महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए दिवंगत वरिष्ठ नेता अजितदादा अनंतराव पवार की जयंती को अब राज्य सरकार की उस आधिकारिक सूची में शामिल कर लिया है, जिसमें राष्ट्रपुरुषों और महान विभूतियों की जयंतियां सरकारी स्तर पर मनाई जाती हैं। इसका मतलब यह है कि अब उनकी जयंती भी राज्य द्वारा हर साल सम्मानित की जाने वाली अन्य महान हस्तियों की जयंतियों के बराबर आधिकारिक दर्जा पाएगी। यह नया प्रावधान वर्ष 2026 से लागू होगा। सामान्य प्रशासन विभाग यानी जीएडी ने बुधवार को इसे लेकर सरकारी परिपत्र जारी कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि इस फैसले से ठीक एक दिन पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री छगन भुजबल तथा हसन मुश्रीफ ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन में उन्होंने अजितदादा पवार की जयंती को सरकारी मान्यता देने की मांग रखी थी, जिसे मुख्यमंत्री ने तुरंत स्वीकार कर लिया।
पूरे राज्य में मनेगा जयंती समारोह
सरकार की तरफ से जारी परिपत्र के मुताबिक 22 जुलाई 2026 को अजितदादा पवार की जयंती पूरे महाराष्ट्र में धूमधाम से मनाई जाएगी। मंत्रालय समेत राज्य के सभी शासकीय और अर्धशासकीय दफ्तरों में इस दिन उनकी तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी जाएगी। इतना ही नहीं, राज्य के सभी स्कूलों और कॉलेजों में भी जयंती के मौके पर खास कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि युवा पीढ़ी उनके योगदान से परिचित हो सके। परिपत्र में यह भी साफ किया गया है कि यह आयोजन सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महाराष्ट्र के हर हिस्से में एक समान तरीके से मनाया जाएगा।
प्लेन हादसे में हुआ था निधन
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार का निधन इसी साल 28 जनवरी को एक प्लेन क्रैश में हो गया था। वे उस दिन चुनावी सभा में शामिल होने के लिए मुंबई से अपने गृह नगर बारामती जा रहे थे। बारामती एयरपोर्ट पर विमान की लैंडिंग के दौरान ही यह हादसा हो गया, जिसने पूरे राज्य के राजनीतिक हलकों को झकझोर दिया था। इस दुखद हादसे में अजित पवार समेत कुल 5 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद एएआईबी यानी विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की रिपोर्ट भी सामने आई थी, जिसमें हादसे के दौरान घटी घटनाओं के क्रम से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की गई थीं।
अफसरों को दिए गए सख्त निर्देश
राज्य सरकार ने अपने सभी संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जयंती से जुड़े कार्यक्रमों का समुचित आयोजन और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। परिपत्र में साफ तौर पर अजितदादा पवार की लोकसेवा और महाराष्ट्र के विकास में दिए गए योगदान का जिक्र किया गया है। प्रशासनिक दक्षता, आधारभूत संरचना यानी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं को आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने की उनकी कोशिशों के लिए उन्हें व्यापक स्तर पर सम्मान मिला था। परिपत्र में यह भी कहा गया है कि उपमुख्यमंत्री रहते हुए इन्हीं खूबियों की वजह से उन्हें राज्यभर में इतनी इज्जत हासिल हुई थी। सरकार के इस फैसले के बाद अब हर साल 22 जुलाई को अजितदादा पवार की जयंती महाराष्ट्र में सरकारी स्तर पर आधिकारिक रूप से मनाई जाएगी, जो उनकी वर्षों की लोकसेवा और राज्य के विकास में दिए योगदान को स्थायी सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।











