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लाइव: पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज, अमेरिका ने ईरान पर किए भीषण जवाबी हमले — 30 जुलाई 2026लाइव
30 जुल॰ 2026, 7:22 am (47 दिन पहले)· 0

लाइव: पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज, अमेरिका ने ईरान पर किए भीषण जवाबी हमले — 30 जुलाई 2026

पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों के बाद दोनों देशों के बीच जुबानी और सैन्य गतिरोध तेज हो गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य जहाजों को नुकसान पहुंचाने का दावा किए जाने के बाद वॉशिंगटन ने बयान जारी कर साफ किया है कि उसके सभी विमान सुरक्षित हैं।

पश्चिम एशिया में लगभग एक सप्ताह तक बनी अस्थिर शांति के बाद युद्ध का नया और भयानक दौर शुरू हो गया है। जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए मिसाइल हमलों के प्रतिशोध में अमेरिकी वायुसेना ने गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को ईरान के सैन्य ढांचों और कमान केंद्रों पर बड़े पैमाने पर जवाबी बमबारी की। इस भयंकर सैन्य कार्रवाई से हाल के दिनों में जारी कूटनीतिक वार्ताओं की बची-खुची उम्मीदें भी ध्वस्त हो गई हैं। इसके साथ ही संघर्ष का दायरा अब फारस की खाड़ी से निकलकर भूमध्य सागर तक फैल गया है, जहां मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर एक गैस टैंकर ड्रोन हमले की चपेट में आ गया। दूसरी तरफ जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने पांच ईरानी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, जबकि कुवैत में एक चीनी वाणिज्यिक परिसर पर हुए हमले में एक कर्मचारी की मौत हो गई। इस अभूतपूर्व तनाव के बीच ऊर्जा गलियारे कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

ईरान के सैन्य ठिकानों पर अमरीका का भीषण प्रहार और CENTCOM का बयान

अमेरिकी सैन्य बल के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि उसने ईरान के भीतर दर्जनों प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर अपनी व्यापक हवाई कार्रवाई का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अमेरिकी सेना के अनुसार यह दो घंटे से अधिक समय तक चला एक केंद्रित सैन्य अभियान था, जिसका उद्देश्य मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर पिछले दिनों हुए ईरानी मिसाइल हमलों का कड़ा जवाब देना था। अमेरिकी बमवर्षक और लड़ाकू विमानों ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुख्य सैन्य कमान केंद्रों, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च साइटों, उन्नत ड्रोन भंडारण परिसरों और तटीय निगरानी व वायु रक्षा तंत्रों पर सटीक हमला बोला।

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यह व्यापक सैन्य अभियान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सख्त चेतावनी के महज कुछ ही घंटों बाद आया, जो उन्होंने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए दी थी। जॉर्डन स्थित अमरीकी सैन्य अड्डे पर हुए मिसाइल प्रहार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि हालांकि ईरानी पक्ष ने पूर्व में हुए टकरावों के लिए खेद व्यक्त किया था, लेकिन अमरीकी बलों पर हालिया हमलों का जवाब देना अनिवार्य हो गया था। उन्होंने कहा था कि अब हमारी बारी है और हम उन पर बेहद जोरदार हमला करने जा रहे हैं, जिसके बाद ही भविष्य में किसी संभावित समझौते पर बात हो सकेगी। इस हवाई हमले से ठीक एक दिन पहले 29 जुलाई 2026 को अमरीका और सऊदी अरब ने इराक में संयुक्त सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान समर्थित उग्रवादी गुटों के ठिकानों को नष्ट किया था, जिसमें 20 से अधिक लड़ाके और 6 ईरानी सैन्य सलाहकार मारे गए थे। वहीं इजराइल ने भी लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अपनी सैन्य सतर्कता बढ़ा दी है।

दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी मीडिया में चल रही उन खबरों को पूरी तरह से भ्रामक और निराधार करार दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान ने तीन अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों और तीन अमरीकी जहाजों को नष्ट कर दिया है। CENTCOM ने स्पष्ट किया कि इस अभियान के दौरान अमेरिकी सेना के किसी भी विमान या संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इसके अलावा, अमेरिकी अधिकारियों ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि M/T नोरा नामक वाणिज्यिक पोत ने ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी को तोड़ा है।

केश्म द्वीप, ज़ंजन और कुवैत में जनहानि तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान

अमेरिकी बमबारी का प्रभाव ईरान के कई प्रांतों और पड़ोस के कुवैत तक देखा गया। फारस की खाड़ी में स्थित सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केश्म द्वीप पर अमरीकी हवाई हमले ने भारी तबाही मचाई। स्थानीय चिकित्सा अधिकारियों और होर्मोज़गान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के अनुसार केश्म द्वीप के चाह तांगू इलाके में एक रिहायशी मकान पर अमरीकी बंकर-ब्लास्टर बम गिरने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दुखद घटना में 2 वर्ष के एक छोटे बच्चे, उसके पिता और मां की जान चली गई, जबकि परिवार के दो अन्य मासूम बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। ईरानी मीडिया ने आरोप लगाया कि अमरीकी विमानों ने जॉर्डन स्थित सैन्य अड्डों से उड़ान भरकर नागरिक इलाकों पर बमबारी की।

