सितंबर महीने में बनने जा रहे 3 शुभ राजयोग से इन 5 राशियों को मिलेगा अपार धन और तरक्की28 अगस्त 2026 के चंद्र ग्रहण पर बन रहा राहु और चंद्रमा का ग्रहण योग, इन छह राशियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असरपितृपक्ष 2026 में बिना बेटे के भी संभव है श्राद्ध कर्म, जानिए गरुड़ पुराण के मुख्य नियममूलांक 9 अंकराशि 19 अगस्त 2026: मंगल के प्रभाव में न करें जल्दबाजी, करियर और पैसों के फैसलों में बरतें सावधानीतुलसीदास जयंती पर अरविंद केजरीवाल ने दी श्रद्धांजलि, रामचरितमानस के रचयिता को किया नमनगॉल टेस्ट के दौरान ऑन-एयर आपस में उलझे संजय मांजरेकर और मुरली कार्तिक, लाइव ब्रॉडकास्ट में हुए व्यक्तिगत कमेंट्सइंदौर के खजराना गणेश मंदिर में बना नया कीर्तिमान, 40 दानपेटियों से निकले 1.81 करोड़ रुपयेगंगा के उफान के बीच मिर्जापुर में उतरी प्राचीन पाल नौका यात्रा, निषाद समुदाय के नाविकों ने दिखाई अपनी सांस्कृतिक कलाझारखंड सरकार ने 2014 से आयोजित 44 भर्ती परीक्षाएं कीं रद्द, आउटसोर्स एजेंसी TDPL ब्लैकलिस्टगॉल टेस्ट में ऋषभ पंत की आक्रामक पारी, शुभमन गिल को पछाड़ WTC में बने भारत के सबसे सफल बल्लेबाज
लाइव: ख़ामेनेई के जनाज़े का दूसरा दिन — होर्मुज़ शुल्क विवाद और ट्रंप-नेतन्याहू तनाव के बीच — 5 जुलाई 2026लाइव
5 जुल॰ 2026, 7:30 am (45 दिन पहले)· 2

लाइव: ख़ामेनेई के जनाज़े का दूसरा दिन — होर्मुज़ शुल्क विवाद और ट्रंप-नेतन्याहू तनाव के बीच — 5 जुलाई 2026

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई की अंत्येष्टि में कवि मोहम्मद रसूली ने मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौत की मांग कर दी, जिसके बाद भीड़ में अमेरिका मुर्दाबाद और इज़राइल मुर्दाबाद के नारे गूंजने लगे। इधर, पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर पाबंदियों से उपजे ऊर्जा संकट के बाद भारत ने 2,50,000 वर्ग किलोमीटर के अनछुए तेल क्षेत्रों की बोली निकालने का ऐलान किया है।

पश्चिम एशिया के अशांत माहौल के बीच ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम का दूसरा दिन कई महत्वपूर्ण और कूटनीतिक घटनाक्रमों का गवाह बना। रविवार को तेहरान में उनके पार्थिव शरीर पर विशेष नमाज़ पढ़े जाने की तैयारियां की गईं, जहां पहले ही दिन से राजधानी की सड़कों पर लाखों लोगों का हुजूम अपने नेता को आखिरी विदाई देने के लिए उमड़ रहा है। राजकीय सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर को फिलहाल ग्रैंड मोसाला परिसर में रखा गया है, जहां से रविवार शाम तक इसे बाहर लाया जाएगा ताकि सोमवार को राजधानी तेहरान की सड़कों पर विशाल शोक जुलूस निकाला जा सके। इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान की सरकार ने रविवार को देश भर में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से थमा हुआ है और लोगों का ध्यान केवल इस ऐतिहासिक विदाई पर केंद्रित है।

