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अमेरिकी डॉलर की वापसी से भारतीय रुपये की शुरुआती बढ़त खत्मबाज़ार
10 जुल॰ 2026, 5:15 pm (45 दिन पहले)· 3

अमेरिकी डॉलर की वापसी से भारतीय रुपये की शुरुआती बढ़त खत्म

शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर में उछाल और मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते भारतीय रुपया अपनी शुरुआती बढ़त गंवा बैठा। बाजार में निवेशकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया और कच्चे तेल की कीमतों के असर पर नजर बनी हुई है।

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तकनीकी विश्लेषण10 जुलाई 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

USD/INR अभी 95.32 पर है, जबकि EMA20 95.22, EMA50 94.95 और EMA200 92.11 पर हैं।

आगे संभावित चाल

EMA20 (95.22) तक गिरावट पर खरीदार बचाव करते हैं।

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

USD/INR का RSI 52 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

शुक्रवार को भारतीय कारोबारी सत्र के दौरान भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी शुरुआती मजबूती को बरकरार नहीं रख सका। दोपहर के समय, USD/INR मुद्रा जोड़ी में तेजी देखी गई और यह 95.42 के स्तर के करीब पहुंच गई। यह उछाल मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर की रिकवरी के कारण आया है, जो मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के फिर से शुरू होने और इसके लंबा खिंचने की आशंकाओं के कारण सुरक्षित निवेश के तौर पर वापस लौट आया है।

डॉलर सूचकांक और भू-राजनीतिक हालात

लिखे जाने के समय तक, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की चाल को मापता है, तीन सप्ताह के निचले स्तर 100.60 से उबरते हुए 100.86 के आसपास कारोबार कर रहा था। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष तब और बढ़ गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि तेहरान के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) अब खत्म हो चुका है। हालांकि, पहले युद्ध कम होने की उम्मीद थी, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने बाजार में फिर से डॉलर की मांग बढ़ा दी है।

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कच्चे तेल की कीमतें और अर्थव्यवस्था

तेल की कीमतों में शुक्रवार को सुधार का सिलसिला जारी रहा, भले ही अमेरिका-ईरान के बीच लंबे समय तक टकराव का डर बना हुआ है। यूरोपीय व्यापार में, 20 जुलाई को समाप्त होने वाला WTI क्रूड ऑयल अनुबंध गुरुवार के नुकसान के बाद 6,845 रुपये के आसपास स्थिर रहा। भारत जैसी अर्थव्यवस्थाएं, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में तेल आयात पर निर्भर हैं, तेल की ऊंची कीमतों के दौर में मुद्रा के प्रदर्शन में कमजोरी का सामना करती हैं।

निवेशकों का रुख और तकनीकी रुझान

आगे बढ़ते हुए, भारतीय इक्विटी बाजार के प्रति विदेशी निवेशकों का रुख मिला-जुला रहने की संभावना है। वित्तीय वर्ष (FY) 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे आने शुरू हो चुके हैं, जिसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने गुरुवार को अपने आंकड़े जारी किए हैं। बाजार की तकनीकी स्थिति पर नजर डालें तो Relative Strength Index (RSI) लंबे समय से 40.00 से 60.00 के दायरे में बना हुआ है, जो भविष्य में सुस्त रुझान का संकेत देता है।

समर्थन और प्रतिरोध स्तर

मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, नीचे की ओर 20-दिवसीय EMA के पास 95.11 पर तत्काल समर्थन देखा जा रहा है। इसके बाद 94.69 का स्तर और फिर 7 मई का निचला स्तर 94.03 महत्वपूर्ण है। ऊपरी ओर, मुख्य प्रतिरोध 97.02 के पास बना हुआ है। इस क्षेत्र के ऊपर एक मजबूत और निरंतर बढ़त ही बाजार में तेजी का नया द्वार खोल सकती है। वर्तमान में, बाजार में अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं और वैश्विक घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

सवाल-जवाब

भारतीय रुपया आज क्यों गिरा?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और डॉलर की रिकवरी के चलते भारतीय रुपया अपनी शुरुआती बढ़त गंवा बैठा।
कच्चे तेल का रुपये पर क्या असर है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतें अक्सर रुपये को कमजोर करती हैं।
बाजार के लिए अगला बड़ा संकेत क्या है?
वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे और विदेशी निवेशकों का रुख बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
रुपये के लिए महत्वपूर्ण स्तर क्या हैं?
रुपये के लिए नीचे की ओर 95.11 का समर्थन और ऊपर की ओर 97.02 का प्रतिरोध स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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