केश्म द्वीप के अतिरिक्त उत्तर-पश्चिम ईरान के खुज़ेस्तान और ज़ंजन प्रांतों में भी भयंकर धमाकों की खबरें सामने आईं। ज़ंजन प्रांत में अमरीकी प्रहार की चपेट में आने से अंसार अल-महदी IRGC इकाई के तीन सैन्य कर्मियों की मौत हो गई। ज़ंजन में IRGC की प्रांतीय कमान ने 30 जुलाई 2026 को अपने तीन जवानों की शहादत की आधिकारिक पुष्टि की। उधर फारस की खाड़ी के उत्तरी छोर पर स्थित कुवैत में भी स्थिति बिगड़ गई। कुवैती सैन्य कमान के अनुसार गुरुवार सुबह उत्तरी कुवैत में स्थित एक चीनी निर्माण और व्यावसायिक फर्म की इमारत पर ईरानी मिसाइल या ड्रोन का टुकड़ा गिरने से इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और वहां कार्यरत एक कर्मचारी की जान चली गई।

जॉर्डन की वायु सीमा में मिसाइल मुठभेड़ और अल अज़राक एयर बेस का लक्ष्य

गुरुवार, 30 जुलाई 2026 की तड़के जॉर्डन के आकाश में भयंकर सैन्य मुठभेड़ देखने को मिली। जॉर्डन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि उनकी उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों ने पूर्व से अपनी सीमा की ओर आ रही पांच ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक किया और देश की सुरक्षा रणनीति के तहत उन्हें हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। मिसाइलों के मलबे से नीचे जमीन पर किसी भी नागरिक के हताहत होने या बड़ी संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है।

इस मिसाइल हमले के तुरंत बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर स्वीकार किया कि उनके बलों ने जॉर्डन स्थित अल अज़राक एयर बेस को निशाना बनाकर ये मिसाइलें दागी थीं। IRGC का दावा था कि अल अज़राक एयर बेस पर अमेरिकी वायुसेना के लड़ाकू विमान तैनात हैं और इसी ठिकाने का इस्तेमाल अमरीका ने केश्म द्वीप पर रिहायशी मकानों पर हमले करने के लिए किया था। ईरानी गार्ड्स का कहना था कि अल अज़राक पर किया गया हमला उस अमरीकी कार्रवाई का सीधा जवाब था जिसमें एक मासूम बच्चे समेत तीन नागरिकों की जान गई थी।

मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर ड्रोन हमला और होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा संकट

पश्चिम एशिया का युद्ध अब लाल सागर और फारस की खाड़ी के पारंपरिक दायरे को पार कर भूमध्य सागर के तट तक पहुंच गया है। मिस्र के मंत्रिमंडल और पेट्रोलियम मंत्रालय ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि 29 जुलाई 2026 को मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर दो तरल प्राकृतिक गैस (LNG) जहाजों में लगी भयंकर आग वास्तव में एक बाहरी ड्रोन हमले का परिणाम थी। यह 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से मिस्र के भूमध्यसागरीय क्षेत्र पर हुआ अपनी तरह का पहला हमला है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों एम्ब्रे और वैगार्ड के विवरण के अनुसार, एक अज्ञात ड्रोन ने अमेरिकी स्वामित्व वाली फ्लोटिंग स्टोरेज सुविधा 'एनर्गोस विंटर' के स्टारबोर्ड हिस्से पर सीधा प्रहार किया। इसके बाद आग की लपटें पास में खड़े ग्रीक स्वामित्व वाले गैस टैंकर 'गैसलॉग सालेम' तक फैल गईं। हालांकि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और कोई कर्मचारी घायल नहीं हुआ, लेकिन मिस्र सरकार ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। इस बीच यमन के हुती विद्रोहियों ने सबा समाचार एजेंसी के माध्यम से एक बयान जारी कर दमिएटा बंदरगाह हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है और कहा है कि मिस्र में किसी जहाज को निशाना बनाने की खबरें बेबुनियाद हैं।

दूसरी तरफ विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। शिप-ट्रैकिंग डेटा विश्लेषकों के अनुसार 29 जुलाई की रात कतरएनर्जी का एक बड़ा एलएनजी टैंकर 'अल अरीश' सुरक्षात्मक घेरे में होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहा। 11 जुलाई के बाद से इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाला यह पहला गैस टैंकर है। केपलर और एलएसईजी के आंकड़ों से पता चलता है कि 'अल अरीश' ने 4 से 6 जुलाई के बीच कतर के रास लफान टर्मिनल से एलएनजी लोड की थी।

हालांकि इस एक सफल मार्ग के विपरीत फारस की खाड़ी में अन्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा बना हुआ है। IRGC की नौसेना ने गुरुवार को घोषणा की कि 29 जुलाई की रात अमेरिकी वायुसेना के संरक्षण में दो तेल टैंकरों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के असुरक्षित दक्षिणी मार्ग से जबरन निकलने की कोशिश की। IRGC के अनुसार अमरीकी विमानों की उकसावे वाली कार्रवाई के बीच एक टैंकर में भीषण आग भड़क उठने के बाद दोनों जहाजों को उलटे पांव पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। IRGC ने कड़े शब्दों में दोहराया कि 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य उनके पूर्ण सैन्य नियंत्रण में है और यह ईरान की संप्रभु भूमि व जलक्षेत्र का हिस्सा है। ईरानी नौसेना ने चेतावनी दी है कि जब तक अमरीका की तरफ से अनुचित धमकियां और समुद्री हस्तक्षेप जारी रहेगा, तब तक बिना पूर्व अनुमति, सेवा शुल्क और निर्धारित मार्ग का पालन किए बिना किसी भी जहाज को इस जलडमरूमध्य से गुजरने नहीं दिया जाएगा।

