मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में 14 जुलाई को वारासिवनी थाना क्षेत्र के कोपे और डोंगरिया गांवों के बीच जंगल से पुलिस को एक शव मिला। मृतक की पहचान डोंगरिया गांव के 40 वर्षीय राजेंद्र शरणागत के रूप में हुई। शव मिलते ही आसपास के गांवों में सनसनी फैल गई, लेकिन महज पांच दिन के भीतर पुलिस ने इस गुत्थी को सुलझा दिया। जांच में सामने आया कि इस हत्या के पीछे कोई अजनबी नहीं बल्कि राजेंद्र के अपने ससुर का हाथ था।
जंगल में मिला शव, पहचान में जुटी पुलिस
कोपे गांव के आसपास रहने वाले लोगों ने सबसे पहले जंगल में पड़े अज्ञात शव को देखा और इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही वारासिवनी थाना पुलिस एफएसएल टीम और डॉग स्क्वाड के साथ मौके पर पहुंची। जरूरी कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हुआ कि युवक की मौत गला घोंटने से हुई थी। जांच के दौरान यह भी पता चला कि राजेंद्र शव मिलने से एक दिन पहले से ही लापता था, जिससे पुलिस को घटना का समय तय करने में मदद मिली।
सीसीटीवी फुटेज ने खोला ससुर का राज
हत्या की पुष्टि होते ही पुलिस ने राजेंद्र के परिजनों और गांव वालों से पूछताछ शुरू की। साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। फुटेज में राजेंद्र मौत से ठीक पहले दो लोगों के साथ नजर आया, इनमें एक उसका ससुर राजेश चौहान था और दूसरा एक अन्य व्यक्ति। इस सुराग के आधार पर पुलिस ने राजेश चौहान को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए अपने साथी का नाम प्रभुदयाल बिसेन बताया।
दारू-मुर्गे की पार्टी बनी हत्या का जाल
जांच में सामने आया कि राजेंद्र को शराब पीने के लिए रुपयों की जरूरत थी और उसने पहले अपनी मां से रुपये मांगे थे, लेकिन मां ने मना कर दिया। इसके बाद राजेश चौहान ने खुद फोन पर राजेंद्र की मां से बात कर उसे 1000 रुपये देने के लिए राजी किया। रुपये मिलते ही राजेश ने राजेंद्र को अपने पास बुलाया। ससुर, उसका साथी प्रभुदयाल बिसेन और राजेंद्र तीनों ने मिलकर दारू और मुर्गे की पार्टी की, राजेंद्र को इस बात की भनक तक नहीं थी कि यह पार्टी उसे बेखबर करने के लिए रची गई थी। पार्टी खत्म होने के बाद राजेश और प्रभुदयाल राजेंद्र को जंगल में ले गए और अपने साथ लाए गमछे से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी।
बरसों की मारपीट और न लौटाए गए एक लाख रुपये
पुलिस के मुताबिक राजेश चौहान की नाराजगी सिर्फ उस शाम की नहीं बल्कि बरसों पुरानी थी। राजेंद्र शराब का आदी था और अक्सर अपनी पत्नी यानी राजेश की बेटी के साथ मारपीट करता था। जब भी ऐसा होता, बेटी अपने पिता को फोन कर सारी बात बताती थी, और वक्त के साथ राजेश के मन में गुस्सा बढ़ता गया। शराब की लत ने राजेंद्र के परिवार की माली हालत भी बिगाड़ दी थी, उसने अपनी कृषि भूमि बेच दी थी और उससे मिले रुपये भी खर्च कर डाले थे। इसके अलावा राजेंद्र पर अपने ससुर के एक लाख रुपये भी उधार थे, जो कई बार मांगने पर भी उसने नहीं लौटाए। पुलिस का कहना है कि बेटी की पिटाई और न लौटाए गए रुपयों की इसी दोहरी वजह से राजेश चौहान ने हत्या की पूरी योजना बनाई। इसी योजना के तहत वह वारदात से पहले अपने दामाद के गांव भी गया था।
पुलिस ने क्या-क्या किया बरामद
पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल गमछे के साथ ही आरोपियों की दो बाइक और मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। राजेश चौहान और प्रभुदयाल बिसेन दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।



















