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मजबूत डॉलर और सेंट्रल बैंकों की जबरदस्त खरीद के बीच सोने में उतार चढ़ावबाज़ार
3 घंटे पहले· 2

मजबूत डॉलर और सेंट्रल बैंकों की जबरदस्त खरीद के बीच सोने में उतार चढ़ाव

होर्मुज जलसंधि को लेकर बढ़ते तनाव ने डॉलर को सहारा दिया है, जिससे सोने पर दबाव है, लेकिन फेड की ब्याज दर बढ़ने की घटती उम्मीदों और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीद ने गिरावट को थाम रखा है।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 7 मिनट पढ़ें AI के लिए
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GC━SMA20 ━SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण6 जुलाई 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

GC अभी $4,163 पर है, जबकि EMA20 $4,186, EMA50 $4,365 और EMA200 $4,278 पर हैं।

आगे संभावित चाल

तेजी संभवतः EMA20 ($4,186) के पास थम सकती है।

सोने के तेजड़िए इस समय थोड़ा सतर्क होकर चल रहे हैं। पश्चिम एशिया में होर्मुज जलसंधि को लेकर फिर बढ़े तनाव ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की मांग को हवा दी है, और मजबूत होता डॉलर सीधे तौर पर सोने की चमक पर भारी पड़ रहा है। इसके बावजूद बाजार में गिरावट सीमित बनी हुई है, क्योंकि फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीदें कमजोर पड़ी हैं और सेंट्रल बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। तकनीकी तस्वीर भी बताती है कि हर गिरावट पर खरीदारों की एक बड़ी जमात मौजूद है।

लाइव आंकड़ों के मुताबिक इस समय सोना 4,163 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 4,113 डॉलर से 1.21 प्रतिशत ऊपर है। यानी नीचे की ओर दबाव दिखने के बावजूद भाव पिछले सत्र के मुकाबले हरे निशान में है। 52 हफ्ते का दायरा 3,264 डॉलर से 5,586 डॉलर तक रहा है, और मौजूदा सत्र में कारोबार 20 दिन के औसत से करीब 15.89 गुना ज्यादा रहा, जो बाजार में भारी हलचल का संकेत देता है।

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होर्मुज का तनाव और डॉलर की वापसी

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता अब भी नाजुक बना हुआ है, और होर्मुज जलसंधि को लेकर तनाव कम होने के बजाय बढ़ता दिख रहा है। ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। इसी सिलसिले में चीन में ईरान के राजदूत ने शनिवार को कहा कि तेहरान इस अहम जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर नया सेवा शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। दूसरी ओर अमेरिका ने इस जलसंधि के इस्तेमाल के बदले ईरान द्वारा जहाजों से शुल्क वसूलने के विचार को सिरे से खारिज कर दिया है।

इस खींचतान की वजह से भू-राजनीतिक जोखिम का दबाव बना हुआ है। नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में इसी जोखिम ने डॉलर को दोबारा मजबूती दी है, और जब डॉलर चढ़ता है तो डॉलर में ही आंका जाने वाला सोना कमजोर पड़ जाता है। यही वजह है कि सोमवार को सोना दो हफ्ते के ऊपरी स्तर से नीचे फिसला है। यह भाव इसी सोमवार को थोड़ी देर के लिए 4,200 डॉलर के ऊपर तक पहुंचा था, लेकिन अब यह 4,150 डॉलर के नीचे कुछ मजबूती दिखा रहा है। हालांकि इसका रुझान नकारात्मक बना हुआ है और लगातार तीन दिन की तेजी का सिलसिला टूट गया है।

फेड की घटती उम्मीदें गिरावट को थाम रहीं

डॉलर की मजबूती को एक हद के आगे बढ़ने से रोकने वाली सबसे बड़ी वजह यह है कि बाजार अब फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीदें घटा रहा है। जब दरें बढ़ने के आसार कम होते हैं तो डॉलर को उतना सहारा नहीं मिल पाता, और इसका सीधा फायदा सोने को मिलता है। इसी वजह से हर गिरावट पर खरीदार सक्रिय हो जाते हैं और भाव को नीचे बहुत दूर तक नहीं जाने देते।

सेंट्रल बैंक लगातार भर रहे सोने का भंडार

सोने की बुनियादी मांग को लेकर तस्वीर बेहद मजबूत है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के एक सर्वे में पिछले हफ्ते सामने आया कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंक वित्तीय संकट, महंगाई और भू-राजनीतिक जोखिम से बचाव के लिए तेजी से सोने की ओर रुख कर रहे हैं। सर्वे में शामिल करीब 90 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अगले एक साल में वैश्विक सेंट्रल बैंकों का सोने का भंडार और बढ़ेगा।

