मुद्रा बाजार में एक बार फिर अमेरिकी डॉलर का दबदबा देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर अन्य प्रमुख करेंसियों पर पड़ा है। अमेरिका के ताजा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई में अपेक्षा से अधिक तेजी दर्ज किए जाने के बाद यूएसडी/सीएडी में 0.50% की बढ़त दर्ज की गई। मुद्रास्फीति के इन गर्म आंकड़ों ने निवेशकों के बीच यह धारणा मजबूत कर दी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व आने वाले समय में सख्त मौद्रिक नीति जारी रख सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों ने ग्रीनबैक यानी डॉलर को तगड़ा समर्थन दिया है, जबकि दूसरी ओर बैंक ऑफ कनाडा और फेड के नीतिगत दृष्टिकोण में बढ़ता फासला कैनेडियन करेंसी 'लूनी' के लिए भारी दबाव पैदा कर रहा है।
सितंबर मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने तोड़े अनुमान
सितंबर महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े अर्थशास्त्रियों के पूर्वानुमानों से कहीं अधिक मजबूत साबित हुए हैं। सितंबर में मासिक सीपीआई में 0.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रही लेकिन अगस्त के 0.4% के उछाल से काफी अधिक है। वार्षिक आधार पर देखें तो हेडलाइन मुद्रास्फीति 3.4% से छलांग लगाकर 3.7% पर पहुंच गई, जिसने विश्लेषकों के 3.6% के पूर्वानुमान को भी पीछे छोड़ दिया।
खाद्य और ऊर्जा जैसी अस्थिर श्रेणियों को अलग रखकर आंके जाने वाले कोर सीपीआई में भी लगातार दबाव देखा जा रहा है। सितंबर में कोर सीपीआई मासिक आधार पर 0.3% बढ़ा, जो अनुमानित 0.2% से ज्यादा है और अगस्त के आंकड़े के बराबर बना हुआ है। वार्षिक कोर दर भी 2.4% से बढ़कर 2.6% हो गई, जिसने 2.5% के पूर्वानुमान को पार कर लिया। इन लगातार मजबूत बने हुए आंकड़ों से यह स्पष्ट हो गया है कि महंगाई को नियंत्रित करने की लड़ाई अभी पूरी नहीं हुई है।
फेडरल रिजर्व की चिंताओं में तेल कीमतों का इजाफा
महंगाई की इस नई रिपोर्ट ने फेडरल रिजर्व को यह भरोसा दिलाने में नाकाम रहने का संकेत दिया है कि मुद्रास्फीति उसके 2% के लक्ष्य की ओर स्थिर गति से वापस लौट रही है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के जोखिम को लगातार ऊपर की ओर बनाए हुए हैं। ऊर्जा लागत में उछाल सीधे तौर पर विनिर्माण, परिवहन और उपभोक्ता खर्च को प्रभावित कर रहा है।
सीएमई फेडवॉच टूल के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, ट्रेडर्स अब फेड की 27-28 अक्टूबर की आगामी बैठक में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना लगभग 50% मान रहे हैं, जो इस रिपोर्ट के आने से पहले मात्र 22% थी। इसके अतिरिक्त, दिसंबर की बैठक में दर वृद्धि की संभावना बढ़कर 95% तक पहुंच गई है। बाजार सहभागियों की नजरें अब गुरुवार को जारी होने वाले अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी पीपीआई और खुदरा बिक्री के आंकड़ों पर टिकी हैं, जो नीति निर्माताओं की अगली चाल का और स्पष्ट संकेत देंगे।
नीति निर्माताओं की हालिया टिप्पणियों से भी यह साफ झलकता है कि वे महंगाई की स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं। बोस्टन फेड अध्यक्ष सुसान कॉलिंस ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण उन्हें मुद्रास्फीति के 2% से ऊपर बने रहने की उम्मीद है। कॉलिंस ने यह भी रेखांकित किया कि नए साल में मौद्रिक नीति का भविष्य पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
कैनेडियन डॉलर और प्रमुख मुद्राओं की स्थिति
पिछले 30 दिनों में प्रमुख वैश्विक करेंसियों के मुकाबले कैनेडियन डॉलर के प्रदर्शन पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि अमेरिकी डॉलर के सामने सीएडी सबसे कमजोर स्थिति में रहा है। जहां फेडरल रिजर्व की ओर से नीतिगत दरों में आगे और बढ़ोतरी की प्रबल आशंका जताई जा रही है, वहीं बैंक ऑफ कनाडा की मौद्रिक दिशा को लेकर निवेशकों के बीच अलग राय बन रही है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच ब्याज दर अंतर का फायदा अमेरिकी डॉलर को मिल रहा है।
वैश्विक मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में भी मिश्रित हलचल देखने को मिली। बुधवार के एशियाई सत्र में एयूडी/यूएसडी 0.7000 के स्तर के करीब स्थिर बना रहा। चीन में सितंबर के मिले-जुले मुद्रास्फीति आंकड़ों और व्यापार आंकड़ों के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कुछ समर्थन मिला। चीन में सीपीआई उम्मीद से कम बढ़ा, जबकि पीपीआई में तेजी आई और व्यापार अधिशेष में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद व्यापक स्तर पर कमजोर डॉलर के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा मिला क्योंकि सभी की निगाहें अमेरिकी सीपीआई पर थीं।
इसी तरह यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में 158.50 के स्तर के पास एक सीमित दायरे में घूमता रहा। जापानी येन को सरकार द्वारा संभावित हस्तक्षेप के जोखिम से समर्थन मिला, जिसने कमजोर डॉलर के बीच भी बढ़त को सीमित रखा। हालांकि, सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर को भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से लगातार मजबूती मिल रही है।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी पर भी पड़ा असर
अमेरिकी मुद्रास्फीति के मजबूत आंकड़ों और फेड द्वारा मौद्रिक सख्ती जारी रखने के बढ़ते दांव का सीधा नुकसान सोने की कीमतों को उठाना पड़ा। बुधवार को कीमती धातु में साप्ताहिक मंदी का रुख गहरा गया और यह प्रति ट्रॉय औंस 4,100 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई। मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी बुलियन की कीमतों पर लगातार दबाव डाल रही है।
दूसरी ओर, डिजिटल एसेट बाजार में एक्सआरपी 1.36 डॉलर के ऊपर कारोबार करता नजर आया, जहां खरीदार 1.40 डॉलर के अहम आपूर्ति क्षेत्र की ओर रुख करने के लिए गति जुटा रहे हैं। इसके साथ ही रिपल और मेरिट्ज सिक्योरिटीज ने दक्षिण कोरिया के पूंजी बाजारों के लिए संस्थागत कस्टडी और टोकनाइजेशन सेवाओं की संभावनाओं को तलाशने के लिए साझेदारी की घोषणा की है, जिससे इस टोकन को जमीनी स्तर पर समर्थन मिल रहा है।


















