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मुनीम रोशन गुर्जर ने रची मालिक की हत्या की साजिश, 70 लाख के लालच में सागर से हुआ गिरफ्तारराजस्थान
12 अग॰ 2026, 8:52 pm (1 दिन पहले)· 3

मुनीम रोशन गुर्जर ने रची मालिक की हत्या की साजिश, 70 लाख के लालच में सागर से हुआ गिरफ्तार

राजस्थान के भीलवाड़ा में साहूकार शोभालाल जैन की हत्या के मुख्य आरोपी मुनीम रोशन गुर्जर को पुलिस ने बुधवार सुबह मध्य प्रदेश के सागर जिले से गिरफ्तार किया, उसके साथी नारायण लाल सरगरा को पहले ही 1 अगस्त को पकड़ा जा चुका था।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बागोर थाना क्षेत्र में सनसनी फैलाने वाले साहूकार शोभालाल जैन हत्याकांड में पुलिस को बुधवार सुबह बड़ी कामयाबी हाथ लगी। महीनेभर से फरार चल रहे मुख्य आरोपी 36 वर्षीय रोशन गुर्जर को पुलिस ने मध्य प्रदेश के सागर जिले से दबोच लिया। इस वारदात में रोशन के साथी नारायण लाल सरगरा को पुलिस पहले ही 1 अगस्त को गिरफ्तार कर चुकी थी, अब मुख्य साजिशकर्ता भी सलाखों के पीछे पहुंच गया है।

ब्याज का कारोबार करने वाले सेठ की बेरहमी से हत्या

बागोर थाना प्रभारी बच्छराज चौधरी के मुताबिक, बावलास गांव के 78 वर्षीय साहूकार शोभालाल जैन इलाके में ब्याज पर पैसा देने का काम करते थे। कुछ दिनों से लापता चल रहे शोभालाल की 26 जुलाई को बेहद बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। हैरानी की बात यह रही कि इस हत्याकांड के पीछे कोई अनजान शख्स नहीं बल्कि उन्हीं का बरसों पुराना भरोसेमंद मुनीम रोशन गुर्जर निकला, जो उनके यहां मुनीम के साथ-साथ ड्राइवर का काम भी संभालता था। रोशन ने अपने दोस्त नारायण लाल के साथ मिलकर सेठ की करोड़ों की संपत्ति और उनके पास मौजूद 70 लाख रुपये हड़पने की नीयत से इस वारदात को अंजाम दिया।

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सांवलिया सेठ की यात्रा बनी हत्या की स्क्रिप्ट

पुलिस जांच में सामने आया कि 18 जुलाई को शोभालाल अपने मुनीम रोशन के साथ सांवलिया सेठ की धार्मिक यात्रा पर निकले थे। यात्रा से वापस लौटते वक्त कार में ही आरोपियों ने अपनी योजना पर अमल किया। नारायण ने शोभालाल के दोनों हाथ जकड़ लिए, जबकि रोशन ने उनका मुंह दबाकर दम घोंट दिया। सेठ की जान किसी भी सूरत में न बचे, इसके लिए आरोपियों ने उनके मुंह पर टेप भी चिपका दिया। हत्या को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपियों ने शव को सीमेंट के एक खंभे से बांधा और उसे एक सुनसान कुएं में फेंककर मौके से फरार हो गए।

10 लाख के लालच और शराब पार्टी में तैयार हुआ साथी

पुलिस के मुताबिक, रोशन को पहले से पता था कि साहूकार शोभालाल के पास 70 लाख रुपये नकद मौजूद हैं। इतनी बड़ी रकम अकेले हड़पना आसान नहीं था, इसलिए रोशन ने अपने पुराने दोस्त नारायण लाल सरगरा को शराब पार्टी देकर हत्या की साजिश में शामिल होने के लिए राजी किया। बदले में उसने नारायण को 10 लाख रुपये देने का लालच दिया। इसके बाद नारायण के दिमाग में हत्या की योजना लगातार घूमती रही, जब तक कि 18 जुलाई को दोनों को मौका नहीं मिल गया।

पानीपुरी बेचने वाला निकला हत्या में साथी

गिरफ्तार आरोपी नारायण लाल सरगरा अड़र्सीपुरा गांव का रहने वाला है और मध्य प्रदेश में पानीपुरी बेचने का धंधा करता है। वह मुनीम रोशन गुर्जर का पुराना दोस्त बताया जा रहा है। वारदात को अंजाम देकर शव कुएं में फेंकने के बाद नारायण भी अपने गांव से फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने 1 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया था। वहीं मुख्य साजिशकर्ता रोशन गुर्जर लंबे समय तक पुलिस को चकमा देता रहा, आखिरकार बुधवार सुबह पुलिस ने उसे मध्य प्रदेश के सागर जिले से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर वारदात की पूरी कड़ियां जोड़ने में जुटी है और शोभालाल की संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