इसके अलावा यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की ताजा रिजर्व रिपोर्ट में यह अहम बात सामने आई कि वैश्विक भंडार आवंटन में सोने ने अब आधिकारिक तौर पर अमेरिकी ट्रेजरी को पीछे छोड़ दिया है। यानी अब कई देश अमेरिकी बॉन्ड से ज्यादा भरोसा सोने पर जता रहे हैं। इसी कड़ी में पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) ने मई में 3,20,000 औंस सोना और खरीदा, जो लगातार 19वें महीने उसके सोने के भंडार में हुई बढ़ोतरी है। इतनी लगातार खरीद यह बताती है कि बड़े खरीदार मौजूदा भाव पर भी सोना जमा करते जा रहे हैं।

तकनीकी नक्शा: कहां सहारा, कहां रुकावट

तकनीकी नजरिए से देखें तो 4,164 डॉलर के आसपास मौजूद 23.6 प्रतिशत फिबोनाची स्तर के नीचे कमजोरी आने पर 100 अवधि के एसएमए के पास सहारा मिलने की उम्मीद है। यह स्तर करीब 4,147 डॉलर पर एक फर्श का काम करेगा। अगर भाव इसे मजबूती से तोड़ता है तो 3,940 डॉलर वाला ढांचागत निचला स्तर सामने आ सकता है।

ऊपर की ओर पहली रुकावट 38.2 प्रतिशत रिट्रेसमेंट यानी करीब 4,302 डॉलर पर है। इसके बाद 50 प्रतिशत रिट्रेसमेंट लगभग 4,415 डॉलर और 61.8 प्रतिशत फिबोनाची करीब 4,527 डॉलर पर है। और ऊपर 78.6 प्रतिशत फिबोनाची 4,686 डॉलर पर है, जो 4,889 डॉलर यानी अप्रैल के ऊपरी स्तर से पहले बड़े तेजी वाले दायरे को तय करता है।

लाइव तकनीकी संकेतक भी मिलीजुली तस्वीर दिखा रहे हैं। 14 दिन का RSI 45 पर है, जो न ज्यादा बिकवाली और न ज्यादा खरीदारी वाला तटस्थ इलाका है। MACD इस समय -101.92 पर है जबकि उसका सिग्नल -112.27 पर है, यानी हिस्टोग्राम 10.35 के साथ हल्का तेजी वाला संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेज की बात करें तो EMA20 करीब 4,186 डॉलर और EMA50 करीब 4,365 डॉलर पर है, जबकि लंबी अवधि का रुझान अब भी नरम बना हुआ है। दिन के कारोबार के लिहाज से पिवट 4,171 डॉलर पर है, ऊपर की रुकावटें 4,207 और 4,252 डॉलर पर, तथा नीचे के सहारे 4,126 और 4,089 डॉलर पर हैं। (इस खबर का तकनीकी विश्लेषण एक AI टूल की मदद से तैयार किया गया है।)

ब्याज दरें सोने को कैसे हिलाती हैं

सोने और डॉलर की इस पूरी कहानी की जड़ में ब्याज दरें हैं, इसलिए इनका गणित समझना जरूरी है। बैंक और वित्तीय संस्थान कर्ज लेने वालों से ब्याज वसूलते हैं और जमाकर्ताओं को ब्याज देते हैं। ये दरें उस आधार दर से तय होती हैं जो सेंट्रल बैंक अर्थव्यवस्था की हालत देखकर घटाते बढ़ाते हैं। ज्यादातर सेंट्रल बैंकों की जिम्मेदारी कीमतों में स्थिरता बनाए रखना होती है, जिसका मतलब आम तौर पर करीब 2 प्रतिशत की मूल महंगाई दर को साधना होता है।

अगर महंगाई इस लक्ष्य से नीचे चली जाए तो सेंट्रल बैंक कर्ज को सस्ता करने और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए आधार दर घटा सकता है। वहीं अगर महंगाई 2 प्रतिशत से काफी ऊपर पहुंच जाए तो आम तौर पर सेंट्रल बैंक उसे काबू में करने के लिए दरें बढ़ा देता है। ऊंची ब्याज दरें आम तौर पर किसी देश की मुद्रा को मजबूत करती हैं, क्योंकि तब दुनिया भर के निवेशकों को अपना पैसा वहां रखना ज्यादा फायदेमंद लगता है।

दूसरी ओर ऊंची दरें कुल मिलाकर सोने की कीमत पर बोझ बन जाती हैं। इसकी वजह यह है कि सोना अपने पास रखने पर ब्याज नहीं मिलता, जबकि उसी पैसे को ब्याज देने वाली संपत्ति में लगाया जा सकता था। जब दरें ऊंची होती हैं तो आम तौर पर डॉलर चढ़ता है, और चूंकि सोना डॉलर में आंका जाता है, इससे सोना सस्ता पड़ जाता है। फेड फंड्स रेट वह रातोंरात दर है जिस पर अमेरिकी बैंक आपस में एक दूसरे को उधार देते हैं। इसे फेडरल रिजर्व अपनी FOMC बैठकों में एक दायरे के रूप में तय करता है, जैसे 4.75 प्रतिशत से 5.00 प्रतिशत, और इसमें ऊपरी सीमा (यानी इस उदाहरण में 5.00 प्रतिशत) को ही आम तौर पर बताया जाता है। आगे की दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों पर सीएमई फेडवॉच टूल नजर रखता है, और यही उम्मीदें तय करती हैं कि बाजार फेड के अगले कदम से पहले कैसा बर्ताव करेंगे।