नेतृत्व का संकट और उत्तराधिकारी की रहस्यमयी स्थिति

ईरान के राजनीतिक गलियारों में इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिवंगत नेता के ताबूत पर पढ़ी जाने वाली इस महत्वपूर्ण नमाज़ की अगुवाई कौन करेगा। सरकारी अधिकारियों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह जिम्मेदारी किसी वरिष्ठ धर्मगुरु को सौंपी जाएगी या फिर ख़ामेनेई के परिवार का ही कोई सदस्य इस धार्मिक अनुष्ठान को पूरा करेगा। अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने साल 1989 से लगातार ईरान की कमान संभाली थी और 86 वर्ष की आयु में 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया युद्ध के पहले ही दिन एक भीषण हवाई हमले में वे शहीद हो गए थे। इस हमले के बाद उनके बेटे मुज्तबा ख़ामेनेई को देश का नया उत्तराधिकारी और नया सर्वोच्च नेता घोषित तो कर दिया गया, लेकिन वे अब तक किसी भी सार्वजनिक मंच या कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए हैं। कूटनीतिक हलकों में यह आशंका जताई जा रही है कि वे भी उसी हवाई हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे जिसमें उनके पिता की जान गई थी।

ये भी पढ़ें

होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान की नई रणनीति और अमेरिकी आपत्ति

इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बीच ईरान ने वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। बीजिंग में आयोजित वर्ल्ड पीस फोरम को संबोधित करते हुए चीन में ईरान के राजदूत अब्दोलरेज़ा रहमानी फ़ज़ली ने स्पष्ट किया कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों पर ईरान जल्द ही सेवा शुल्क लागू करेगा। यद्यपि अमेरिकी सरकार इस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर चुकी है, लेकिन ईरान का तर्क है कि चूंकि यह जलमार्ग उसके क्षेत्रीय समुद्री क्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए वहां से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लेना उसका संप्रभु अधिकार है। राजदूत ने स्पष्ट किया कि इसे सामान्य टोल टैक्स की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक सुरक्षा और सेवा शुल्क होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह राहत भी दी कि ईरान के मित्र देशों को इस शुल्क में विशेष रियायतें प्रदान की जाएंगी।

युद्धविराम की अनिश्चितता और ओमान के साथ सहयोग

होर्मुज़ जलमार्ग को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही एक नाजुक समझौता काम कर रहा है। दोनों देशों के बीच हुए प्रारंभिक युद्धविराम के नियमों के तहत वाणिज्यिक जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी बाधा या शुल्क के इस मार्ग से आने-जाने की अनुमति मिली हुई है। हालांकि, यह तय अवधि समाप्त होने के बाद की स्थिति को लेकर वैश्विक बाजार में भारी अनिश्चितता है। इस संकट को सुलझाने और नई व्यवस्था स्थापित करने के लिए ईरान अब ओमान के साथ मिलकर इस समुद्री रास्ते पर नए नियम तैयार कर रहा है। राजदूत फ़ज़ली ने इसे दोनों देशों के साझा सहयोग का एक बड़ा प्रयास बताया है, जिससे आने वाले समय में वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन की लागत सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है।

ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्तों में नया मोड़

वैश्विक कूटनीति की एक और बड़ी हलचल अमेरिका से सामने आई है, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में संकेत दिया कि इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले सप्ताह व्हाइट हाउस का दौरा कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कूटनीतिक बातचीत के दौरान बेहद सीधे लहजे में कहा कि वे और इज़रायली प्रधानमंत्री एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और नेतन्याहू को भली-भांति पता है कि दोनों के रिश्तों में असली बॉस कौन है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान को समाप्त करने के तरीकों को लेकर दोनों नेताओं के बीच आपसी मतभेद और तनाव की खबरें लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।

नमाज़गाह पर उमड़ा जनसैलाब और ट्रंप को मौत की सजा की मांग

ईरान के भीतर से आ रही तस्वीरों और वीडियो में इमाम खोमैनी नमाज़गाह पर शोक में डूबे नागरिकों की अभूतपूर्व भीड़ देखी जा सकती है। यह बहु-दिवसीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रही सैन्य दुश्मनी पर एक अस्थायी विराम लगा हुआ है। इस पूरे आयोजन पर दुनिया भर के नीति-निर्माताओं की नज़रें टिकी हैं कि इस दफ़न प्रक्रिया में कौन से विदेशी राष्ट्रों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसी शोक सभा के दौरान माहौल उस समय और अधिक गर्मा गया जब मंच पर प्रस्तुति दे रहे एक ईरानी कलाकार ने खुलेआम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मौत की सजा दिए जाने की मांग कर दी, जिसने दोनों देशों के बीच कड़वाहट को और बढ़ाने का काम किया है।