चीन से 70 मिलियन डॉलर का गुप्त मिसाइल सौदा और ईरानी वायु रक्षा सुदृढ़ीकरण

अमेरिकी और इजराइली हवाई हमलों के सामने अपने सैन्य बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को देखते हुए तेहरान ने अपनी कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय कदम उठाया है। रक्षा मामलों की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार ईरान ने चीन के साथ कंधे पर रखकर दागे जाने वाले मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) की बड़ी खेप खरीदने का गुप्त अनुबंध किया है। लगभग 60 से 70 मिलियन डॉलर मूल्य के इस सौदे के तहत ईरान को अगले कुछ हफ्तों के भीतर चीन निर्मित 300 से 400 QW-12 और FN-16 मिसाइल लॉन्चरों की पहली खेप प्राप्त होगी।

यह रक्षा समझौता अमेरिकी और इजराइली अभियानों के शुरू होने के बाद से ईरान द्वारा अपनी हवाई सीमाओं को सुरक्षित करने का अब तक का सबसे बड़ा प्रयास माना जा रहा है। इस अनुबंध को पूरा करने में हांगकांग स्थित वित्तीय और व्यापारिक फर्म झोंगचिंग बाओशांग इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जिसने ईरानी रक्षा तंत्र और चीनी आपूर्तिकर्ताओं के बीच वित्तीय व लॉजिस्टिक सेतु का काम किया। इन मिसाइलों के आने से ईरान की पैदल सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अमरीकी ड्रोन और लड़ाकू विमानों से निपटने में अतिरिक्त सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।

पटरी से उतरी कूटनीति, पाकिस्तान का मध्यस्थता प्रयास और यूरोपीय अड्डों पर ईरानी दबाव

सैन्य टकराव के अचानक भीषण रूप लेने से अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष रूप से चल रही शांति वार्ता पटरी से उतर गई है। यद्यपि वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह दावा करते रहे हैं कि तेहरान आर्थिक और सैन्य दबाव के कारण बातचीत की मेज पर आने के लिए मिन्नतें कर रहा है, लेकिन ईरान के उप विदेश मंत्री ने इन दावों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि ईरान ने पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से अमरीका के साथ किसी भी स्तर की वार्ता फिर से शुरू करने का कोई अनुरोध नहीं किया है।

इस बढ़ते गतिरोध के बीच पाकिस्तान ने दोनों परमाणु संपन्न और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव कम करने के लिए राजनयिक प्रयास तेज कर दिए हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस्लामाबाद में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनका देश अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान पिछले महीने हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) और 22 जून के पाकिस्तान-कतर संयुक्त बयान की भावना के अनुरूप दोनों पक्षों को तकनीकी स्तर की वार्ता में शामिल करने का प्रयास कर रहा है। प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास वाणिज्यिक जहाजरानी को सुरक्षित करने और युद्धविराम का मार्ग प्रशस्त करने के लिए वाशिंगटन और तेहरान दोनों से अत्यधिक संयम बरतने की अपील की।

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी सैन्य घेराबंदी को तोड़ने के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूरोपीय देशों पर राजनयिक दबाव बढ़ा दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुल्गारिया की विदेश मंत्री वेलिसलावा पेट्रोवा-चामोवा से फोन पर वार्ता कर बुल्गारिया के बेज़मेर एयर बेस पर अमेरिकी सैन्य विमानों की अस्थायी तैनाती की अनुमति देने के फैसले का कड़ा विरोध जताया। अब्बास अराघची ने कहा कि सोफिया द्वारा अपने ठिकाने का इस्तेमाल अमरीकी अभियानों के लिए करने देना ईरान के खिलाफ प्रत्यक्ष आक्रामकता को बढ़ावा देने के समान है, जो दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों के विपरीत है। इसके अलावा ईरानी विदेश मंत्री ने साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्सटेंटिनोस कोम्बोस के साथ भी गहन बातचीत की और इस बात पर जोर दिया कि साइप्रस की भूमि पर स्थित किसी भी विदेशी सैन्य अड्डे को ईरान विरोधी अभियानों का मंच नहीं बनने दिया जाना चाहिए।

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  1. अमेरिकी सेना का बयान: ईरानी हमलों में किसी भी अमेरिकी विमान को नहीं पहुंचा नुकसान

    अमेरिकी सेना ने आज स्पष्ट किया कि ईरान द्वारा हाल ही में किए गए हमले के प्रयासों में उसका कोई भी विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है। इसके साथ ही वॉशिंगटन ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें तीन अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों और तीन अन्य जहाजों को तबाह करने की बात कही गई थी। एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमान ने यह भी कहा कि व्यावसायिक पोत M/T नोरा ने ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी को नहीं तोड़ा है। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के सरकारी मीडिया पर चल रही इस तरह की खबरों का भी खंडन किया।
  2. अमेरिकी अभियानों के लिए सैन्य अड्डों के इस्तेमाल पर ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने यूरोपीय देशों से की बात

