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होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले और अमेरिका की जवाबी सैन्य कार्रवाई से बाजार में हलचलबाज़ार
2 घंटे पहले· 2

होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले और अमेरिका की जवाबी सैन्य कार्रवाई से बाजार में हलचल

होरमुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। जहां तेहरान ने इसे जहाजों की अपनी गलती बताया, वहीं वॉशिंगटन ने सैन्य हमले के साथ ही ईरानी कच्चे तेल पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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ईरान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि वह वर्साय में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत होरमुज जलडमरूमध्य में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उसी जलमार्ग में एक कतरी लिक्विफाइड नेचुरल गैस कैरियर और एक सऊदी टैंकर पर मिसाइलें दागी गईं। ईरान का दावा है कि वह इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा कर रहा है, लेकिन जिन जहाजों ने ईरान के साथ मार्ग साझा नहीं किए या जिन्होंने अपने ट्रांसपोंडर बंद रखे, उन्हें मंत्रालय ने अपनी खुद की मुसीबत का जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही, मंत्रालय के प्रवक्ता ने कतर द्वारा लगाए गए आरोपों पर हैरानी जताते हुए इसे पड़ोसी धर्म के विरुद्ध बताया। सर्वोच्च नेता के सलाहकार रज़ाई ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका जानबूझकर इन वार्ताओं को विफलता की ओर ले जाएगा।

वॉशिंगटन का सैन्य और आर्थिक प्रहार

वॉशिंगटन ने राजनयिक मंचों के बजाय सीधे सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना। सेंट्रल कमांड ने तीन व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाए जाने का बदला लेने के लिए ईरान पर तीव्र हवाई हमले शुरू करने की घोषणा की। अमेरिका ने तेहरान की इस शत्रुता को बिना किसी आधार के, बेहद खतरनाक और संघर्ष विराम का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है। हमले से कुछ घंटे पहले ही अमेरिका ने ईरान को कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति देने वाले लाइसेंस को भी रद्द कर दिया था, जिससे अब ईरान पर दबाव आर्थिक और सैन्य, दोनों मोर्चों पर एक साथ बढ़ गया है।

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बाजार की प्रतिक्रिया और तेल की कीमतें

बाजार इस पूरे घटनाक्रम को बारीकी से समझ रहे हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 74.00 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, और लाइसेंस रद्द होने की खबर के बाद यह 76.00 डॉलर की ओर बढ़ने लगा। हालांकि, कीमतें अभी भी फरवरी के बाद के निचले स्तरों के आसपास ही हैं, क्योंकि ओपेक प्लस (OPEC+) की तरफ से तेल की आपूर्ति बहाल हो रही है और सऊदी अरब की छूट भी बढ़ रही है। फिलहाल बाजार में केवल एक 'इंसीडेंट प्रीमियम' यानी घटनाओं के कारण जोखिम का असर दिख रहा है, न कि पूरी तरह से समुद्री मार्ग बंद होने की आशंका का प्रीमियम। यही बारीक अंतर पूरे व्यापार की दिशा तय कर रहा है।

बदलता वैश्विक आर्थिक परिदृश्य

विभिन्न मुद्राओं और धातुओं के बाजार में भी इस तनाव का असर स्पष्ट है। जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) जोड़ी मंगलवार को 1.3370 के स्तर की ओर फिसल गई, जबकि इससे पहले इसने 1.3400 के स्तर का परीक्षण किया था। निवेशकों के बीच सावधानी बढ़ी है, जिसका मुख्य कारण भू-राजनीतिक मोर्चे पर पैदा हुई अस्थिरता है। इसी तरह, ईयूआर/यूएसडी (EUR/USD) जोड़ी 1.1400 के निचले स्तरों पर लौट आई, क्योंकि अमेरिकी डॉलर की मांग में फिर से तेजी आई है। मध्य पूर्व में तनाव सुरक्षित निवेश के विकल्पों को बढ़ावा दे रहा है और जोखिम वाले परिसंपत्ति वर्ग पर दबाव डाल रहा है। बाजार की नजर अब बुधवार को आने वाले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के मिनटों पर टिकी है।

सोने और केंद्रीय बैंकों की रणनीति

सोना मंगलवार को 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब कारोबार कर रहा है। हालिया भू-राजनीतिक हलचल ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से हवा दी है, जो सोने की कीमतों में सुधार की संभावनाओं को सीमित कर रही है। वहीं, केंद्रीय बैंक—चाहे फेडरल रिजर्व हो, यूरोपियन सेंट्रल बैंक या बैंक ऑफ इंग्लैंड—अब अपनी भविष्य की नीतियों के बारे में कम जानकारी साझा करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। नीति निर्माता अब फॉरवर्ड गाइडेंस यानी भविष्य के अनुमान देने के प्रति पीछे हटते नजर आ रहे हैं, जिससे व्यापारियों के लिए अनिश्चितता का स्तर बढ़ गया है।

इसका आप पर असर

भारत में: कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है, जो सीधे तौर पर परिवहन और महंगाई को प्रभावित कर सकती है।

व्यापारियों के लिए: वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण जोखिम बढ़ने से सुरक्षित निवेश (जैसे सोना और अमेरिकी डॉलर) के प्रति रुझान देखा जा सकता है, जबकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रह सकता है।

सवाल-जवाब

होरमुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव का कारण क्या है?
तनाव तब शुरू हुआ जब ईरान के कब्जे वाले जलमार्ग में एक कतरी गैस कैरियर और एक सऊदी टैंकर पर मिसाइलें दागी गईं, जिसके बाद अमेरिका ने सैन्य जवाबी कार्रवाई की।
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं?
अमेरिका ने व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के जवाब में ईरान पर तीव्र सैन्य हमले किए हैं और साथ ही उनके कच्चे तेल की बिक्री के लाइसेंस को रद्द कर दिया है।
तेल की कीमतों पर इसका क्या असर हुआ है?
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 74.00 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं।
क्या ओपेक प्लस की भूमिका महत्वपूर्ण है?
हां, ओपेक प्लस की ओर से तेल की आपूर्ति बहाल होने और सऊदी अरब की ओर से छूट मिलने के कारण कीमतों में भारी उछाल को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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