मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेजी से बढ़ रहा है। राज्य में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने गर्मी से तो राहत दी है, लेकिन इसके साथ ही कई इलाकों में जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। उदाहरण के तौर पर, उज्जैन में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश की वजह से शिप्रा नदी के जलस्तर में भारी वृद्धि देखी गई, जिसके चलते नदी के घाटों पर स्थित छोटे मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो गए थे। इसी स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने आज, 8 जुलाई 2026, बुधवार के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।
ऑरेंज अलर्ट वाले जिले और भारी बारिश की चेतावनी
भोपाल स्थित मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आज राज्य के मध्य और उत्तरी भागों में मानसून का प्रभाव सबसे अधिक रहने का अनुमान है। शिवपुरी, सागर, गुना, अशोकनगर, श्योपुरकलां और टीकमगढ़ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं 115.6 मिमी से लेकर 204.4 मिमी तक अति भारी वर्षा हो सकती है। साथ ही, तेज हवाएं भी चलने की संभावना है जो नुकसान का कारण बन सकती हैं।
येलो अलर्ट की सूची और जोखिम
राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के एक बड़े भूभाग के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस सूची में इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, बैतूल, रतलाम, उज्जैन, मंडला, हरदा, रीवा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, अलीराजपुर, देवास, शाजापुर, नीमच, सिंगरौली, सीधी, मऊगंज, शहडोल, सिवनी, उमरिया, डिंडौरी, सतना, अनूपपुर, भिंड, पन्ना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, राजगढ़, मैहर, झाबुआ, धार, आगर मालवा, मंदसौर, दतिया, मुरैना, पांढुर्णा, कटनी, नरसिंहपुर, दमोह, छतरपुर और निवाड़ी शामिल हैं। इन जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का खतरा है। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में 64.5 मिमी से 115.5 मिमी तक मध्यम से तीव्र वर्षा होने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का पूर्वानुमान है।
नागरिकों के लिए सुरक्षा सुझाव
मौसम विभाग ने आम लोगों के लिए विशेष हिदायतें दी हैं:
- गरज-चमक के समय घर के अंदर रहना ही सुरक्षित है। बाहर निकलने पर पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे न रुकें।
- बिजली गिरने के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के प्लग हटा दें।
- तूफान के समय खुले मैदान या खेतों में काम करने से बचें। निर्माण स्थलों और बिजली के तारों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- वाहन चलाते समय गति कम रखें और स्टीयरिंग पर नियंत्रण रखें।
- कंक्रीट की दीवार या फर्श का सहारा लेने से बचें।
पशुपालकों के लिए निर्देश
पशुओं की सुरक्षा हेतु ये उपाय अपनाने चाहिए:
- पशुओं को खुले मैदानों, जल स्रोतों या नदी के पास न छोड़ें।
- रात के समय पशुओं को सुरक्षित शेड में ही रखें।
- दोपहर की गर्मी में उन्हें खुले में चराई के लिए न ले जाएं।
- उनके लिए छाया और पर्याप्त पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
- तूफान के दौरान पेड़ों के नीचे पशुओं को न बांधें।