    ईरानी सरकारी मीडिया की आज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुल्गारिया से बेज़मेर एयर बेस पर अमेरिकी सैन्य विमानों की अस्थायी तैनाती की अनुमति देने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। अपनी बुल्गारियाई समकक्षी वेलिसलावा पेट्रोवा-चामोवा के साथ फोन पर हुई बातचीत में, अराघची ने कहा कि सैन्य अभियानों में मदद के लिए ठिकाने पर अमेरिकी विमान तैनात करने की सोफिया की मंजूरी ईरान के खिलाफ आक्रामकता को बढ़ावा देने के समान है। उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह से अस्वीकार्य है और दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से सौहार्दपूर्ण संबंधों के विपरीत है। इसके अलावा, अराघची ने साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्सटेंटिनोस कोम्बोस के साथ एक अलग फोन वार्ता की, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साइप्रस स्थित विदेशी सैन्य अड्डों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने देना बेहद महत्वपूर्ण है।
  3. मिस्र के बंदरगाह पर हुए ड्रोन हमले में हमारा हाथ नहीं: हुती विद्रोही

    यमन के हुती विद्रोहियों ने गुरुवार (30 जुलाई, 2026) को स्पष्ट किया कि मिस्र के डामिएटा बंदरगाह में अमेरिकी स्वामित्व और संचालन वाले गैस भंडारण जहाज पर एक दिन पहले हुए ड्रोन हमले के पीछे उनका हाथ नहीं था। हुती से जुड़ी समाचार एजेंसी सबा के मुताबिक, संगठन के विदेश मामलों के कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि मिस्र अरब गणराज्य के डामिएटा पोर्ट में यमन द्वारा किसी पोत को निशाना बनाने की बात कहने वाली अफवाहें पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
  4. उत्तर-पश्चिम ईरान पर अमेरिकी हमले में तीन रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कर्मियों की मौत: तेहरान

    ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने आज पुष्टि की कि देश के उत्तर-पश्चिमी प्रांत ज़ंजन पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किए गए हमले में उनके तीन कर्मियों की मृत्यु हो गई है। तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, गार्ड्स की प्रांतीय शाखा ने एक बयान जारी कर बताया कि 30 जुलाई 2026 को अमेरिकी बलों द्वारा की गई कार्रवाई में अंसार अल-महदी IRGC इकाई के तीन समर्पित जवान मारे गए।
  5. अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने का हर संभव प्रयास कर रहा है पाकिस्तान: विदेश मंत्रालय

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आज कहा कि इलाके में बढ़ते तनाव के बीच वह पिछले महीने हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत अमेरिका और ईरान को दोबारा वार्ता की मेज पर लाने के लिए "हर संभव प्रयास" कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान संवाद और कूटनीति का पूरी तरह समर्थन करता है, क्योंकि यही आगे बढ़ने का अकेला व्यावहारिक रास्ता है। अंद्राबी ने बताया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पुरानी बातचीत को बहाल करने और लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए पाकिस्तान इस्लामाबाद MoU और 22 जून के पाकिस्तान-कतर संयुक्त बयान की भावना के अनुरूप काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में झड़पों में थोड़ी कमी आने के बावजूद पश्चिम एशिया के नाजुक सुरक्षा हालात को लेकर पाकिस्तान बेहद चिंतित है। प्रवक्ता के मुताबिक, इस अस्थायी ठहराव से एक टिकाऊ और पूरी तरह से लागू होने वाले युद्धविराम की उम्मीद जगी है, जिससे अंततः बातचीत का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच दुश्मनी खत्म करने और वार्ता फिर शुरू करने की दिशा में हो रहे सभी प्रयासों का स्वागत किया और बताया कि विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास स्थिति को सामान्य बनाने और तनाव घटाने के लिए बातचीत जारी है। अंद्राबी ने वॉशिंगटन और तेहरान दोनों से अत्यधिक संयम बरतने तथा इस्लामाबाद MoU एवं पाकिस्तान-कतर संयुक्त बयान के अनुसार तकनीकी स्तर की वार्ता शुरू करने की अपनी प्रतिबद्धता निभाने की अपील की।
  6. जोर्डन की सेना ने अपनी सीमा की ओर आ रही 5 ईरानी मिसाइलों को मार गिराया

    जोर्डन के सैन्य बल ने गुरुवार (30 जुलाई 2026) को जानकारी दी कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के इलाके को निशाना बनाकर दागी गई पांच ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सेना ने स्पष्ट किया कि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। बाद में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जोर्डन के अल अज़राक एयर बेस पर हमला करने की बात स्वीकार की और कहा कि उनका लक्ष्य वहां मौजूद अमेरिकी विमान थे। सैन्य प्रवक्ता ने बताया कि गुरुवार तड़के ईरान की तरफ से दागी गई पांच मिसाइलों को रक्षा प्रणालियों ने चिन्हित किया और पूर्व-निर्धारित सुरक्षा योजनाओं के अनुसार उन्हें सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपने बयान में आरोप लगाया कि अमेरिका ने जोर्डन में मौजूद सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करके केशम द्वीप पर स्थानीय नागरिकों के दो मकानों पर बंकर-ब्लास्टर बमों से हवाई हमला किया था। ईरानी गार्ड्स के अनुसार, उस अमेरिकी हमले में एक पिता, माता और बच्चे की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य बच्चे घायल हुए थे। दोनों पक्षों के बीच कुछ दिनों के ठहराव के बाद रात भर अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर दोबारा हमले किए। अमेरिका ने जोर्डन पर हुए हमलों के जवाब में ईरान के भीतर "भारी" बमबारी करने की पुष्टि की। लड़ाई में आया यह ठहराव दोनों देशों के बीच बातचीत को फिर से शुरू करने के मकसद से हुआ था, और पाकिस्तानी मध्यस्थों ने गुरुवार को कहा कि तनाव कम करने के कूटनीतिक प्रयास अभी भी जारी हैं।
  7. मिस्र के दामिएटा बंदरगाह पर लगी आग ड्रोन हमले का परिणाम थी: प्रधानमंत्री कार्यालय

