीमारियों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम कर रही है। दवाइयों की कमी के आरोपों का खंडन करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट कहा कि दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और किसी भी शिविर से औषधियों की किल्लत की कोई रिपोर्ट नहीं आई है।
दूसरी ओर, इस प्राकृतिक आपदा ने स्थानीय व्यापार जगत को भारी आर्थिक चपत लगाई है। केरल मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स (KMCC) के अध्यक्ष पी. नियाज़र ने बताया कि आगामी ओणम त्यौहार को ध्यान में रखते हुए व्यापारियों ने कर्ज लेकर दुकानों में भारी स्टॉक जमा किया था। महज कुछ घंटों की बाढ़ में यह सारी जमा-पूंजी और सामग्री बह गई या खराब हो गई। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना बीमा वाले छोटे कारोबारियों को उबरने के लिए यदि सरकार तुरंत विशेष आर्थिक पैकेज नहीं देती है, तो कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे।



















