नई दिल्ली में कूटनीतिक गतिविधियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को गति देने के उद्देश्य से यह उच्चस्तरीय चर्चा आयोजित हुई। बैठक में व्यापार, आधुनिक तकनीक, सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, उच्च शिक्षा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संपर्क को नए सिरे से मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
इस मुलाकात के दौरान आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने वाणिज्यिक आदान-प्रदान में तेजी लाने और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने वाली तकनीकी पहलों को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने पर भी गहन विमर्श हुआ। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग और छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रमों के जरिए जन-जन के रिश्तों को सुगम बनाने की आवश्यकता रेखांकित की गई।
प्रधानमंत्री का सकारात्मक रुख
कनाडा की विदेश मंत्री के साथ हुई इस बैठक को बेहद सार्थक बताते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत एक रचनात्मक और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साझा प्राथमिकताओं के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाया जा सकता है, जिससे दोनों देशों के उद्योगों, शोधकर्ताओं और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
हालिया कूटनीतिक प्रगति और व्यापार समझौते की समयसीमा
विदेश मंत्री अनीता आनंद का यह दौरा दोनों देशों के बीच लगातार हो रहे कूटनीतिक संवाद की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ भी उनकी कई दौर की सकारात्मक बातचीत हुई थी, जिसमें म्यूनिख से लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्रों के दौरान रिश्तों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी। व्यापारिक मोर्चे पर दोनों पक्ष दिसंबर के अंत तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं, जिससे द्विपक्षीय निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस उच्चस्तरीय बैठक के सामने आने के बाद आम नागरिकों और विश्लेषकों की तरफ से मिली-जुली राय देखने को मिली। कई लोगों ने दोनों देशों के बीच सहयोग, व्यापार और छात्रों की सहूलियत के लिए इसे एक जरूरी कदम बताया, जबकि कुछ अन्य नागरिकों ने पुराने नीतिगत मामलों और द्विपक्षीय प्राथमिकताओं को लेकर सवाल भी खड़े किए।