    मिस्र की सरकार ने गुरुवार (30 जुलाई 2026) को खुलासा किया कि दामिएटा बंदरगाह पर एक दिन पहले लगी आग वास्तव में ड्रोन हमले की वजह से हुई थी। पश्चिम एशिया युद्ध शुरू होने के बाद से यह मिस्र में इस तरह का पहला हमला है। अधिकारियों ने बताया था कि बुधवार (29 जुलाई 2026) को लगी आग में दो गैस जहाजों को नुकसान पहुंचा था। ब्रिटेन स्थित निजी सुरक्षा निगरानी संस्था एम्ब्रे ने कहा कि आग की शुरुआत अमेरिकी स्वामित्व वाले एक LNG फ्लोटिंग स्टोरेज पोत पर ड्रोन हमले से हुई थी। हालांकि अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान क्षेत्र में अन्य जगह ऊर्जा सुविधाओं को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया जाता रहा है, लेकिन मिस्र अब तक इससे बचा हुआ था। मिस्र के मंत्रिमंडल ने कहा कि शुरुआती जांच में यह पाया गया है कि घटना ड्रोन हमले का परिणाम थी। हालांकि, अभी तक किसी भी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। मंत्रिमंडल ने आगे बताया कि घटना के सभी पहलुओं की जांच जारी है ताकि पूरे घटनाक्रम को समझा जा सके और मिस्र के राष्ट्रीय हितों व सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।
  8. अमेरिकी हमले में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के 3 सदस्यों की मौत

    ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के तीन जवान मारे गए हैं।
  9. मिस्र के बंदरगाह पर ड्रोन हमले से पश्चिम एशिया में संघर्ष और फैलने की चिंता बढ़ी

    मिस्र के मंत्रिमंडल ने गुरुवार (30 जुलाई 2026) को पुष्टि की कि भूमध्य सागर पर स्थित दामिएटा बंदरगाह पर दो गैस जहाजों में लगी आग ड्रोन हमले के कारण हुई थी। इससे पहली बार यह साफ हुआ कि एक दिन पहले हुई घटना कोई दुर्घटना नहीं बल्कि हमला थी। मंत्रिमंडल ने बताया कि किसी भी समूह ने अब तक इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, और अधिकारी मिस्र की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक उपाय कर रहे हैं तथा जांच जारी रखे हुए हैं। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे ने 29 जुलाई को बताया था कि बंदरगाह पर अमेरिकी स्वामित्व वाले एक गैस स्टोरेज टैंकर पर ड्रोन से हमला किया गया था, जिससे पश्चिम एशिया में संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका पैदा हो गई थी। घटना से वाकिफ तीन व्यापारिक स्रोतों ने बताया कि ड्रोन ने फ्लोटिंग स्टोरेज टैंकर 'एनर्गोस विंटर' को निशाना बनाया, जिससे लगी आग पास में खड़े दूसरे जहाज 'गैसलॉग सालेम' तक फैल गई। ब्रिटिश समुद्री जोखिम प्रबंधन समूह वैगार्ड के अनुसार, 'एनर्गोस विंटर' के स्टारबोर्ड हिस्से पर किसी अज्ञात मिसाइल या ड्रोन से प्रहार हुआ, जिससे आग लग गई जिसे बाद में बुझा दिया गया। इस हमले के पीछे किसका हाथ था यह अभी स्पष्ट नहीं है। यह घटना ईरान द्वारा जोर्डन में अमेरिकी बलों पर किए गए मिसाइल हमले और अमेरिका तथा सऊदी अरब द्वारा इराक में ईरान-समर्थित अर्धसैनिक समूहों पर किए गए हमलों के तुरंत बाद हुई।
  10. 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य हमारी भूमि है': IRGC ने अमेरिका की मदद करने वाले देशों को दी गंभीर चेतावनी

    ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के दक्षिण में एक "असुरक्षित रास्ते" से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों में से एक में आग लगने के बाद दोनों वापस लौट गए। IRGC ने बयान जारी कर बताया, "बीती रात, अमेरिकी इशारे पर दो तेल टैंकरों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के दक्षिण में बने असुरक्षित रास्ते से हटने का प्रयास किया। इनमें से एक में भयंकर आग लगने के बाद दोनों जहाज तेजी से पीछे मुड़ गए।" सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण जताते हुए IRGC ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य उनकी भूमि है और IRGC की नौसेना का इस पर पूरा नियंत्रण है। उन्होंने चेतावनी दी कि हजारों किलोमीटर दूर से आए किसी भी बाहरी तत्व को इसमें हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बयान में आगे कहा गया कि ईश्वर की कृपा से हमलावर को आज ही सजा दी जाएगी।
  11. सूत्रों का दावा: चीन से कुछ ही हफ्तों में ईरान को मिलेंगे कंधे पर रखकर दागे जाने वाले मिसाइल सिस्टम

