भारत के बिजली क्षेत्र को ऋण देने वाली प्रमुख सरकारी कंपनियों पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) और आरईसी लिमिटेड के शेयरों में गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान जोरदार बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली द्वारा दोनों कंपनियों की रेटिंग घटाए जाने और उनके टार्गेट प्राइस में कटौती किए जाने के बाद निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर पड़ा है। इस मंदी के रुख के चलते पावर सेक्टर के इन दोनों बड़े वित्तीय संस्थानों के शेयर लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में नुकसान के साथ बंद होने की दिशा में आगे बढ़े। बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि लोन ग्रोथ में आ रही सुस्ती और व्यापक बिजली क्षेत्र में हो रहे क्रेडिट विस्तार के बीच बढ़ता अंतर निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण बना हुआ है।
मॉर्गन स्टेनली ने घटाई रेटिंग और टार्गेट प्राइस में की भारी कटौती
वैश्विक वित्तीय सेवा फर्म मॉर्गन स्टेनली ने पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और आरईसी दोनों के प्रति अपने रुख को अधिक सतर्क करते हुए रेटिंग को घटा दिया है। ब्रोकरेज ने दोनों कंपनियों को 'ओवरवेट' कैटेगरी से हटाकर 'इक्वल-वेट' रेटिंग में डाल दिया है। रेटिंग में इस बदलाव के साथ ही दोनों शेयरों के लिए तय किए गए मूल्य लक्ष्यों में भी बड़ी कटौती की गई है। मॉर्गन स्टेनली ने पीएफसी का टार्गेट प्राइस पहले के 510 रुपये से घटाकर 410 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। इसी तरह आरईसी के टार्गेट प्राइस को भी 430 रुपये से घटाकर 360 रुपये प्रति शेयर कर दिया गया है।
प्रतिशत के हिसाब से देखें तो पीएफसी के टार्गेट प्राइस में लगभग 20 प्रतिशत की भारी कटौती की गई है, जबकि आरईसी के मूल्य लक्ष्य में करीब 16 प्रतिशत की कमी की गई है। ब्रोकरेज फर्म का यह नया आकलन बताता है कि बिजली क्षेत्र में जिस लोन ग्रोथ की रिकवरी का निवेशक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, उसमें उम्मीद से अधिक समय लग सकता है। इस सतर्क दृष्टिकोण ने अल्पावधि में दोनों कंपनियों के शेयर प्रदर्शन पर दबाव बढ़ा दिया है।
20 अगस्त के कारोबारी सत्र में शेयरों का प्रदर्शन और उतार-चढ़ाव
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर 20 अगस्त को दोपहर 12:45 बजे पीएफसी का शेयर 2.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 365.35 रुपये पर कारोबार कर रहा था। गुरुवार के कारोबारी सत्र में शेयर 374.45 रुपये पर खुला था और दिन के दौरान 375.10 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचा। हालांकि, बिकवाली का दबाव बढ़ने पर शेयर फिसलकर 365.05 रुपये के निचले स्तर तक चला गया। शेयर में आई इस कमजोरी ने लगातार तीन दिनों से जारी मंदी के सिलसिले को और गहरा कर दिया है।
इसी तरह आरईसी के शेयरों में भी बिकवाली का रुझान देखा गया, जिससे पावर फाइनेंसिंग सेक्टर की इन दोनों दिग्गज कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में गिरावट आई है। तीन दिनों से जारी इस लगातार नुकसान से निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, क्योंकि बाजार अब ब्रोकरेज के उस आकलन पर ध्यान दे रहा है जिसमें आने वाली तिमाहियों में लोन बुक की रफ्तार धीमी रहने की आशंका जताई गई है।
पावर सेक्टर क्रेडिट विस्तार और लोन ग्रोथ में बढ़ता अंतर
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में जिस सबसे बड़े जोखिम बिंदु को रेखांकित किया गया है, वह पीएफसी और आरईसी की लोन ग्रोथ तथा भारत के समग्र बिजली क्षेत्र में हो रहे क्रेडिट विस्तार के बीच बढ़ता फासला है। एक तरफ जहां भारतीय बैंकिंग प्रणाली और अन्य वित्तीय संस्थान बिजली क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज में मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इन दोनों विशेष पावर फाइनेंसरों की लोन ग्रोथ में स्पष्ट रूप से सुस्ती देखी जा रही है।
ब्रोकरेज का कहना है कि ग्रोथ का यह अंतर उम्मीद से कहीं ज्यादा चौड़ा हो गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि कर्ज वितरण की गति में सुधार काफी धीमा और क्रमिक रहने वाला है। निवेशकों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि अगर लोन ग्रोथ कमजोर रहती है तो इससे कंपनियों की भविष्य की ब्याज आय और कुल लाभ में वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
आय, लाभप्रदता और परिसंपत्ति गुणवत्ता पर संभावित प्रभाव
पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और आरईसी जैसी संस्थाओं के लिए अपनी लोन बुक में सतत वृद्धि बनाए रखना बेहद आवश्यक होता है, ताकि उनकी शुद्ध ब्याज आय और लाभप्रदता का स्तर मजबूत बना रहे। यदि कर्ज वृद्धि में यह सुस्ती लंबी खिंचती है, तो कंपनियों के निकट भविष्य के आउटलुक पर दबाव बन सकता है। भले ही दोनों कंपनियों की परिसंपत्ति गुणवत्ता मजबूत और स्थिर बनी हुई है, लेकिन लोन बुक की सुस्त रफ्तार राजस्व विस्तार को सीमित कर सकती है।
बाजार के जानकार अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि आगामी तिमाहियों में दोनों कंपनियां अपनी लोन ग्रोथ को पुनर्जीवित करने के लिए क्या कदम उठाती हैं। जब तक बिजली क्षेत्र की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में नया ऋण वितरण गति नहीं पकड़ता, तब तक इन दोनों शेयरों में सुस्त चाल या सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव रहने की संभावना जताई जा रही है।



















