दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार ने साल 2026 में अपने निवेशकों को ऐसा उतार-चढ़ाव दिखाया, जो किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं है। साल की शुरुआत में जब दुनियाभर के बाजारों पर दबाव बना हुआ था, तब कॉस्पी लगातार ऊपर की ओर छलांग लगा रहा था। हालत यह हो गई कि दक्षिण कोरिया कुछ ही समय में दुनिया का सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला बाजार बन गया। लेकिन जून बीतते ही तस्वीर पूरी तरह पलट गई और एक महीने से भी कम वक्त में कॉस्पी 30 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया।
शुरुआती तेजी इतनी जबरदस्त थी कि इसने रिकॉर्ड ही बना डाला। जून के आखिर तक कॉस्पी में करीब 110 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की जा चुकी थी। निवेशकों को लगने लगा था कि अब उनके पास पैसों की बाढ़ आने वाली है। ठीक इसी वक्त इंटरनेशनल मार्केट और दुनिया के भूराजनैतिक हालात का दबाव इस बाजार पर पड़ने लगा। जुलाई की शुरुआत होते ही कॉस्पी का इंडेक्स लगातार फिसलने लगा और नौबत यहां तक आ गई कि लोअर सर्किट लगने की वजह से ट्रेडिंग तक रोकनी पड़ी।
कितनी तेज रही गिरावट
13 जुलाई का दिन बाजार के लिए सबसे बुरा साबित हुआ, जब कॉस्पी में एक ही दिन में 9 फीसदी तक की गिरावट आ गई। इस भारी गिरावट के चलते लोअर सर्किट लगा और कारोबार रोक दिया गया। इससे पहले 8 जुलाई को भी बाजार 5 फीसदी से ज्यादा टूट चुका था। जुलाई में अब तक कॉस्पी में करीब 30 फीसदी की गिरावट दर्ज हो चुकी है। इसके बावजूद एक दिलचस्प बात यह है कि पहले पखवाड़े के खत्म होने तक भी कॉस्पी का पिछले साल के मुकाबले रिटर्न 60 फीसदी से ऊपर बना हुआ है। यही वजह है कि इतनी गिरावट के बाद भी कॉस्पी आज दुनिया का सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला बाजार बना हुआ है।
तेजी के पीछे की वजहें
इस बाजार की ऐतिहासिक उड़ान के पीछे कई ठोस कारण रहे। जून में AI की जोरदार बूम की वजह से सेमीकंडक्टर कंपनियों की मांग आसमान छूने लगी, जिसका सीधा फायदा सैमसंग जैसी कोरियाई कंपनी को मिला। चिप की इस तेज डिमांड के दम पर सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। इसके अलावा दक्षिण कोरिया में हुए कॉरपोरेट गवर्नेंस सुधारों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया, जिससे बाजार में और तेजी आई।
कॉस्पी में गिरावट के मुख्य कारण
- चीन की कंपनी डीपसीक ने अपनी जरूरत की चिप खुद बनाने का ऐलान कर दिया। इस फैसले से कोरियाई चिप कंपनियों पर दबाव बढ़ गया और कॉस्पी तेजी से नीचे आने लगा।
- चिप बाजार पर बने इसी दबाव के चलते AI और चिप कंपनियों के शेयरों में तेज मुनाफावसूली शुरू हो गई।
- जून में सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी कंपनियां जमकर निवेश बटोर रही थीं, लेकिन जुलाई में इन पर लगातार दबाव बना रहा और भारी बिकवाली ने पूरे इंडेक्स को नीचे खींच लिया।
- मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव गहराता दिख रहा है और ईरान तथा अमेरिका दोबारा युद्ध में उतर पड़े हैं, जिसका असर कॉस्पी पर साफ दिख रहा है।
- अमेरिकी बाजार में भी ब्याज दरों और महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है, जिसका सीधा दबाव कोरियाई बाजार पर पड़ा है।
बियर मार्केट में फिसला बाजार
दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार जून में एक समय 9,114.55 अंकों के साथ अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था। इस समय यह उस स्तर से करीब 30 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है। इस भारी गिरावट के साथ ही कॉस्पी अब बियर मार्केट यानी लगातार गिरावट वाले जोन में पहुंच चुका है। विश्लेषकों का कहना है कि इस गिरावट के चलते कॉस्पी का बाजार पूंजीकरण करीब 1,700 ट्रिलियन वॉन यानी 1.25 ट्रिलियन डॉलर घट चुका है। भारतीय करेंसी में देखें तो यह रकम करीब 120 लाख करोड़ रुपये के आसपास बैठती है।