    अमेरिका के साथ जारी युद्ध के बीच अपनी सैन्य सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयास में ईरान को अगले कुछ हफ्तों के भीतर चीन में बने कंधे पर रखकर दागे जाने वाले वायु रक्षा मिसाइल लॉन्चरों की पहली खेप मिल सकती है। इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों ने यह जानकारी दी है, जिसके तहत कुल 400 तक लॉन्चर पहुंचाए जा सकते हैं। लगभग 60 से 70 मिलियन डॉलर मूल्य का यह सौदा अमेरिका और इजराइल के साथ सैन्य टकराव शुरू होने के बाद से अपने कम दूरी के हवाई रक्षा तंत्र को मजबूत करने का तेहरान का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञात प्रयास है। इस युद्ध ने ईरान के सैन्य अड्डों और बुनियादी ढांचों की सुरक्षा कमियों को उजागर कर दिया था। सूत्रों के अनुसार, इस अनुबंध में 300 से 400 मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) की खरीद शामिल है, जिनमें चीन निर्मित QW-12 और FN-16 मिसाइलें शामिल हैं। यह समझौता हांगकांग स्थित कंपनी झोंगचिंग बाओशांग इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट के साथ हुआ, जिसके बारे में सूत्रों का कहना है कि वह ईरानी पक्ष और चीनी आपूर्तिकर्ता के बीच एक बिचौलिए के रूप में काम कर रही थी।
  12. ईरानी हमले से कुवैत में चीनी कंपनी की इमारत क्षतिग्रस्त, एक की मौत

    कुवैत की सेना ने जानकारी दी है कि गुरुवार सुबह (30 जुलाई, 2026) उत्तरी कुवैत में एक चीनी फर्म की इमारत पर ईरानी हमले से भारी नुकसान हुआ और एक कर्मचारी की जान चली गई। यह घटना जॉर्डन द्वारा ईरान से दागी गई पांच मिसाइलों को मार गिराए जाने के कुछ ही घंटों बाद हुई। यह हमला तब सामने आया जब अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने जॉर्डन में अपने अड्डे पर हुए पिछले ईरानी मिसाइल हमले के जवाब में ईरान के खिलाफ भारी बमबारी की एक श्रृंखला पूरी कर ली है। सेंट्रल कमान ने सोशल मीडिया पर बताया कि अमेरिका ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े दर्जनों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें सैन्य कमान केंद्र, मिसाइल और ड्रोन ठिकाने, तथा तटीय निगरानी व रक्षा स्थल शामिल हैं। जॉर्डन की सरकारी पेट्रा समाचार एजेंसी ने वहां के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता के हवाले से कहा कि जॉर्डन द्वारा मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किए जाने की कार्रवाई में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
  13. होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आग लगने के बाद वापस लौटे दो तेल टैंकर: ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स

    ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने गुरुवार (30 जुलाई, 2026) को कहा कि अमेरिका के समर्थन से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों में से एक में आग लगने के बाद दोनों जहाज वापस लौट गए। गार्ड्स द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि बुधवार रात अमरीकी विमानों के उकसावे पर दो तेल टैंकरों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के असुरक्षित दक्षिणी रास्ते से निकलने का प्रयास किया था। हालांकि, उनमें से एक जहाज पर भीषण आग भड़कने के बाद दोनों पोत तेजी से पीछे मुड़ गए। मध्य पूर्व में 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरान का होर्मुज़ पर नियंत्रण बना हुआ है। इसके बाद से ईरान का कहना है कि ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को पूर्व अनुमति लेने, सेवा शुल्क चुकाने और ईरान द्वारा तय किए गए मार्ग से ही गुजरने की आवश्यकता है। गुरुवार को इस शक्तिशाली सैन्य बल ने दोहराया कि यह जलडमरूमध्य उनका क्षेत्र है और जब तक अमेरिकी अधिकारियों की ओर से अनुचित बयानबाजी, धमकियां और क्षेत्र में समुद्री आवाजाही में हस्तक्षेप जारी रहेगा, तब तक इसे फिर से नहीं खोला जा सकता।
  14. जॉर्डन के वायु रक्षा तंत्र ने ईरान से दागी गईं पांच मिसाइलों को किया ढेर: समाचार एजेंसी

    जॉर्डन के वायु रक्षा तंत्र ने गुरुवार सुबह (30 जुलाई, 2026) ईरान की तरफ से दागी गईं पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। देश की सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा के अनुसार, यह जानकारी जॉर्डन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने दी है। समाचार एजेंसी ने बताया कि इन मिसाइलों को नष्ट किए जाने के बाद किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी सेना ने जॉर्डन स्थित अपने सैन्य ठिकाने पर हुए पिछले ईरानी मिसाइल हमले के जवाब में ईरान पर भीषण हमले पूरे करने का दावा किया था। अमेरिकी सेंट्रल कमान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताया कि दो घंटे से अधिक समय तक चले अभियानों में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें सैन्य कमान केंद्र, मिसाइल और ड्रोन ठिकाने तथा तटीय निगरानी और रक्षा स्थल शामिल हैं। यह नई सैन्य कार्रवाई अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जॉर्डन के उस बेस को निशाना बनाए जाने के बाद ईरान पर कड़ा प्रहार करने की चेतावनी देने के कुछ ही घंटों बाद हुई है, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में स्थित केश्म द्वीप पर हुए हमलों में दो लोग घायल हो गए, जबकि उत्तर-पश्चिम में खुज़ेस्तान प्रांत में भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
  15. सऊदी अरब की भागीदारी से अमेरिका-ईरान संघर्ष में नया मोड़, रुकीं कूटनीतिक कोशिशें

