संसद का मानसून सत्र भारी हंगामे और कम उत्पादकता के साए में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। सत्र के अंतिम दिन दोनों सदनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखी बहस और नारेबाजी देखने को मिली। इस दौरान सरकार ने विवादित विदेश अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 यानी FCRA बिल को समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का निर्णय लिया। इसके अलावा, नीट परीक्षा विवाद, उत्तराखंड में कथित शुद्धिकरण कांड और खनन विधेयक पर भी पक्ष तथा विपक्ष के बीच जोरदार जुबानी जंग हुई।
FCRA विधेयक पर सरकार का नरम रुख और JPC को संदर्भ
अल्पसंख्यक समुदायों और ईसाई संगठनों की लगातार अपीलों के बाद केंद्र सरकार ने विदेश अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर अपना रुख लचीला किया। अनेक संगठनों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब, फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से सरकार से इस विधेयक को वापस लेने या संसदीय समिति को सौंपने का आग्रह किया था। 9 अगस्त को सरकार की ओर से इसके संकेत मिले, और 12 अगस्त को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में इस बिल को JPC को सौंपने का प्रस्ताव रखा। विपक्ष के हंगामे के बीच यह प्रस्ताव पारित हो गया, जिससे अब इस कानून के प्रावधानों पर विस्तृत विचार-विमर्श हो सकेगा।
नीट पेपर लीक पर अमित शाह का बयान और विपक्ष का पलटवार
सदन की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार नीट पेपर लीक और उससे जुड़े प्रदर्शनों पर पूरी चर्चा कराने को तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा कि सरकार चर्चा की अवधि बढ़ाने के लिए सहमत है। हालांकि, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। राहुल गांधी ने कहा, "देश के युवा यह जवाब चाहते हैं कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और गोलीबारी का आदेश किसने दिया था।" उन्होंने कहा कि युवाओं को गृह मंत्री के भाषण के बजाय जवाब की आवश्यकता है।
उत्तराखंड में 'शुद्धिकरण' विवाद पर राज्यसभा में हंगामा
राज्यसभा में 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए कथित 'शुद्धिकरण' का मामला गरमाया। नेता प्रतिपक्ष खड़गे ने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष से जुड़े लोगों ने यह कृत्य किया है। खड़गे ने सदन में कहा, "छुआछूत के इस कृत्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए, यही मेरी मांग है।" इसके जवाब में सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने कहा कि बीजेपी ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करती और पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। नड्डा ने आश्वासन दिया कि जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी टिप्पणी की कि छुआछूत एक सामाजिक बुराई है जिसकी निंदा सभी को करनी चाहिए, और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए।
खान और खनिज संशोधन विधेयक पर बहस और पारित होना
लोकसभा में बिना विस्तृत चर्चा के ध्वनि मत से पारित होने के बाद खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया। राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह वित्तीय संघवाद के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने जून में प्रकाशित उमर खालिद के पीएचडी शोध 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर' का उल्लेख करते हुए सिंहभूम के आदिवासी समुदायों के अधिकारों और उनके शोषण का मुद्दा उठाया। हालांकि, बाद में उच्च सदन ने इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
सत्र का विधायी लेखा-जोखा और उत्पादकता के आंकड़े
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि इस मानसून सत्र में कुल 12 विधेयक पारित किए गए। हालांकि, कामकाज के लिहाज से यह सत्र उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। निर्धारित समय की तुलना में लोकसभा में केवल 19 प्रतिशत और राज्यसभा में 39 प्रतिशत ही काम हो सका। राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने समापन भाषण में बताया कि उच्च सदन में महज 37 घंटे और 49 मिनट ही काम हो पाया। इसके अलावा, राज्यसभा ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी।
सदन के बाहर प्रदर्शन और समापन
दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद परिसर में मकर द्वार के पास सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की। लोकसभा में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी उपस्थित थे। सत्र की समाप्ति के बाद कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम और मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने और लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया।


