बाकी बाजारों पर भी असर

होर्मुज के तनाव और मजबूत डॉलर की छाया बाकी बाजारों पर भी दिखी। ब्रिटिश पाउंड सोमवार को डॉलर के मुकाबले हल्का फिसला और अपनी सात दिन की तेजी को थामने की कोशिश करता दिखा। GBP/USD जोड़ी लिखे जाने के समय करीब 1.3340 पर थी, जो पिछले हफ्ते के 1.3387 के ऊपरी स्तर से नीचे है, हालांकि नजदीकी रुझान अब भी तेजी वाला बना हुआ है। इसी तरह EUR/USD जोड़ी सोमवार को यूरोपीय सत्र में हल्की कमजोर होकर 1.1400 की ओर बढ़ी, क्योंकि नकारात्मक साप्ताहिक बंदी के बाद डॉलर ने मजबूती पकड़ी। पश्चिम एशिया की चिंताएं और USD/JPY की तेजी डॉलर को सहारा दे रही हैं।

क्रिप्टो बाजार में डॉजकॉइन (DOGE) की कीमत 0.0770 डॉलर के करीब पहुंच गई और शुक्रवार को 4 प्रतिशत की उछाल के बाद पिछले तीन दिन से एक दायरे में सिमटी रही। पहली मीम कॉइन में खुदरा निवेशकों की दिलचस्पी घटती दिख रही है और DOGE डेरिवेटिव का वॉल्यूम गिरा है, जबकि ऑन चेन आंकड़े बताते हैं कि बड़ी वॉलेट वाले निवेशक, जिन्हें अक्सर व्हेल कहा जाता है, अपनी होल्डिंग बढ़ा रहे हैं। इस बीच सिंत्रा में बाजार फेडरल रिजर्व के अगले कदम के संकेत ढूंढने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें ज्यादातर यही पुष्टि मिली कि फेड चेयर केविन वॉर्श उन संकेतों को पढ़ना और मुश्किल बनाने के इरादे में हैं।

इसका आप पर असर

  • निवेशकों के लिए: होर्मुज तनाव से मजबूत हुआ डॉलर सोने पर दबाव डाल रहा है, लेकिन फेड की घटती दर उम्मीदें और सेंट्रल बैंकों की खरीद हर गिरावट पर सहारा दे रही हैं।
  • भारत में: गहने और सिक्के खरीदने वालों के लिए वैश्विक भाव में यह उतार चढ़ाव सीधे घरेलू सोने की कीमत तय करता है, इसलिए हर बड़ी गिरावट खरीद का मौका बन सकती है।

सवाल-जवाब

इस समय सोने का भाव क्या चल रहा है?
लाइव आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब 4,163 डॉलर पर है, जो पिछले बंद भाव 4,113 डॉलर से 1.21 प्रतिशत ऊपर है।
होर्मुज जलसंधि का सोने से क्या संबंध है?
होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव सुरक्षित निवेश माने जाने वाले डॉलर की मांग बढ़ाता है, और मजबूत डॉलर डॉलर में आंके जाने वाले सोने को नीचे खींचता है।
ईरान ने क्या नई योजना बताई है?
चीन में ईरान के राजदूत ने कहा कि तेहरान होर्मुज जलसंधि से गुजरने वाले जहाजों पर नया सेवा शुल्क लगाने की योजना बना रहा है, जिसे अमेरिका ने खारिज कर दिया है।
सेंट्रल बैंक कितना सोना खरीद रहे हैं?
पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने मई में 3,20,000 औंस सोना और खरीदा, जो लगातार 19वें महीने बढ़ोतरी है, और सर्वे में करीब 90 प्रतिशत लोगों को भंडार और बढ़ने की उम्मीद है।
सोने के लिए अहम तकनीकी स्तर कौन से हैं?
नीचे 4,147 डॉलर के पास सहारा और उसके टूटने पर 3,940 डॉलर का स्तर है, जबकि ऊपर 4,302, 4,415, 4,527 और 4,686 डॉलर पर रुकावटें हैं।
फेड की घटती दर उम्मीदों का क्या असर है?
दरें बढ़ने के आसार घटने से डॉलर को कम सहारा मिलता है, जिससे सोने की गिरावट सीमित रहती है और गिरावट पर खरीदार सक्रिय हो जाते हैं।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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