    अमेरिका और ईरान के बीच रुक-रुक कर चल रही जंग अब एक नए चरण में प्रवेश करती दिख रही है, क्योंकि सऊदी अरब भी तेहरान समर्थित समूहों के खिलाफ सैन्य अभियानों में खुलकर शामिल हो गया है। इसके साथ ही, दोनों चिर-प्रतिद्वंद्वियों के बीच गहराते अविश्वास के कारण युद्ध रोकने के लिए जारी नाजुक कूटनीतिक बातचीत एक बार फिर पटरी से उतर गई है। कुछ दिनों की शांति के बाद, बीते 24 घंटों में दोनों पक्षों ने सैन्य हमले किए हैं, जिससे एक बार फिर व्यापक युद्ध छिड़ने और क्षेत्र में इसके विस्तार का जोखिम पैदा हो गया है। वहीं, भावी रणनीति को लेकर अमरीकी या ईरानी अधिकारियों के रुख में बहुत कम स्पष्टता है। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों का दावा रहा है कि ईरान बातचीत की मेज पर लौटने के लिए मिन्नतें कर रहा है, लेकिन ईरान के उप विदेश मंत्री ने मंगलवार को साफ किया कि उनके देश ने पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से बातचीत शुरू करने का कोई अनुरोध नहीं किया है। जॉर्डन में अमरीकी सैन्य ठिकाने पर नाकाम हमले के बाद, डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (29 जुलाई, 2026) को फिर से कड़ी चेतावनी दी, हालांकि उन्होंने भावी बातचीत की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "वे पहले ही माफी मांग चुके हैं, लेकिन हमें उन्हें थोड़ा जवाब देना ही होगा।" उन्होंने आगे जोड़ा, "अब हमारी बारी है और देखेंगे कि क्या हम किसी बिंदु पर समझौते तक पहुंच पाते हैं। लेकिन हम उन पर बहुत जोरदार हमला करने जा रहे हैं।" इसके कुछ ही घंटे बाद, अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पुष्टि की कि उसने "पश्चिम एशिया में तैनात अमरीकी बलों पर हुए कल के ईरानी हमलों के प्रयास का करारा जवाब दिया है।" हालांकि सेना ने तुरंत उन ठिकानों के नामों का खुलासा नहीं किया जिन पर हमले किए गए थे।
  16. अमेरिकी बलों पर मिसाइल हमले की कोशिश नाकाम होने के बाद अमेरिका ने ईरानी ठिकानों को बनाया निशाना

    जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैनिकों पर तेहरान के हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने बुधवार (29 जुलाई, 2026) को ईरान के ठिकानों पर जवाबी प्रहार किया। इससे पहले अमेरिका ने पड़ोसी देश इराक में ईरान समर्थित गुटों पर हमला करने के लिए सऊदी अरब के साथ हाथ मिलाया था, जिसमें कम से कम 20 लड़ाके और छह ईरानी सलाहकार मारे गए थे। यह नई सैन्य कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकाने पर हमले के बाद ईरान पर 'बेहद कड़ा' प्रहार करने का संकल्प जताने के कुछ ही घंटों बाद हुई है। ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में स्थित केश्म द्वीप पर हुए हमलों में दो लोग घायल हुए हैं, जबकि उत्तर-पश्चिम में स्थित खुज़ेस्तान प्रांत में भी धमाकों की खबर मिली है। दूसरी तरफ, ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा फर्म एम्ब्रे के मुताबिक, मिस्र के दमिएत्ता बंदरगाह पर प्राकृतिक गैस ले जाने वाले दो पोतों पर ड्रोन हमले के बाद आग लग गई। अमेरिका के स्वामित्व वाली फ्लोटिंग स्टोरेज सुविधा और ग्रीक स्वामित्व वाले टैंकर पर हुए इस हमले की जिम्मेदारी तुरंत स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसमें किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
  17. ईरानी मीडिया का दावा: केश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले में तीन लोगों की मौत

    अमेरिकी सेना द्वारा हमलों का एक जोरदार दौर पूरा करने की घोषणा के बाद, फ़ारस समाचार एजेंसी ने गुरुवार को रिपोर्ट दी कि ईरान के केश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले में दो साल के बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गई। होर्मोज़गान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज के हवाले से फ़ारस ने बताया, "केश्म के चाह तांगू इलाके में एक रिहायशी मकान पर अमेरिकी हमले में एक ही परिवार के तीन लोगों—पिता, मां और उनके 2 साल के बच्चे की मौत हो गई।" एजेंसी ने यह भी बताया कि परिवार के दो अन्य बच्चे घायल हुए हैं।
  18. लगभग तीन हफ्तों में पहली बार होर्मुज़ जलडमरूमध्य से निकला कतरएनर्जी का एलएनजी टैंकर

