मणिपुर के छह प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के गठबंधन ने राज्यभर में बंद बुलाया है और लोगों से 15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के बहिष्कार की अपील की है, जिससे राष्ट्रीय पर्व से ठीक पहले राज्य में तनाव बढ़ गया है।
बंद कब से कब तक चलेगा
कोऑर्डिनेशन कमेटी, यानी कॉर्कॉम ने कहा है कि यह बंद 15 अगस्त को रात 1 बजे से शुरू होकर शाम 6:30 बजे तक चलेगा। इस दौरान मणिपुर में सार्वजनिक परिवहन और सामान्य कारोबारी गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है। मीडिया को जारी बयान में संगठन ने कहा कि मेडिकल इमरजेंसी, बिजली आपूर्ति, पानी की सप्लाई, फायर सर्विस, प्रेस और धार्मिक कार्यक्रमों को बंद के दायरे से बाहर रखा जाएगा, ताकि राज्य में बाकी गतिविधियां थमने के बावजूद ये जरूरी सेवाएं चलती रहें।
कॉर्कॉम में शामिल छह संगठन
कॉर्कॉम असल में छह अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों की एक छतरी संस्था है। इसमें कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी), कांगलेइ यावोल कन्ना लुप (केवाईकेएल), पीपल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेइपाक (प्रीपाक), उसका अलग हुआ धड़ा प्रीपाक-प्रोग्रेसिव, रिवोल्यूशनरी पीपल्स फ्रंट (आरपीएफ) और यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) शामिल हैं। ये सभी संगठन कॉर्कॉम के बैनर तले मिलकर इस तरह के बयान और बंद जैसे कार्यक्रमों का आह्वान करते हैं।
15 अगस्त का विरोध क्यों
कॉर्कॉम का कहना है कि 15 अगस्त का मणिपुर के लिए कोई ऐतिहासिक या राजनीतिक महत्व नहीं है। संगठन अपने बयान में मणिपुर को लगातार कांगलेइपाक नाम से संबोधित करता है। इसने राज्य के नेताओं पर केंद्र सरकार की तारीफ करने का आरोप भी लगाया और लोगों से 9 से 17 अगस्त तक चल रहे हर घर तिरंगा अभियान से दूर रहने की अपील की।
दशकों पुराना संप्रभुता का दावा
बयान में कॉर्कॉम ने अपना वही पुराना राजनीतिक रुख दोहराया है कि 15 अक्टूबर 1949 के विलय समझौते से पहले मणिपुर एशिया में एक स्वतंत्र और संप्रभु इकाई के तौर पर मौजूद था। गठबंधन ने 1949 के इस विलय को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का कथित उल्लंघन बताया है। इसने आगे यह भी दावा किया कि मणिपुर में चल रहे संघर्ष को आंतरिक कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष माना जाना चाहिए।
दूसरे देशों से तुलना कर संप्रभुता साबित करने की कोशिश
मणिपुर को एक व्यावहारिक संप्रभु राष्ट्र साबित करने के लिए कॉर्कॉम ने राज्य की आबादी और भौगोलिक क्षेत्रफल की तुलना दूसरे देशों से की। संगठन का दावा है कि संयुक्त राष्ट्र के कई मौजूदा सदस्य देशों की आबादी और क्षेत्रफल मणिपुर की ऐतिहासिक सीमाओं से भी कम है। 18 अक्टूबर 1948 को हुए मणिपुर नेशनल असेंबली के पहले सत्र के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कॉर्कॉम ने दावा किया कि उस समय मणिपुर का ऐतिहासिक क्षेत्रफल 15,650 वर्ग मील, यानी करीब 40,530 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ था।
कानूनी दलीलें और भविष्य को लेकर चेतावनी
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता और भौगोलिक सीमाओं में बदलाव करने की कोशिश कर रही है। अपने इस दावे के समर्थन में कॉर्कॉम ने अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांत उति पॉसिडेटिस जूरिस के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मिसालों का हवाला दिया, खासकर बुर्किना फासो और माली के बीच सीमा विवाद पर 1986 में आए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले का जिक्र किया। गठबंधन ने चेतावनी दी कि अगर आत्मनिर्णय के अपने तथाकथित अधिकार की मांग को आगे नहीं बढ़ाया गया, तो इलाके की मूल संस्कृतियां और आबादी धीरे-धीरे खत्म हो सकती हैं। उसने कहा कि इलाके के भविष्य को बचाने के लिए स्वतंत्रता का यह आंदोलन जरूरी है।




















