ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना द्वारा की गई हालिया बमबारी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र उछाल देखने को मिल रहा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। इस सैन्य कार्रवाई के साथ ही अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर दी गई पिछली छूटों को रद्द करते हुए फिर से सख्त प्रतिबंध लागू करने का निर्णय लिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने भारत में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की दरों में अपेक्षित कमी की संभावनाओं पर पूर्णविराम लगा दिया है।
बाजार पर हमले का असर
अमेरिकी सैन्य हमलों की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया। शुरुआती कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड में चार प्रतिशत तक की तेजी देखी गई, हालांकि बाद में इसमें मामूली राहत महसूस की गई। इसके बावजूद, ब्रेंट क्रूड 2.81 प्रतिशत बढ़कर 74.22 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) भी पीछे नहीं रहा और 2.91 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72.49 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
तनाव की पृष्ठभूमि और अमेरिकी चेतावनी
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तीन अलग-अलग जहाजों पर हुए हमलों को अमेरिका ने पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया था। अमेरिकी अधिकारियों ने इन हमलों के बाद ईरान को गंभीर परिणामों की चेतावनी दी थी, जिसके बाद तनाव अपने चरम पर पहुंच गया और अंततः अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर इन हमलों की पुष्टि की है और एक्स पर साझा की गई जानकारी में बताया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाए जाने के विरोध में ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर बमबारी की गई है।
आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक चिंताएं
ऐतिहासिक रूप से, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के समय कच्चे तेल के दाम काफी अस्थिर रहे हैं। इससे पूर्व जब दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति बनी थी, तो कच्चे तेल की कीमतें 73 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। बाद के समय में शांति समझौते होने पर स्थिति सामान्य हुई और कीमतें पुनः स्थिर स्तर पर लौटीं। दुनिया भर के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज़ जलडमरूमध्य के संकरे रास्ते से गुजरता है। इस इलाके में तनाव बढ़ने का सीधा अर्थ है वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) का बाधित होना। इसी आशंका के कारण बाजारों में तेल की उपलब्धता को लेकर डर व्याप्त है, जिसने कीमतों में अचानक आग लगा दी है और दाम तेजी से ऊपर जा रहे हैं।