    शिप-ट्रैकिंग विश्लेषकों द्वारा गुरुवार (30 जुलाई) को साझा की गई जानकारी के अनुसार, कतरएनर्जी द्वारा नियंत्रित एक तरल प्राकृतिक गैस (LNG) टैंकर रात में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बाहर निकल आया। 11 जुलाई के बाद से इस रणनीतिक जलमार्ग को पार करता हुआ दिखने वाला यह पहला ऐसा पोत है। केपलर और एलएसईजी के आंकड़ों से पता चलता है कि 'अल अरीश' नामक इस टैंकर ने 4 से 6 जुलाई के बीच कतर के रास लफान टर्मिनल से कार्गो लोड किया था और 29 जुलाई की रात को इस जलडमरूमध्य से बाहर की ओर उड़ान भरी।
  19. CENTCOM ने ईरान पर व्यापक हमलों का दौर पूरा करने का किया दावा

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी सशस्त्र बलों ने बुधवार (29 जुलाई, 2026) को ईरान के विरुद्ध बड़े पैमाने पर की गई सैन्य कार्रवाई का दौर पूरा कर लिया है। इसके साथ ही वॉशिंगटन ने एक छोटे अंतराल के बाद तेहरान पर दोबारा सैन्य दबाव बढ़ा दिया है। CENTCOM ने बुधवार देर शाम जारी बयान में कहा कि उसकी इकाइयों ने "अमेरिकी बलों पर बीते दिन किए गए मिसाइल हमलों के प्रयास के प्रतिशोध में ईरान में जोरदार हमलों की श्रृंखला सफलतापूर्वक संपन्न की है।" इस अभियान के दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के सैन्य कमान केंद्रों समेत दर्जनों प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया गया।
  20. अमेरिकी सेना ने ईरान पर की बड़ी जवाबी कार्रवाई

    पश्चिम एशिया में युद्ध के फिर से भड़कने और इस्लामी गणराज्य के सहयोगी समूहों के शामिल होने के बीच, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तेहरान के हमलों का बदला लेने के लिए अमेरिकी सेना ने गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को ईरान पर "शक्तिशाली" हमले किए। लगभग एक हफ्ते की शांति के बाद हुए इन नए हमलों ने कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीदों को खत्म कर दिया है। US सेंट्रल कमांड ने बयान में कहा, "यह कार्रवाई मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी बलों पर कल किए गए ईरानी हमले के प्रयासों का एक कठोर जवाब है।" इसके अलावा, सऊदी अरब और अमेरिका ने बुधवार को इराक में स्थित उग्रवादी ठिकानों पर हमलों की जानकारी दी, जबकि अमेरिकी सहयोगी इजराइल ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया।
  21. मिस्र के बंदरगाह पर गैस टैंकर से टकराया ड्रोन: ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी

    ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, बुधवार (29 जुलाई 2026) को मिस्र के भूमध्यसागरीय बंदरगाह दमिएटा में अमेरिकी स्वामित्व वाले एक गैस भंडारण टैंकर से ड्रोन टकराया, जो पश्चिम एशिया संघर्ष के और व्यापक होने का संकेत दे सकता है। हालांकि, मिस्र के पेट्रोलियम मंत्रालय ने बंदरगाह पर आग लगने की पुष्टि की, लेकिन ड्रोन हमले का कोई जिक्र नहीं किया और न ही आग लगने का कारण बताया। दमिएटा बंदरगाह पर स्थित गैस स्टोरेज टैंकर पर हुए ड्रोन हमले से आग लग गई और क्षेत्रीय तनाव और अधिक गहरा गया।

सवाल-जवाब

अमरीका ने ईरान पर हाल ही में कौन से बड़े सैन्य हमले किए हैं?
अमरीकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जॉर्डन में अमरीकी सैनिकों पर हुए हमलों के जवाब में 30 जुलाई 2026 को ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सैन्य कमान केंद्रों, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों तथा तटीय रक्षा प्रणालियों पर दो घंटे से अधिक समय तक भीषण हवाई हमले किए।
मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर क्या घटना घटी है?
29 जुलाई 2026 को मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर खड़े अमरीकी स्वामित्व वाले गैस स्टोरेज टैंकर 'एनर्गोस विंटर' पर एक अज्ञात ड्रोन से हमला हुआ, जिससे लगी आग पास के ग्रीक टैंकर 'गैसलॉग सालेम' तक फैल गई। मिस्र सरकार ने इसकी ड्रोन हमले के रूप में पुष्टि की है।
क्या होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है?
कतरएनर्जी का एलएनजी टैंकर 'अल अरीश' 11 जुलाई के बाद पहली बार 29 जुलाई की रात होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहा, हालांकि IRGC ने कहा है कि अमरीकी समर्थन से जबरन गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों में से एक में आग लगने के बाद वे वापस लौट गए।
जॉर्डन की सेना ने अमरीकी अड्डे की सुरक्षा में क्या कार्रवाई की?
जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने 30 जुलाई की सुबह देश की ओर आ रही 5 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। ईरान के IRGC ने स्वीकार किया कि उसने जॉर्डन के अल अज़राक एयर बेस को निशाना बनाया था।
ईरान ने अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए चीन से क्या रक्षा समझौता किया है?
ईरान ने हांगकांग की मध्यस्थ कंपनी के जरिए चीन से 60 से 70 मिलियन डॉलर मूल्य के 300 से 400 कंधे पर रखकर दागे जाने वाले MANPADS मिसाइल लॉन्चर (QW-12 और FN-16) खरीदने का समझौता किया है।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फिर शुरू कराने के प्रयास हो रहे हैं?
हाँ, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह इस्लामाबाद MoU और पाकिस्तान-कतर संयुक्त बयान के तहत वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव घटाने और तकनीकी वार्ता शुरू कराने के लिए राजनयिक प्रयास कर रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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