दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार के लिए बुधवार का दिन बेहद भारी रहा. कारोबार के बीच में ही देश का प्रमुख इंडेक्स KOSPI करीब 7% तक फिसल गया. इस तेज गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI सेक्टर को लेकर बढ़ती बेचैनी रही. निवेशक इस बात को लेकर सशंकित हैं कि AI से जुड़ी कंपनियां और इस क्षेत्र में झोंका जा रहा भारी पैसा आगे चलकर उम्मीद के मुताबिक मुनाफा दे पाएगा या नहीं. यही डर मुनाफावसूली की लहर में बदल गया.
सबसे तगड़ी चोट सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को लगी. सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी दिग्गज चिप निर्माता कंपनियों के शेयर 8% से ज्यादा गिर गए. गौरतलब है कि ये दोनों कंपनियां दुनिया में AI मेमोरी चिप बनाने वाली टॉप कंपनियों में गिनी जाती हैं. ग्लोबल मार्केट की इस कमजोरी पर भारतीय निवेशकों की भी पैनी नजर है, क्योंकि विश्व के टेक सेक्टर में आने वाले किसी भी बड़े झटके की गूंज भारतीय आईटी और टेक शेयरों तक पहुंच सकती है.
AI को लेकर संदेह और बिकवाली का सिलसिला
बीते कुछ महीनों में AI क्षेत्र में जमकर निवेश हुआ है. लेकिन अब बाजार में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या कंपनियां इतने बड़े खर्च के बदले उतनी कमाई कर पाएंगी. इसी शक की वजह से टेक और चिप कंपनियों में बिकवाली और तेज हो गई. हालत यह हुई कि गिरावट इतनी तेज थी कि कोरिया एक्सचेंज को कुछ देर के लिए प्रोग्राम ट्रेडिंग पर रोक लगानी पड़ी. यह असर सिर्फ दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं रहा, अमेरिका की कई चिप कंपनियों के शेयर भी लुढ़के. इससे साफ है कि AI को लेकर घबराहट अब किसी एक देश का मसला नहीं रह गई है.
मेटा और एपल की खबरों से बढ़ा दबाव
कुछ ताजा कॉरपोरेट खबरों ने भी बाजार का मूड बिगाड़ने का काम किया. मेटा अपनी AI कंप्यूटिंग कैपेसिटी और मॉडल्स को क्लाउड के जरिए दूसरों तक पहुंचाने की नई रणनीति पर काम कर रही है. इस खबर से निवेशकों में यह आशंका गहरा गई कि आगे चलकर AI इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता जरूरत से ज्यादा हो सकती है.
दूसरी तरफ, एपल के चीनी सेमीकंडक्टर कंपनियों से चिप खरीदने की चर्चा ने भी दक्षिण कोरियाई चिप कंपनियों की मुश्किल बढ़ा दी. अमेरिकी बाजार में भी कई AI और चिप बनाने वाली कंपनियों के स्टॉक फिसले. माइक्रॉन के शेयर में 10.57% की गिरावट आई, AMD में 6.89% और इंटेल में 9.03% की गिरावट दर्ज हुई. डर यह है कि अगर बड़े ग्राहक दूसरे सप्लायर्स की ओर मुड़ जाते हैं, तो सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी कंपनियों के कारोबार पर सीधी चोट पड़ सकती है. यही वजह रही कि निवेशकों ने इन शेयरों से हाथ खींचना शुरू कर दिया.
भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने
इस साल दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार दुनिया के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल रहा है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी वजह चंद चुनिंदा चिप कंपनियां ही थीं. ऐसे में जैसे ही इन कंपनियों पर दबाव आता है, उसका असर पूरे बाजार पर साफ नजर आने लगता है. भारतीय निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि ग्लोबल टेक और AI सेक्टर का उतार-चढ़ाव बेहद तेजी से पलट सकता है. अगर AI इंडस्ट्री की रफ्तार मजबूत बनी रहती है, तो चिप कंपनियां दोबारा संभल सकती हैं. फिलहाल निवेशक इस क्षेत्र से मिलने वाले रिटर्न और लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर कहीं ज्यादा सतर्क दिख रहे हैं.













