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अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा टकराव, सोना फिसलकर 4,100 डॉलर के करीबबाज़ार
8 जुल॰ 2026, 5:36 am (45 दिन पहले)· 2

अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा टकराव, सोना फिसलकर 4,100 डॉलर के करीब

बुधवार को शुरुआती एशियाई कारोबार में सोने की कीमत गिरकर 4,100 डॉलर के आसपास आ गई, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से बढ़े तनाव और कमजोर अमेरिकी नौकरी के आंकड़ों ने बाजार का रुख बदल दिया।

बुधवार के शुरुआती एशियाई कारोबार में सोने की कीमत फिसलकर 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब पहुंच गई। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़का सैन्य तनाव रहा, जिसने दुनिया भर के निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। साथ ही, कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद कारोबारियों ने फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी को लेकर अपने दांव भी कम कर दिए हैं।

सोने पर दबाव क्यों बना

सोना आमतौर पर अनिश्चितता के दौर में चमकता है, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी उलझी हुई है। एक तरफ मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़नी चाहिए थी, वहीं दूसरी तरफ इसी तनाव ने ऊर्जा की कीमतों के जरिए महंगाई बढ़ने की आशंका को हवा दे दी है। यही आशंका बिना ब्याज वाली इस धातु की तेजी पर ब्रेक लगा रही है। नतीजा यह हुआ कि सोमवार की अच्छी-खासी गिरावट के बाद मंगलवार को भी सोना 4,100 डॉलर के आसपास कमजोर बना रहा।

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अमेरिकी सेना का ईरान पर हमला

मंगलवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने ईरान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का ऐलान किया। सेंटकॉम ने कहा, "अमेरिकी सेंट्रल कमांड की सेनाओं ने ईरान के खिलाफ ताबड़तोड़ शक्तिशाली हमलों का सिलसिला शुरू कर दिया है, ताकि एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में मासूम नागरिकों के चालक दल वाले व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने और उन पर हमला करने की भारी कीमत वसूली जा सके।"

अमेरिकी सेना ने आगे बताया कि ये हमले ईरान की उस कार्रवाई के जवाब में किए गए, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया था। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल गलियारों में से एक है, इसलिए यहां कोई भी टकराव सीधे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजारों को हिला देता है।

नाजुक शांति समझौते पर मंडराता खतरा

यह ताजा टकराव अमेरिका और ईरान के रिश्तों को एक बार फिर पटरी से उतार सकता है। पिछले महीने ही दोनों देशों ने एक अंतरिम शांति समझौते पर दस्तखत किए थे, जिससे हर मोर्चे पर चल रही लड़ाई थम गई थी और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल दिया गया था। अब नए हमलों ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच उस नाजुक शांति को खतरे में डाल दिया है। अगर यह तनाव और गहराता है, तो ऊर्जा की कीमतों में उछाल के जरिए महंगाई भड़क सकती है, जो बिना कोई रिटर्न देने वाली इस धातु के लिए भारी पड़ सकती है।

फेड को लेकर बदलता अनुमान

कमजोर अमेरिकी नौकरी के आंकड़ों (NFP) के बाद कारोबारियों ने फेड की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने के अपने अनुमान घटा दिए हैं। ब्याज दरों और सोने का रिश्ता बेहद गहरा है, क्योंकि सोना खुद कोई ब्याज नहीं देता। जब ब्याज दरें नीचे रहती हैं, तो सोना रखने की लागत घटती है और इसकी कीमत को सहारा मिलता है, जबकि ऊंची दरें अक्सर इस पीली धातु पर बोझ बन जाती हैं।

सोना सुरक्षित निवेश क्यों माना जाता है

सोने ने इंसानी इतिहास में हमेशा एक अहम भूमिका निभाई है। सदियों से इसे मूल्य के भंडार और लेन-देन के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। आज भी अपनी चमक और गहनों में इस्तेमाल के अलावा इसे एक सुरक्षित निवेश यानी "सेफ-हेवन" संपत्ति माना जाता है। इसका मतलब है कि उथल-पुथल भरे दौर में इसे एक भरोसेमंद निवेश समझा जाता है। इसके साथ ही सोने को महंगाई और गिरती मुद्राओं के खिलाफ एक ढाल भी माना जाता है, क्योंकि यह किसी खास जारीकर्ता या सरकार पर निर्भर नहीं करता।

सबसे बड़े खरीदार केंद्रीय बैंक

सोने के सबसे बड़े धारक दुनिया के केंद्रीय बैंक हैं। कठिन समय में अपनी मुद्रा को सहारा देने के लिए ये बैंक अपने भंडार में विविधता लाते हैं और सोना खरीदते हैं, ताकि अर्थव्यवस्था और मुद्रा की मजबूती का भरोसा बना रहे। ऊंचा सोने का भंडार किसी देश की साख का बड़ा आधार बनता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों ने 2022 में अपने भंडार में करीब 70 अरब डॉलर मूल्य का 1,136 टन सोना जोड़ा। रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से यह किसी एक साल में सबसे बड़ी खरीद है। चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक तेजी से अपना सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं।

