जापान के अर्थव्यवस्था मंत्री मिनोरू किउची ने बुधवार को कहा कि मिडल ईस्ट की मौजूदा परिस्थितियों के कारण देश में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई में धीरे-धीरे वृद्धि होने की संभावना है। इस बीच विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन (USD/JPY) 0.12% की गिरावट के साथ 159.01 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
मिडल ईस्ट तनाव और जापानी अर्थव्यवस्था पर असर
जापान अपनी ऊर्जा और कच्चे तेल की जरूरतों के लिए काफी हद तक मध्य पूर्व के देशों से होने वाले आयात पर निर्भर करता है। मिडल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे ऊर्जा और आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ जाती है। इसी पृष्ठभूमि में अर्थव्यवस्था मंत्री किउची ने उपभोक्ता कीमतों में क्रमिक वृद्धि की उम्मीद जताई है।
बैंक ऑफ जापान और येन का बाजार व्यवहार
जापानी येन (JPY) दुनिया की सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली प्रमुख मुद्राओं में से एक है। येन का मूल्य काफी हद तक जापानी अर्थव्यवस्था के समग्र प्रदर्शन, बैंक ऑफ जापान (BoJ) की मौद्रिक नीति, अमेरिकी और जापानी सरकारी बॉन्ड की प्रतिफल दरों (yields) के अंतर और निवेशकों की जोखिम धारणा से निर्धारित होता है। BoJ के पास मुद्रा पर नियंत्रण बनाए रखने का अधिकार है, हालांकि अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ राजनीतिक संबंधों को देखते हुए वह मुद्रा बाजार में बार-बार हस्तक्षेप करने से परहेज करता है।
अल्ट्रा-लूज मौद्रिक नीति और यील्ड का अंतर
वर्ष 2013 से 2024 के बीच बैंक ऑफ जापान ने अत्यंत उदार यानी अल्ट्रा-लूज मॉनेटरी पॉलिसी को लागू रखा था। इस वजह से BoJ और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) सहित अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों के बीच एक बड़ा अंतर पैदा हो गया। अमेरिका और जापान के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड का यह बढ़ता अंतर अमेरिकी डॉलर को जापानी येन के मुकाबले मजबूत बनाता रहा। हालांकि, वर्ष 2024 में BoJ ने इस अल्ट्रा-लूज नीति को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए, जिससे यील्ड का यह अंतर कम होने लगा और येन को सहारा मिला।
सुरक्षित निवेश के रूप में येन की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में जापानी येन को एक सेफ-हेवन यानी सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। जब भी वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल या तनाव का माहौल बनता है, निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर येन में निवेश करना सुरक्षित समझते हैं। इस कारण संकट के समय अन्य मुद्राओं की तुलना में येन की विनिमय दर में मजबूती देखने को मिलती है।



















