पश्चिम एशिया में बीते कुछ दिनों से तनाव फिर एक बार सिर उठा चुका है। अमेरिका ने ईरान पर एक के बाद एक कई हमले किए हैं, जिससे कुछ समय पहले लागू हुआ नाजुक युद्धविराम अब खतरे में पड़ गया है। ताजा टकराव की शुरुआत समुद्र में जहाजों पर हुए हमलों से जुड़ी घटनाओं से हुई, और इसी बीच लेबनान ने भी अमेरिका से सीधी अपील करके इस पूरे मामले में अपनी चिंता जाहिर की है।
जहाजों पर हमलों से भड़का ताजा टकराव
अमेरिका की तरफ से ईरान पर हाल में कई दौर के हमले किए गए हैं। पहला हमला एवर लवली नाम के जहाज पर ईरान की तरफ से किए गए हमले के जवाब में हुआ। इसके कुछ समय बाद किकू नाम के एक और जहाज पर ड्रोन हमला हुआ, जिसके जवाब में अमेरिका ने दोबारा ईरान पर हमला बोला। यानी समंदर में जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने ही जमीन पर सैन्य कार्रवाई को नई हवा दी है।
ईरान का जवाबी हमला और कमजोर पड़ता युद्धविराम
खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के भीतर करीब 21 ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। दोनों तरफ से लगातार हो रहे इन हमलों ने इलाके में लागू युद्धविराम को बेहद कमजोर कर दिया है। शांति बहाली की कोशिशें अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई हैं, और आशंका जताई जा रही है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो टकराव और बड़ा रूप ले सकता है।
ओमान की भूमिका पर क्यों टिकी हैं निगाहें
इस पूरे घटनाक्रम में ओमान की भूमिका पर भी खास नजर बनी हुई है। खबरों के मुताबिक, ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। मौजूदा तनाव के बीच भी उससे उम्मीद जताई जा रही है कि वह दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर वापस लाने में मदद कर सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है
खबरों के मुताबिक, इस टकराव का असर भारत पर भी महसूस किया जा रहा है, और इसे लेकर देश में किसी बड़े फैसले की चर्चा भी चल रही है। पश्चिम एशिया में तेल आपूर्ति और शिपिंग रूट प्रभावित होने की आशंका के बीच भारत की नजर पूरे हालात पर बनी हुई है।
लेबनान ने ट्रंप से क्या मांग की
इसी बीच लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ़ औन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधी अपील की है। उन्होंने कहा है कि वाशिंगटन को इज़राइल पर दबाव बनाना चाहिए ताकि वह दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटा ले। औन की यह अपील ऐसे समय पर आई है जब पूरा पश्चिम एशिया पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव को लेकर सुर्खियों में है, और यह दिखाता है कि यह तनाव अब सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इलाके के दूसरे देशों को भी सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
फिलहाल स्थिति लगातार बदल रही है और युद्धविराम की स्थिति नाजुक बनी हुई है। सैन्य कार्रवाई, कूटनीतिक अपीलें और मध्यस्थता की कोशिशें एक साथ चल रही हैं, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिन इस टकराव के भविष्य की दिशा तय करने में अहम रहेंगे।



















