शुक्रवार को सोने (Gold) ने गुरुवार को हासिल की गई कुछ बढ़त को वापस खो दिया है और कीमतें 4,116 डॉलर प्रति औंस के दायरे में सिमटी हुई हैं। वर्तमान में सोने की यह कीमत पिछले बंद भाव 4,131 डॉलर से 0.35 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। हाल के दिनों में कीमती धातुओं के लिए माहौल चुनौतीपूर्ण रहा है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की नई उम्मीदों को हवा दी है।
तकनीकी संकेतकों के अनुसार, सोने की चाल अभी भी एक बड़े मंदी के रुझान (bearish trend) के दायरे में है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में 52-सप्ताह का दायरा 3,264 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। मौजूदा ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिन के औसत से 12.93 गुना अधिक है, जो निवेशकों की सक्रियता को दर्शाता है।
तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख स्तर
सोने के लिए तकनीकी स्तरों की बात करें तो RSI(14) वर्तमान में 43 पर है, जो न तो अत्यधिक खरीद और न ही अत्यधिक बिक्री के संकेत दे रहा है। MACD का मान -77.82 है, जबकि सिग्नल लाइन -96.20 पर है, जिसका हिस्टोग्राम 18.38 पर एक तेजी के संकेत (bullish divergence) की ओर इशारा करता है। वहीं, औसत की बात करें तो EMA20 4,162 डॉलर, EMA50 4,328 डॉलर और EMA200 4,275 डॉलर पर है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि सोना लंबी अवधि के मंदी के दौर में है, हालांकि इसमें एक गोल्डन क्रॉस देखा गया है।
बोलिंगर बैंड (20,2) के आधार पर सोने की रेंज 3,933 डॉलर से 4,347 डॉलर के बीच है, जिसमें मध्य स्तर 4,140 डॉलर पर है। वर्तमान में कीमत इन बैंड्स के भीतर ही बनी हुई है। एडीएक्स (ADX) 35 पर है जो एक ट्रेंड की मौजूदगी की पुष्टि करता है। तत्काल प्रतिरोध और समर्थन स्तरों को देखें तो पिवट स्तर 4,121 डॉलर है। ऊपरी स्तरों पर 4,140 डॉलर (R1) और 4,163 डॉलर (R2) महत्वपूर्ण हैं, जबकि निचले स्तरों पर 4,098 डॉलर (S1) और 4,080 डॉलर (S2) प्रमुख समर्थन बिंदु हैं।
बाजार का मिजाज और वैश्विक प्रभाव
बाजार फिलहाल एक तनावपूर्ण शांति की स्थिति से गुजर रहा है। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत की खबरें बाजार पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं, जहां मध्यस्थ परमाणु समझौते को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे हैं। सोने का इतिहास में हमेशा से एक सुरक्षित निवेश के रूप में महत्व रहा है। यह न केवल आभूषणों के रूप में चमक बिखेरता है, बल्कि मुद्रास्फीति और गिरती हुई मुद्राओं के खिलाफ एक मजबूत कवच (hedge) भी माना जाता है।
केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, केवल वर्ष 2022 में ही केंद्रीय बैंकों ने करीब 1,136 टन सोना खरीदा था, जिसका कुल मूल्य 70 बिलियन डॉलर था। चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते देशों के केंद्रीय बैंक अपनी अर्थव्यवस्था और मुद्रा में विश्वास जगाने के लिए लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं।
निवेशक सावधानियां
सोने की कीमत का सीधा संबंध अमेरिकी डॉलर के साथ विपरीत होता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोना अक्सर ऊपर चढ़ता है, जिससे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने का मौका मिलता है। इसके विपरीत, जोखिम वाली संपत्तियों और स्टॉक मार्केट में तेजी सोने की कीमतों पर दबाव डालती है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या आर्थिक मंदी का डर सोने की कीमत को तुरंत ऊपर खींचने की क्षमता रखता है। चूंकि सोना डॉलर में आंका जाता है, इसलिए डॉलर की मजबूती सीधे सोने की कीमतों को नियंत्रित रखने का काम करती है।
बाजार में आने वाली अन्य खबरें जैसे कनाडा का लेबर फोर्स सर्वे और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति रिपोर्ट भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि निवेश से जुड़े सभी फैसले जोखिम भरे होते हैं और इसमें पूरी पूंजी गंवाने तक की संभावना बनी रहती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी निवेश से पहले स्वयं का गहन शोध करें।