डॉलर के साथ उल्टा रिश्ता

सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी के साथ उल्टा रिश्ता है, और ये दोनों ही बड़ी रिजर्व और सुरक्षित संपत्तियां मानी जाती हैं। जब डॉलर कमजोर पड़ता है, तो सोना आमतौर पर चढ़ता है, जिससे निवेशकों और केंद्रीय बैंकों को अनिश्चित दौर में अपनी संपत्तियों में विविधता लाने का मौका मिलता है। इतना ही नहीं, सोने का जोखिम भरी संपत्तियों के साथ भी उल्टा नाता है। जब शेयर बाजार में जोरदार तेजी आती है, तो सोना कमजोर पड़ता है, जबकि जोखिम वाले बाजारों में बिकवाली के दौरान यह धातु फायदे में रहती है।

कीमत को कौन से कारक हिलाते हैं

सोने की कीमत कई वजहों से ऊपर-नीचे होती है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या गहरी मंदी का डर अपनी सुरक्षित संपत्ति वाली छवि के चलते सोने की कीमत को तेजी से ऊपर ले जा सकता है। बिना ब्याज देने वाली संपत्ति होने के नाते सोना कम ब्याज दरों में चढ़ता है, जबकि पैसे की ऊंची लागत आमतौर पर इस पर दबाव बनाती है। फिर भी, ज्यादातर उतार-चढ़ाव इस बात पर टिके रहते हैं कि डॉलर कैसा बर्ताव करता है, क्योंकि यह धातु डॉलर में ही आंकी जाती है (XAU/USD)। मजबूत डॉलर सोने की कीमत को काबू में रखता है, जबकि कमजोर डॉलर इसे ऊपर धकेलने का काम करता है।

दूसरी मुद्राओं पर भी असर

मध्य-पूर्व की इस हलचल का असर सिर्फ सोने तक सीमित नहीं रहा। मंगलवार को GBP/USD कमजोर बना रहा और फिसलकर 1.3370 के इलाके की ओर लौट आया। 1.3400 के आसपास पहुंचने के तुरंत बाद पाउंड पर दबाव आया, क्योंकि भू-राजनीतिक मोर्चे पर नए तनाव को देखते हुए निवेशक ज्यादा सतर्क हो गए। इसी तरह एशिया में कारोबार शुरू होने से पहले EUR/USD भी कमजोर रहा और डॉलर की दोबारा बढ़ी मांग के चलते 1.1400 के निचले स्तर पर लौट आया। मध्य-पूर्व में बढ़ी बेचैनी ने सुरक्षित संपत्तियों को सहारा दिया और जोखिम वाले बाजारों के मूड पर बोझ डाला। आगे निवेशकों की नजरें बुधवार को आने वाले FOMC मिनट्स पर टिकी हैं।

दरों और मार्गदर्शन पर बाजार की निगाह

बुधवार को न्यूजीलैंड रिजर्व बैंक से व्यापक रूप से यह उम्मीद है कि वह आधिकारिक नकद दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 2.25% से 2.50% कर देगा और लगातार तीन बैठकों से चल रहे ठहराव को तोड़ देगा। दूसरी तरफ, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अब बाजारों को आगे का रास्ता बताने से कतरा रहे हैं। फेडरल रिजर्व से लेकर यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड तक, नीति-निर्माता "फॉरवर्ड गाइडेंस" से पीछे हट रहे हैं। सालों तक बाजारों को यह बताते रहने के बाद कि आगे क्या हो सकता है, अब कारोबारियों के सामने यह हकीकत है कि उन्हें बहुत कम जानकारी दी जाएगी।

सवाल-जवाब

सोने की कीमत क्यों गिरी?
अमेरिका और ईरान के बीच नए सैन्य तनाव और कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने बाजार का रुख बदला, जिससे सोना 4,100 डॉलर के करीब फिसल गया।
अमेरिका ने ईरान पर हमला क्यों किया?
सेंटकॉम के मुताबिक, ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में किए गए।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कब हुआ था?
पिछले महीने दोनों देशों ने एक अंतरिम शांति समझौते पर दस्तखत किए थे, जिससे हर मोर्चे पर लड़ाई थमी और होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुला।
केंद्रीय बैंकों ने 2022 में कितना सोना खरीदा?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों ने 2022 में करीब 70 अरब डॉलर मूल्य का 1,136 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा, जो रिकॉर्ड शुरू होने के बाद सबसे बड़ी सालाना खरीद है।
सोने का डॉलर के साथ क्या रिश्ता है?
सोने का अमेरिकी डॉलर के साथ उल्टा रिश्ता है, यानी डॉलर कमजोर होने पर सोना आमतौर पर चढ़ता है और डॉलर मजबूत होने पर काबू में रहता है।
न्यूजीलैंड रिजर्व बैंक से क्या उम्मीद है?
बुधवार को न्यूजीलैंड रिजर्व बैंक से 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे दर 2.25% से बढ़कर 2.50% हो जाएगी।
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