जोहोर चुनाव परिणाम और वैश्विक तनाव का बाजार पर असर: जानिए क्या है स्थितिबाज़ार
2 घंटे पहले· 1

जोहोर चुनाव परिणाम और वैश्विक तनाव का बाजार पर असर: जानिए क्या है स्थिति

जोहोर में बरिसन नेशनल की जीत से नीतिगत निरंतरता बनी हुई है, जबकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने बाजारों को प्रभावित किया है।

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तकनीकी विश्लेषण13 जुलाई 2026

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

CL का RSI 53 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

ओसीबीसी के रणनीतिकारों सिम मोह सियोंग और क्रिस्टोफर वोंग के अनुसार, मलयेशिया के जोहोर में बरिसन नेशनल की शानदार जीत से राजनैतिक गतिशीलता तो मजबूत हुई है, लेकिन इससे संघीय नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। मलयेशियन रिंगित (MYR) पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है। बरिसन नेशनल ने जोहोर की कुल 56 सीटों में से 48 पर कब्जा जमाया, जो पिछली बार की 40 सीटों से अधिक है, जबकि पकातन हरापन को केवल आठ सीटें मिलीं। हालांकि यह परिणाम अपेक्षित था, लेकिन इसने संघीय गठबंधन सरकार में यूएमएनओ की सौदेबाजी की शक्ति को बढ़ा दिया है। रिंगित के लिए फिलहाल दोतरफा जोखिम बने हुए हैं, जिसमें दैनिक चार्ट पर मंदी का रुझान है। मौजूदा समय में 4.0540 और 4.0320 के स्तर पर समर्थन मौजूद है, जबकि 4.0810 और 4.0980 के स्तर पर प्रतिरोध बना हुआ है। अब बाजार की नजरें 1 अगस्त को होने वाले नेगेरी सेमबिलन चुनावों पर टिकी हैं, जहां अगर पकातन हरापन का प्रदर्शन कमजोर रहता है, तो रिंगित में अल्पकालिक अनिश्चितता बढ़ सकती है।

वैश्विक बाजार और कमोडिटी में हलचल

बाजारों के लिए सप्ताह की शुरुआत काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। मध्य पूर्व में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ गया है, जिसका असर मुद्रा और कमोडिटी बाजारों पर साफ दिख रहा है। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है और यह तीन दिन के निचले स्तर 1.3350 के आसपास पहुंच गया है। इसी तरह यूरो (EUR/USD) भी 1.1380 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। डॉलर में आई मजबूती ने इन दोनों मुद्राओं को नीचे धकेला है। सोना भी इस दबाव से अछूता नहीं है और इसने 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ दिया है।

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कच्चे तेल में भारी तेजी

कच्चे तेल (CL=F) की कीमतों में करीब 10.64 प्रतिशत का उछाल आया है और यह वर्तमान में 79.01 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, यह 79.01 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जबकि इसका पिछला बंद भाव 71.41 डॉलर था। बाजार में इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां और ईरानी शासन द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का दावा है। तकनीकी रूप से, कच्चे तेल में तेजी का रुझान बना हुआ है। इसका 14-दिन का आरएसआई (RSI) 53 पर है, जो तटस्थ स्थिति दिखाता है। तकनीकी संकेतकों में एमएसीडी (MACD) बुलिश है और कीमत ईएमए20 (EMA20) के ऊपर बनी हुई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जो 'क्रूड ऑयल फाइंड्स अ टोल बूथ वेयर इट्स सीजफायर यूज्ड टू बी' जैसी स्थितियों को जन्म दे रहा है। निवेशकों को आगामी अमेरिकी सीपीआई डेटा और चेयर वॉर्श की गवाही का इंतजार है, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

जोहोर चुनाव का मलयेशियन रिंगित पर क्या असर हुआ?
बरिसन नेशनल की जीत ने नीतिगत निरंतरता सुनिश्चित की है, इसलिए रिंगित पर इसका असर फिलहाल सीमित है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी क्यों आई?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की खबरों के कारण कच्चे तेल की कीमतें करीब 10.64% बढ़ गई हैं।
सोने की कीमत पर क्या असर दिखा?
डॉलर में मजबूती और वैश्विक तनाव के कारण सोना 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे गिर गया है।
अगली बड़ी घटना जिस पर बाजार की नजर है?
बाजार अब आगामी अमेरिकी सीपीआई डेटा और चेयर वॉर्श की गवाही पर नजर रखे हुए है।

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