घरेलू शेयर बाजार के लिए शुक्रवार, 17 जुलाई का दिन एक बार फिर सतर्कता भरा रह सकता है। निवेशक इस समय तीन मोर्चों पर एक साथ नजर गड़ाए हुए हैं, वैश्विक स्तर की अनिश्चितता, चल रहा पहली तिमाही (Q1 FY27) का नतीजों का सीजन और पश्चिम एशिया में बनते-बिगड़ते भू-राजनीतिक हालात। जानकारों का मानना है कि प्रमुख सूचकांक एक तय दायरे के भीतर ही घूमते रह सकते हैं और असली हलचल किसी खास शेयर में आई खबर पर टिकी रहेगी।
यह अनुमान गुरुवार के उस कारोबारी सत्र के बाद आया है, जिसमें बाजार लगभग सपाट बंद हुआ था। निफ्टी 50 करीब-करीब जहां का तहां रहते हुए 24,072 पर बंद हुआ, यानी महज 0.02% की मामूली गिरावट। वहीं BSE सेंसेक्स भी बिना किसी बड़े बदलाव के 77,186 के स्तर पर टिका रहा। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स) और मीडिया जैसे कुछ क्षेत्रों में खरीदारी जरूर दिखी, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये में कमजोरी की लगातार बनी चिंता के चलते व्यापक बाजार में बढ़त सीमित ही रही।
नतीजों के सीजन पर टिकी निगाहें
वैश्विक संकेतों के अलावा निवेशकों का सारा ध्यान इस समय कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगा। खासकर सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT क्षेत्र के शेयर चर्चा में रहने वाले हैं, क्योंकि विप्रो और टेक महिंद्रा अपने ताजा तिमाही नतीजे घोषित कर चुकी हैं। जैसे-जैसे और कंपनियां जून तिमाही के अपने आंकड़े सामने रखेंगी, वैसे-वैसे कारोबार में शेयर-दर-शेयर आधार पर उठापटक हावी रहने के आसार हैं।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड में वेल्थ मैनेजमेंट के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, भारतीय शेयर कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच सपाट से मिलेजुले रुख के साथ कारोबार कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "Q1FY27 का नतीजों का सीजन रफ्तार पकड़ रहा है, ऐसे में शेयर-केंद्रित हलचल का बोलबाला रहने की संभावना है। विप्रो और टेक महिंद्रा के नतीजों के बाद IT क्षेत्र फोकस में रहेगा।"
निफ्टी अब भी कंसोलिडेशन के दायरे में
बजाज ब्रोकिंग रिसर्च का आकलन है कि गुरुवार के सत्र को एक छोटी मंदी वाली कैंडल के साथ खत्म करने के बाद निफ्टी अब भी कंसोलिडेशन यानी ठहराव के दौर से गुजर रहा है। ब्रोकरेज का मानना है कि सूचकांक एक साफ-साफ तय दायरे के भीतर ही चल रहा है और अभी तक किसी निर्णायक दिशा की ओर बड़ा ब्रेकआउट देखने को नहीं मिला है।
ब्रोकरेज ने कहा, "जैसा अनुमान था, सूचकांक एक दायरे में ठहरा हुआ दिख रहा है। हमें उम्मीद है कि यह हालिया ठहराव को आगे बढ़ाएगा और 23,800 से 24,350 के दायरे में कारोबार करेगा।"
इस विश्लेषण के अनुसार, तात्कालिक सपोर्ट यानी सहारे का क्षेत्र 24,000 से 23,950 के आसपास है, जिसमें पिछले शुक्रवार का गैप एरिया और सोमवार का निचला स्तर शामिल है। जब तक सूचकांक इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक जानकार इसके ठहराव के ऊपरी छोर की तरफ रिकवरी की उम्मीद कर रहे हैं।
बजाज ब्रोकिंग के शब्दों में, "हमें उम्मीद है कि सूचकांक इसी स्तर के ऊपर टिका रहेगा और 24,250 से 24,350 के स्तर की ओर पुलबैक दिखाएगा, जो हालिया कंसोलिडेशन दायरे का ऊपरी बैंड है। अल्पावधि का सपोर्ट 23,800 के स्तर पर है, जो पिछले चार हफ्तों के लगभग एक जैसे निचले स्तर और 50 दिन के EMA का संगम है। वहीं 24,350 के ऊपर ब्रेकआउट ही मजबूती का संकेत देगा और 24,600 के स्तर की ओर तेजी का रास्ता खोलेगा, जो अप्रैल 2026 का ऊंचा स्तर है।"
बैंक निफ्टी पर दबाव कायम
गुरुवार के सत्र में बैंक निफ्टी भी दबाव में रहा और एक मंदी वाली कैंडल बनाई, क्योंकि कारोबारियों ने ऊंचे स्तरों के पास मुनाफावसूली की। बैंकिंग सूचकांक अब भी 58,000 के आंकड़े से नीचे बना हुआ है और करीब पांच हफ्तों से एक ही दायरे में इधर-उधर घूम रहा है।
बजाज ब्रोकिंग रिसर्च के अनुसार, बैंक निफ्टी इस समय 58,700 और 56,500 के बीच कंसोलिडेट कर रहा है और अगला बड़ा रुझान तय करने के लिए किसी एक तरफ निर्णायक ब्रेकआउट जरूरी है।
ब्रोकरेज ने कहा, "ऊपर की तरफ 58,700 का स्तर, जो जून का ऊंचा स्तर है, तात्कालिक अड़चन बना हुआ है। इस स्तर के ऊपर निर्णायक क्लोजिंग मौजूदा ठहराव से ब्रेकआउट की पुष्टि करेगी और आने वाले हफ्तों में तेजी का अगला दौर 59,300 और आखिरकार 60,000 के स्तर की ओर ले जा सकती है।"
नीचे की तरफ जानकारों का मानना है कि 56,500 से 56,000 का क्षेत्र मजबूत सपोर्ट बना हुआ है, क्योंकि यह 20-सप्ताह और 50-सप्ताह के EMA के साथ-साथ पिछले हफ्ते के निचले स्तर से भी मेल खाता है। यही वजह है कि यह बैंकिंग सूचकांक के लिए एक अहम मांग वाला क्षेत्र बन जाता है, जहां से खरीदारी लौटने की उम्मीद रहती है।
क्या रहेगा असर
कुल मिलाकर, दिन की चाल किसी बड़े रुझान से ज्यादा अलग-अलग शेयरों की खबरों से तय होती दिख रही है। कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की कमजोरी बाजार की धारणा पर भारी बनी हुई हैं, जबकि नतीजों का सीजन हर दिन नए मौके और जोखिम दोनों लेकर आ रहा है। ऐसे में निवेशकों के लिए दायरे के दोनों छोर, यानी सपोर्ट और रेजिस्टेंस, ही आने वाली दिशा का सबसे भरोसेमंद संकेत साबित हो सकते हैं।











