अमेरिकी डॉलर और चीनी युआन की जोड़ी के लिए वर्तमान बाजार स्थिति स्थिर बनी हुई है। यूओबी के क्वेक सेर लियांग ने बाजार की गतिविधियों का विश्लेषण करते हुए बताया है कि यह मुद्रा जोड़ी एक निर्धारित दायरे के भीतर ही काम कर रही है। हालांकि डॉलर ने 6.8000 के स्तर की ओर बढ़ने का प्रयास किया है, लेकिन इसमें तेजी का रुझान काफी सीमित है। अगले एक से तीन हफ्तों की अवधि के लिए, USD/CNH के 6.7750 से 6.8080 के बीच सीमित रहने का अनुमान लगाया गया है। इस दायरे में 6.7900 और 6.7850 पर निकटतम समर्थन स्तर देखे जा सकते हैं, जबकि 6.8080 के स्तर को एक बड़ी बाधा या प्रतिरोध माना जा रहा है।
24 घंटे का नजरिया
बाजार के अल्पकालिक रुख पर बात करते हुए विशेषज्ञ ने स्वीकार किया कि पिछला अनुमान पूरी तरह सटीक नहीं रहा। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि डॉलर 6.7800 से 6.7930 के दायरे में रहेगा, लेकिन डॉलर ने 6.7998 के उच्च स्तर को छू लिया। इस बढ़त के बावजूद, ऊपर की ओर जाने वाली गति में कोई विशेष मजबूती नहीं देखी गई है। यह संभव है कि डॉलर 6.8000 के आंकड़े को पार कर जाए, लेकिन फिलहाल 6.8080 के मजबूत प्रतिरोध स्तर को चुनौती मिलने की कोई बड़ी संभावना नहीं है। डॉलर के लिए 6.7900 और 6.7850 के स्तर पर समर्थन बने रहने की उम्मीद है।
साप्ताहिक और मध्यम अवधि का परिदृश्य
एक से तीन सप्ताह की समय सीमा पर गौर करें तो 1 जुलाई को जब स्पॉट रेट 6.7920 था, तब यह संकेत दिया गया था कि डॉलर की हालिया मजबूती खत्म हो चुकी है। उस समय बाजार को बताया गया था कि डॉलर के 6.7750 से 6.8080 के बीच कारोबार करने की संभावना है। 6 जुलाई को जब स्पॉट रेट 6.7855 था, तब इस विश्लेषण को फिर से दोहराया गया। हालांकि डॉलर तब से थोड़ा नीचे आया है, लेकिन नीचे की ओर जाने वाली गति में कोई स्पष्ट वृद्धि नहीं हुई है। कुल मिलाकर, पिछले अनुमानों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
वैश्विक बाजारों में अन्य हलचल
व्यापक आर्थिक परिदृश्य में भी उथल-पुथल देखी जा रही है। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) मंगलवार को 1.3370 के स्तर की ओर फिसलते हुए दबाव में रहा। 1.3400 के करीब परीक्षण के बाद पाउंड कमजोर हुआ है, क्योंकि भू-राजनीतिक मोर्चे पर नई चिंताओं के कारण निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
यूरो (EUR/USD) की स्थिति भी कुछ वैसी ही है, जो एशियाई बाजारों में कारोबार खुलने से पहले 1.1400 के निचले स्तरों पर लौट आया है। अमेरिकी डॉलर की मांग में फिर से हुई वृद्धि इसका मुख्य कारण है। मध्य पूर्व में व्याप्त तनाव ने सुरक्षित निवेश के विकल्पों के प्रति आकर्षण बढ़ा दिया है, जिससे जोखिम वाली संपत्तियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। बाजार की नजरें अब बुधवार को आने वाले एफओएमसी (FOMC) मिनट्स पर टिकी हैं।
सोना (Gold) सोमवार की गिरावट के बाद मंगलवार को 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। भू-राजनीतिक कारणों से पैदा हुई अस्थिरता ने महंगाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं, जो कीमती धातुओं में किसी भी बड़ी रिकवरी को सीमित कर रही हैं।
केंद्रीय बैंकों का रुख
विभिन्न केंद्रीय बैंकों ने लंबे समय तक बाजार को भविष्य के कदमों के बारे में संकेत दिए हैं, लेकिन अब व्यापारी इस वास्तविकता का सामना कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक कम जानकारी साझा कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व से लेकर यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड तक, नीति निर्माता अब फॉरवर्ड गाइडेंस यानी भविष्य के अनुमानों देने से बच रहे हैं।











