डीबीएस के अर्थशास्त्री राधिका राव और मो जी ने चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर अपने हालिया अनुमान जारी किए हैं, जिसके अनुसार देश की जीडीपी ग्रोथ पहली तिमाही के 5.0 फीसदी (साल-दर-साल) से धीमी होकर दूसरी तिमाही में 4.8 फीसदी तक सिमट सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का आर्थिक प्रदर्शन फिलहाल काफी असमान बना हुआ है, जिसमें कुछ क्षेत्र तो तेजी दिखा रहे हैं, लेकिन अन्य बड़े हिस्से संघर्ष कर रहे हैं।
औद्योगिक उत्पादन और निर्यात की स्थिति
चीन के औद्योगिक मोर्चे पर हल्की सकारात्मकता बनी हुई है, जहां उत्पादन वृद्धि अप्रैल के 4.5 फीसदी से मामूली बढ़कर जून में 4.6 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है। यह लचीलापन मुख्य रूप से बाहरी मांग के कारण बना हुआ है। वहीं, निर्यात के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून महीने में इसमें 20.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज किए जाने की संभावना है। इसका बड़ा श्रेय एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी वैश्विक मांग को जाता है, जो चीनी उत्पादों की खपत को मजबूती दे रही है।
घरेलू खपत और संपत्ति बाजार का संकट
निर्यात में तेजी के बावजूद, घरेलू अर्थव्यवस्था के भीतर कई चुनौतियां बरकरार हैं। जून 2026 में खुदरा बिक्री की वृद्धि दर घटकर 0.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके पीछे एक मुख्य कारण पिछले साल चलाई गई ट्रेड-इन सब्सिडी योजनाओं का उच्च आधार प्रभाव है, जिसने तुलनात्मक आंकड़ों को प्रभावित किया है। साथ ही, संपत्ति की कीमतों में लगातार जारी गिरावट ने आम परिवारों की संपत्ति को चोट पहुंचाई है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इसके चलते निकट भविष्य में उपभोक्ताओं का खर्च काफी कम रहने की संभावना है।
वैश्विक बाजारों और मुद्राओं पर असर
शुक्रवार को मुद्रा बाजार में जीबीपी/यूएसडी में मामूली मजबूती देखी गई और यह 1.3400 के स्तर से ऊपर टिका रहा। ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन और बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में और सख्ती की उम्मीदों ने ब्रिटिश पाउंड को सहारा दिया है। दूसरी ओर, मध्य पूर्व में तनाव में कमी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की कम होती उम्मीदों ने अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनाया है।
इसी बीच, यूरो/यूएसडी भी गुरुवार की बढ़त को बनाए रखने में विफल रहा और सप्ताह के अंत में 1.1420 के आसपास मामूली नुकसान के साथ कारोबार कर रहा है। चूंकि फिलहाल कोई बड़ा आर्थिक डेटा आने वाला नहीं है, इसलिए अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर बनी अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क रख रही है।
सोने और अमेरिकी बाजार की हलचल
सोना भी शुक्रवार को 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास एक सीमित दायरे में फंस गया। मध्य पूर्व के संघर्ष को लेकर बनी वैश्विक अनिश्चितता ने इस कीमती धातु की तेजी को सीमित कर दिया है, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हो रही बढ़ोतरी ने भी सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा है।
आने वाले सप्ताह में अमेरिकी मुद्रास्फीति की रिपोर्ट और वॉर्श की गवाही बाजार के लिए मुख्य आकर्षण होंगे। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और चीन के जीडीपी डेटा पर निवेशकों की नजर रहेगी, जो दूसरी तिमाही के वास्तविक प्रभाव को स्पष्ट करेंगे। इसके अतिरिक्त, बाजार की स्थितियां बदलती रही हैं; जुलाई की शुरुआत में दिसंबर में दर वृद्धि को मुख्य आधार माना जा रहा था, लेकिन 57 हजार के पेरोल डेटा और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा बंद होने की खबरों ने इन अटकलों को फिर से जिंदा कर दिया है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की जून की बैठक के मिनट्स एक ऐसी दुनिया का चित्रण करते हैं, जो अब तेजी से बदल चुकी है।











