पश्चिम एशिया के अशांत माहौल के बीच ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम का दूसरा दिन कई महत्वपूर्ण और कूटनीतिक घटनाक्रमों का गवाह बना। रविवार को तेहरान में उनके पार्थिव शरीर पर विशेष नमाज़ पढ़े जाने की तैयारियां की गईं, जहां पहले ही दिन से राजधानी की सड़कों पर लाखों लोगों का हुजूम अपने नेता को आखिरी विदाई देने के लिए उमड़ रहा है। राजकीय सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर को फिलहाल ग्रैंड मोसाला परिसर में रखा गया है, जहां से रविवार शाम तक इसे बाहर लाया जाएगा ताकि सोमवार को राजधानी तेहरान की सड़कों पर विशाल शोक जुलूस निकाला जा सके। इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान की सरकार ने रविवार को देश भर में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से थमा हुआ है और लोगों का ध्यान केवल इस ऐतिहासिक विदाई पर केंद्रित है।
नेतृत्व का संकट और उत्तराधिकारी की रहस्यमयी स्थिति
ईरान के राजनीतिक गलियारों में इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिवंगत नेता के ताबूत पर पढ़ी जाने वाली इस महत्वपूर्ण नमाज़ की अगुवाई कौन करेगा। सरकारी अधिकारियों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह जिम्मेदारी किसी वरिष्ठ धर्मगुरु को सौंपी जाएगी या फिर ख़ामेनेई के परिवार का ही कोई सदस्य इस धार्मिक अनुष्ठान को पूरा करेगा। अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने साल 1989 से लगातार ईरान की कमान संभाली थी और 86 वर्ष की आयु में 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया युद्ध के पहले ही दिन एक भीषण हवाई हमले में वे शहीद हो गए थे। इस हमले के बाद उनके बेटे मुज्तबा ख़ामेनेई को देश का नया उत्तराधिकारी और नया सर्वोच्च नेता घोषित तो कर दिया गया, लेकिन वे अब तक किसी भी सार्वजनिक मंच या कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए हैं। कूटनीतिक हलकों में यह आशंका जताई जा रही है कि वे भी उसी हवाई हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे जिसमें उनके पिता की जान गई थी।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान की नई रणनीति और अमेरिकी आपत्ति
इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बीच ईरान ने वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। बीजिंग में आयोजित वर्ल्ड पीस फोरम को संबोधित करते हुए चीन में ईरान के राजदूत अब्दोलरेज़ा रहमानी फ़ज़ली ने स्पष्ट किया कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों पर ईरान जल्द ही सेवा शुल्क लागू करेगा। यद्यपि अमेरिकी सरकार इस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर चुकी है, लेकिन ईरान का तर्क है कि चूंकि यह जलमार्ग उसके क्षेत्रीय समुद्री क्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए वहां से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लेना उसका संप्रभु अधिकार है। राजदूत ने स्पष्ट किया कि इसे सामान्य टोल टैक्स की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक सुरक्षा और सेवा शुल्क होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह राहत भी दी कि ईरान के मित्र देशों को इस शुल्क में विशेष रियायतें प्रदान की जाएंगी।
युद्धविराम की अनिश्चितता और ओमान के साथ सहयोग
होर्मुज़ जलमार्ग को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही एक नाजुक समझौता काम कर रहा है। दोनों देशों के बीच हुए प्रारंभिक युद्धविराम के नियमों के तहत वाणिज्यिक जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी बाधा या शुल्क के इस मार्ग से आने-जाने की अनुमति मिली हुई है। हालांकि, यह तय अवधि समाप्त होने के बाद की स्थिति को लेकर वैश्विक बाजार में भारी अनिश्चितता है। इस संकट को सुलझाने और नई व्यवस्था स्थापित करने के लिए ईरान अब ओमान के साथ मिलकर इस समुद्री रास्ते पर नए नियम तैयार कर रहा है। राजदूत फ़ज़ली ने इसे दोनों देशों के साझा सहयोग का एक बड़ा प्रयास बताया है, जिससे आने वाले समय में वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन की लागत सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है।
ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्तों में नया मोड़
वैश्विक कूटनीति की एक और बड़ी हलचल अमेरिका से सामने आई है, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में संकेत दिया कि इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले सप्ताह व्हाइट हाउस का दौरा कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कूटनीतिक बातचीत के दौरान बेहद सीधे लहजे में कहा कि वे और इज़रायली प्रधानमंत्री एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और नेतन्याहू को भली-भांति पता है कि दोनों के रिश्तों में असली बॉस कौन है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान को समाप्त करने के तरीकों को लेकर दोनों नेताओं के बीच आपसी मतभेद और तनाव की खबरें लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।
नमाज़गाह पर उमड़ा जनसैलाब और ट्रंप को मौत की सजा की मांग
ईरान के भीतर से आ रही तस्वीरों और वीडियो में इमाम खोमैनी नमाज़गाह पर शोक में डूबे नागरिकों की अभूतपूर्व भीड़ देखी जा सकती है। यह बहु-दिवसीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रही सैन्य दुश्मनी पर एक अस्थायी विराम लगा हुआ है। इस पूरे आयोजन पर दुनिया भर के नीति-निर्माताओं की नज़रें टिकी हैं कि इस दफ़न प्रक्रिया में कौन से विदेशी राष्ट्रों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसी शोक सभा के दौरान माहौल उस समय और अधिक गर्मा गया जब मंच पर प्रस्तुति दे रहे एक ईरानी कलाकार ने खुलेआम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मौत की सजा दिए जाने की मांग कर दी, जिसने दोनों देशों के बीच कड़वाहट को और बढ़ाने का काम किया है।
भारत पर पड़ा बड़ा असर और घरेलू तेल खोज में तेजी
पश्चिम एशिया में छिड़े इस भयंकर संघर्ष का सीधा और सबसे गहरा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है। इस युद्ध के कारण भारत को पिछले कई दशकों के सबसे गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि इस अभूतपूर्व संकट ने भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है। भारत कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है और LPG खरीदने के मामले में वह दूसरे स्थान पर आता है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के दौरान जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर आवाजाही बाधित हुई, तो भारतीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया था। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने अब घरेलू स्तर पर तेल की खोज को युद्ध स्तर पर तेज करने का निर्णय लिया है और इसके तहत देश के लगभग 2,50,000 वर्ग किलोमीटर (लगभग 96,500 वर्ग मील) के अनछुए क्षेत्रों में तेल की खोज के लिए जल्द ही बोलियां आमंत्रित की जा रही हैं।



