सवाल-जवाब

शोभालाल जैन की हत्या किसने की?
उनके अपने मुनीम रोशन गुर्जर ने अपने दोस्त नारायण लाल सरगरा के साथ मिलकर हत्या की।
हत्या कब हुई थी?
26 जुलाई को शोभालाल जैन की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
मुख्य आरोपी रोशन गुर्जर को कब और कहां से गिरफ्तार किया गया?
बुधवार सुबह पुलिस ने उसे मध्य प्रदेश के सागर जिले से गिरफ्तार किया।
दूसरे आरोपी नारायण लाल को कब पकड़ा गया?
उसे 1 अगस्त को ही गिरफ्तार कर लिया गया था।
हत्या की वजह क्या थी?
आरोपी शोभालाल की करोड़ों की संपत्ति और उनके पास मौजूद 70 लाख रुपये हड़पना चाहते थे।
हत्या के बाद शव का क्या किया गया?
शव को सीमेंट के एक खंभे से बांधकर एक सुनसान कुएं में फेंक दिया गया था।
हत्या कैसे अंजाम दी गई?
सांवलिया सेठ की यात्रा से लौटते वक्त कार में ही आरोपियों ने शोभालाल का मुंह दबाकर और हाथ जकड़कर दम घोंट दिया, फिर मुंह पर टेप चिपका दी।
नारायण लाल सरगरा कौन है?
वह अड़र्सीपुरा गांव का रहने वाला है और मध्य प्रदेश में पानीपुरी बेचने का धंधा करता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 घंटे पहले

यह मामला व्यावसायिक और व्यक्तिगत रिश्तों में भरोसे की घोर आहत का एक गंभीर उदाहरण है, जहाँ लालच ने अपराध की हदें पार कर दीं। मुनीम द्वारा मालिक की संपत्ति और नकदी हड़पने के लिए रची गई इस सुनियोजित साजिश ने वित्तीय सुरक्षा और आंतरिक सतर्कता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में यह देखना अहम होगा कि पुलिस इस मामले में वित्तीय लेन-देन और संलिप्तता के अन्य पहलुओं को अदालत में कैसे साबित करती है, जिससे अपराधियों को सख्त सजा मिल सके।

Rohan Verma@rohan-verma·22 घंटे पहले

यह घटना वित्तीय अपराधों और अकेले काम करने वाले बुजुर्ग व्यापारियों के बीच भरोसे के संकट को उजागर करती है। 70 लाख रुपये नकद जैसे बड़े वित्तीय लेन-देन अक्सर अंदरूनी लोगों को लालच देते हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। ऐसे मामलों से बचने के लिए अनौपचारिक वित्तीय कारोबार में पारदर्शिता और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि व्यक्तिगत स्तर पर नकदी का जोखिम कम किया जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 घंटे पहले

यह मामला इस बात का एक गंभीर उदाहरण है कि कैसे विश्वास का फायदा उठाकर सुनियोजित अपराध को अंजाम दिया जाता है। इस घटना में जिस तरह से धार्मिक यात्रा को कवर के रूप में इस्तेमाल किया गया, वह अपराधियों की सोची-समझवीं मानसिकता को दर्शाता है। पुलिस जांच के दौरान बरामदगी और फोरेंसिक साक्ष्य यह तय करेंगे कि अदालत में इन आरोपियों को सजा मिल सके। ऐसे मामलों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस कितनी मजबूती से चार्जशीट दाखिल करती है ताकि कानूनी प्रक्रिया में कोई ढील न बचे।

Rohan Verma@rohan-verma·23 घंटे पहले

यह मामला व्यावसायिक और वित्तीय संबंधों में अत्यधिक भरोसे के जोखिम को उजागर करता है। जब पारिवारिक या पारंपरिक मुनीम व्यवस्था में भारी नकदी का लेन-देन व्यक्तिगत स्तर पर होता है, तब पारदर्शिता और आंतरिक नियंत्रण की कमी ऐसे अपराधों को बढ़ावा देती है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि अनौपचारिक वित्तीय कारोबार करने वाले कारोबारियों को अपने परिसरों और यात्राओं के दौरान सुरक्षा के कड़े उपायों के साथ-साथ डिजिटल बैंकिंग का उपयोग बढ़ाना चाहिए ताकि इस प्रकार के नकद आधारित लालच और जोखिमों से बचा जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 घंटे पहले

यह मामला अनौपचारिक वित्तीय लेन-देन में आंतरिक सुरक्षा ऑडिट की घोर लापरवाही को उजागर करता है। जब बड़े पैमाने पर नकदी बिना डिजिटल ट्रेल के संभाली जाती है, तो यह लोभ और सुनियोजित अपराध का आसान शिकार बन जाती है। आगे की कानूनी प्रक्रिया में पुलिस को इस बात के पुख्ता डिजिटल और भौतिक साक्ष्य जुटाने होंगे कि लूटी गई पत्तर लाख रुपये की नकदी कहाँ छुपाई गई है, ताकि इस सनसनीखेज मामले में अपराधियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।

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