भारत पर पड़ा बड़ा असर और घरेलू तेल खोज में तेजी

पश्चिम एशिया में छिड़े इस भयंकर संघर्ष का सीधा और सबसे गहरा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है। इस युद्ध के कारण भारत को पिछले कई दशकों के सबसे गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि इस अभूतपूर्व संकट ने भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है। भारत कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है और LPG खरीदने के मामले में वह दूसरे स्थान पर आता है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के दौरान जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर आवाजाही बाधित हुई, तो भारतीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया था। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने अब घरेलू स्तर पर तेल की खोज को युद्ध स्तर पर तेज करने का निर्णय लिया है और इसके तहत देश के लगभग 2,50,000 वर्ग किलोमीटर (लगभग 96,500 वर्ग मील) के अनछुए क्षेत्रों में तेल की खोज के लिए जल्द ही बोलियां आमंत्रित की जा रही हैं।

समाप्त

समाप्त

  1. पश्चिम एशिया युद्ध की ऊर्जा मार के बाद भारत ने घरेलू कच्चे तेल की खोज में तेज़ी लाने का फ़ैसला किया

    पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने भारत को दशकों का सबसे भीषण ऊर्जा आपूर्ति झटका दिया है, जिसके बाद देश घरेलू कच्चे तेल की खोज को रफ़्तार देने में जुट गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह जानकारी दी। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक और द्रवीभूत पेट्रोलियम गैस (LPG) का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार भारत, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने पर लगाई गई पाबंदियों की वजह से भारी आपूर्ति संकट में फंस गया था। पुरी ने कहा कि इस ऊर्जा तंगी ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने की भारत की कोशिशों को नई जान दी है। "हम अभी उस प्रक्रिया में हैं... करीब 2,50,000 वर्ग किलोमीटर (96,500 वर्ग मील) के अनछुए क्षेत्र की बोली निकालने के लिए," पुरी ने बताया। —AFP
  2. ख़ामेनेई की अंत्येष्टि में कलाकार ने ट्रंप को मौत की सज़ा दिलाने की खुलेआम मांग की

    ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई के जनाज़े के दौरान मंच पर आए एक कलाकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौत की खुलेआम मांग कर दी। —AP
  3. खामेनेई को अलविदा: ईरान के अंतिम संस्कार समारोह में कौन हो रहे हैं शामिल?

    ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के लिए एक भव्य अंतिम संस्कार समारोह आयोजित किया जा रहा है। यह बहु-दिवसीय अनुष्ठान ऐसे संवेदनशील समय में चल रहा है जब ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच शत्रुता पर अस्थायी विराम लगा हुआ है — और इन घटनाक्रमों के पश्चिम एशिया पर व्यापक परिणाम हो सकते हैं। जैसे-जैसे पूरा देश शोक में डूबा है, वैसे-वैसे दुनिया भर का ध्यान इस सवाल पर केंद्रित है कि पूर्व अयातुल्लाह के दफ़न में कौन-कौन से विदेशी नेता और प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
  4. इमाम खोमैनी की नमाज़गाह पर उमड़ी शोकाकुल भीड़, सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें

    सोशल मीडिया पर ईरान से आ रही तस्वीरों और वीडियो में इमाम खोमैनी की नमाज़गाह पर बड़ी तादाद में शोक संतप्त लोगों का हुजूम देखा जा सकता है।
  5. ट्रंप बोले — नेतन्याहू जानते हैं असली मालिक कौन है

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ऐक्सियस को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले हफ्ते ही व्हाइट हाउस पहुंच सकते हैं, और साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि नेतन्याहू उनके बीच की शक्ति-संरचना को पूरी तरह समझते हैं। यह संभावित मुलाकात ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों नेताओं के बीच खींचतान की रिपोर्टें हैं — खासकर ईरान के खिलाफ उस जंग को समाप्त करने की कोशिशों को लेकर, जिसे अमेरिका और इज़रायल ने मिलकर फरवरी के आखिर में शुरू किया था। ट्रंप ने ऐक्सियस के साथ एक संक्षिप्त फोन बातचीत में कहा, "हम दोनों की बहुत अच्छी बनती है। (नेतन्याहू) जानते हैं कि मालिक कौन है" — यह टिप्पणी उन्होंने साफ तौर पर खुद अपने बारे में की।
  6. ईरानी राजदूत बोले — मित्र देशों को होर्मुज़ शुल्क में विशेष राहत दी जाएगी

