जिम जाने वाले बहुत से लोग यह शिकायत करते हैं कि घंटों मेहनत के बाद बाइसेप्स तो अच्छे बन गए, लेकिन कलाई के ऊपर का हिस्सा यानी फोरआर्म्स अब भी पतले दिखते हैं। यह असंतुलन देखने में अजीब लगता है और अधिकांश लोगों को समझ नहीं आता कि आखिर गलती कहां हो रही है। सच यह है कि फोरआर्म्स को बड़ा करना बाइसेप्स से काफी मुश्किल है, और इसके पीछे ठोस कारण हैं।
फोरआर्म्स बनाना इतना मुश्किल क्यों होता है?
फिटनेस विशेषज्ञों के मुताबिक फोरआर्म्स की मांसपेशियां पूरे दिन में सबसे ज्यादा सक्रिय रहती हैं। सामान उठाना, बैग पकड़ना, मोबाइल चलाना, कीबोर्ड पर टाइपिंग करना या दरवाजा खोलना, इन सभी रोजमर्रा के कामों में फोरआर्म्स की मांसपेशियां लगातार काम करती रहती हैं। इतने लंबे समय तक काम करने के कारण ये मांसपेशियां सामान्य भार की इतनी आदी हो जाती हैं कि उनका आकार बढ़ाने के लिए विशेष और केंद्रित ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती है।
एक और अहम वजह यह है कि फोरआर्म्स में कई छोटी-छोटी मांसपेशियों का समूह होता है। इन सभी को एक साथ ट्रेन करना आसान नहीं होता। यही कारण है कि केवल बाइसेप्स कर्ल करने से डोले तो बन जाते हैं, लेकिन फोरआर्म्स उसी रफ्तार से विकसित नहीं हो पाते।
सिर्फ बाइसेप्स एक्सरसाइज से काम नहीं चलेगा
ज्यादातर लोग जिम में बाइसेप्स कर्ल, हैमर कर्ल और पुल-अप्स पर ही ध्यान देते हैं। ये एक्सरसाइज बाजू के ऊपरी हिस्से को चौड़ा तो बनाती हैं, लेकिन फोरआर्म्स पर इनका असर बेहद सीमित होता है। अगर आप चाहते हैं कि कलाई के ऊपर का हिस्सा भी भरा हुआ और मजबूत दिखे, तो अपनी वर्कआउट रूटीन में फोरआर्म्स के लिए अलग से एक्सरसाइज जोड़नी होगी।
फोरआर्म्स बनाने के लिए जरूरी एक्सरसाइज
कलाई और फोरआर्म्स को मजबूत और मोटा बनाने के लिए इन पांच एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें:
- रिस्ट कर्ल: यह फोरआर्म्स की फ्लेक्सर मांसपेशियों को लक्षित करती है। हल्के डम्बल या बारबेल के साथ 12 से 15 रेप्स के 3 सेट करें।
- रिवर्स रिस्ट कर्ल: इससे फोरआर्म्स के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों पर काम होता है और पूरे फोरआर्म का संतुलित विकास होता है।
- फार्मर्स वॉक: दोनों हाथों में भारी डम्बल उठाकर कुछ दूरी तक चलने से पकड़ की ताकत के साथ-साथ फोरआर्म्स भी मजबूत होते हैं।
- डेड हैंग: बार पर लटकने से ग्रिप स्ट्रेंथ बेहतर होती है और फोरआर्म्स की मांसपेशियों पर गहरा दबाव पड़ता है।
- हैमर कर्ल: यह एक्सरसाइज केवल बाइसेप्स नहीं, बल्कि फोरआर्म्स के विकास में भी उतनी ही सहायक है।
ग्रिप स्ट्रेंथ को नजरअंदाज न करें
फोरआर्म्स की मोटाई बढ़ाने के लिए केवल वजन उठाना काफी नहीं है। पकड़ की ताकत यानी ग्रिप स्ट्रेंथ बेहतर करना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए ग्रिप ट्रेनर का इस्तेमाल, टेनिस बॉल को बार-बार दबाना और मोटे हैंडल वाले डम्बल से ट्रेनिंग करना बेहद फायदेमंद साबित होता है।
सही खानपान और पर्याप्त नींद भी उतनी जरूरी है
मांसपेशियों की ग्रोथ के लिए सिर्फ एक्सरसाइज नहीं, बल्कि पोषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शरीर के वजन के अनुपात में पर्याप्त प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और हेल्दी फैट्स का सेवन करना जरूरी है। साथ ही शरीर को रिकवरी के लिए पर्याप्त नींद भी दें, क्योंकि मांसपेशियां आराम के दौरान ही बढ़ती और ठीक होती हैं।
धैर्य रखें, 2 से 3 महीने में दिखेगा फर्क
फोरआर्म्स का आकार बढ़ाना एक धीमी प्रक्रिया है। कई बार 2 से 3 महीने की नियमित ट्रेनिंग के बाद ही कोई फर्क नजर आता है। इसलिए जल्दी नतीजों की उम्मीद छोड़कर सही तकनीक और लगातार अभ्यास पर ध्यान देना ज्यादा समझदारी है। अगर आपके बाइसेप्स तो अच्छे बन गए हैं लेकिन फोरआर्म्स अभी भी पतले हैं, तो सही एक्सरसाइज, संतुलित आहार और नियमित मेहनत से यह असंतुलन पूरी तरह दूर किया जा सकता है।













