घरेलू शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की तेज बिकवाली के बावजूद खुदरा निवेशकों का भरोसा डगमगाया नहीं है। सितंबर महीने में इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध निवेश 31 प्रतिशत के जबर्दस्त उछाल के साथ 38,306 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। अगस्त के महीने में यह आंकड़ा 29,329 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। बाजार में आई गिरावट को निवेशकों ने भुनाने की रणनीति अपनाई और मझोली तथा छोटी कंपनियों के शेयरों से जुड़ी योजनाओं में जोरदार पूंजी डाली।
हर महीने के एसआईपी निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की ओर से सोमवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के प्रति खुदरा निवेशकों की दिलचस्पी लगातार मजबूत हो रही है। सितंबर के दौरान एसआईपी के जरिए होने वाला मासिक निवेश बढ़कर 32,490 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इससे पिछले महीने यानी अगस्त में एसआईपी के जरिए 32,297 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। आंकड़ों के मुताबिक इक्विटी आधारित योजनाओं में सितंबर के दौरान आया 38,306 करोड़ रुपये का शुद्ध इनफ्लो चालू वित्त वर्ष में अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले अप्रैल के महीने में इक्विटी योजनाओं ने 38,440 करोड़ रुपये का शुद्ध प्रवाह आकर्षित किया था।
बाजार की गिरावट को खरीदारी के मौके में बदला
शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ने के बावजूद घरेलू निवेशकों ने अनुशासित रुख दिखाया। इन्क्रेड मनी में म्यूचुअल फंड के सीईओ नितिन अग्रवाल ने बताया कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव में तेजी आने के बाद भी हर गिरावट को नए निवेश के अवसर के रूप में लिया गया, जिससे फंड फ्लो में भारी इजाफा देखने को मिला। वहीं मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया में रिसर्च हेड हिमांशु श्रीवास्तव के अनुसार, महीने के दौरान शेयर बाजार में नरमी आने और एफपीआई की ओर से दोबारा बिकवाली का दौर शुरू होने के बावजूद निवेश का यह मजबूत प्रवाह काफी उत्साहजनक संकेत देता है।
स्मॉल कैप और मिड कैप स्कीमों में आई पूंजी की बाढ़
इक्विटी सेगमेंट के भीतर निवेशकों की पहली पसंद छोटी और मझोली कंपनियां बनी रहीं। स्मॉल कैप फंड कैटेगरी में सबसे ज्यादा 9,039 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज हुआ, जो अगस्त में आए 7,973 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है। इसके ठीक बाद मिड कैप फंड्स का स्थान रहा, जहां सितंबर में 7,835 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि पिछले महीने यह आंकड़ा 6,989 करोड़ रुपये रहा था। इन दोनों श्रेणियों ने मिलकर महीने के दौरान पूरे इक्विटी इनफ्लो में लगभग 44 प्रतिशत की हिस्सेदारी निभाई।
फ्लेक्सी कैप में रुचि कायम और लार्ज कैप में तीन महीने बाद लौटा प्रवाह
विविध पोर्टफोलियो वाले फ्लेक्सी कैप फंड्स में भी निवेशकों ने जोरदार दिलचस्पी दिखाई और इस श्रेणी में 6,702 करोड़ रुपये की नई पूंजी आई। वहीं दूसरी ओर, बड़ी कंपनियों के शेयरों वाले लार्ज कैप फंड्स में बीते 3 महीनों में पहली बार सकारात्मक रुख देखने को मिला, जहां 859 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। बाजार में नरमी की वजह से निवेशकों को बेहतरीन वित्तीय गुणवत्ता वाली दिग्गज कंपनियों के शेयरों में वाजिब मूल्यांकन पर प्रवेश करने का अच्छा अवसर मिला।



