    ईरान के चीन में राजदूत अब्दोलरेज़ा रहमानी फ़ज़ली ने शनिवार को ज़ोर देकर कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाया जाएगा — हालांकि वॉशिंगटन पहले ही इस विचार को खारिज कर चुका है — लेकिन साथ ही यह भी कहा कि तेहरान के मित्र देशों को विशेष सुविधा दी जाएगी। ईरान और अमेरिका के बीच हुए प्रारंभिक युद्धविराम समझौते में यह तय हुआ था कि व्यापारिक जहाज 60 दिनों तक इस जलडमरूमध्य से बिना किसी शुल्क के आवाजाही कर सकेंगे, लेकिन इस अवधि के बाद की व्यवस्था अभी अनिश्चित बनी हुई है। बीजिंग में वर्ल्ड पीस फोरम को संबोधित करते हुए फ़ज़ली ने बताया कि उनका देश इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर "नई व्यवस्थाओं" के लिए ओमान के साथ मिलकर काम कर रहा है और उन्होंने इसे साझा सहयोग की पहल बताया। उन्होंने अनुवादित वक्तव्य में कहा, "होर्मुज़ हमारे क्षेत्रीय जल का हिस्सा है, इसलिए हम निश्चित रूप से सेवा शुल्क वसूलेंगे," लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई "टोल" नहीं होगा।
  7. ख़ामेनेई के जनाज़े का दूसरा दिन — आज शाम ग्रैंड मोसाला से निकलेगा पार्थिव शरीर

    ईरान के मारे गए सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के जनाज़े के दूसरे दिन रविवार को उनके ताबूत पर नमाज़ पढ़े जाने की तैयारी की गई — इससे पहले पहले दिन तेहरान में उमड़ी विशाल भीड़ उन्हें अंतिम विदाई दे चुकी थी। ईरानी अधिकारियों ने अभी यह घोषित नहीं किया है कि नमाज़ की अगुवाई कोई धर्मगुरु करेंगे या परिवार का कोई सदस्य। ख़ामेनेई 1989 से ईरान का नेतृत्व कर रहे थे और 86 वर्ष की आयु में 28 फरवरी को पश्चिम एशिया युद्ध के पहले दिन एक हवाई हमले में शहीद हुए। उनके पुत्र और नव-नामित उत्तराधिकारी मुज्तबा ख़ामेनेई को सर्वोच्च नेता घोषित किए जाने के बाद से अब तक सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है; कहा जा रहा है कि वे भी उसी हमले में घायल हुए थे। पूरे देश में रविवार को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है, और शाम तक ख़ामेनेई का पार्थिव शरीर ग्रैंड मोसाला परिसर से बाहर लाया जाएगा — जहां अभी वे राजकीय सम्मान के साथ रखे हुए हैं — और सोमवार को राजधानी में जनाज़े का जुलूस निकाले जाने की योजना है।

सवाल-जवाब

ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की मृत्यु कब और कैसे हुई?
अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई की मृत्यु 86 वर्ष की आयु में 28 फरवरी को पश्चिम एशिया युद्ध के पहले दिन हुए एक हवाई हमले में हुई थी।
ख़ामेनेई के बाद ईरान का नया उत्तराधिकारी किसे घोषित किया गया है?
उनके बेटे मुज्तबा ख़ामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया है, हालांकि वे हमले में घायल होने की खबरों के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की नई योजना क्या है?
ईरान होर्मुज़ जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर सेवा शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें उसके मित्र देशों को विशेष राहत दी जाएगी।
पश्चिम एशिया संकट का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर पड़ा है?
भारत को गंभीर आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ा है, जिसके बाद सरकार ने लगभग 2,50,000 वर्ग किलोमीटर के अनछुए क्षेत्रों में घरेलू कच्चे तेल की खोज तेज कर दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR