विदेशी मुद्रा बाजार में हाल के कारोबारी सत्रों के दौरान यूरो में एक मजबूत तेजी देखने को मिली है, जिससे यह साझा मुद्रा पिछले तीन महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा तरलता नीति में किए गए बदलावों के बाद अमेरिकी डॉलर में आई नरमी ने इस तेजी को प्राथमिक गति प्रदान की है। यूओबी (यूनाइटेड ओवरसीज बैंक) के वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि अल्पकालिक तकनीकी संकेतक ओवरब्रॉट स्थिति का संकेत दे रहे हैं, लेकिन बाजार का समग्र रुख काफी सकारात्मक बना हुआ है और यूरो का अगला लक्ष्य 1.1725 का स्तर हो सकता है।
EUR/USD का तकनीकी दृष्टिकोण और समर्थन स्तर
यूओबी के दैनिक बाजार विश्लेषण के अनुसार, यूरो ने पिछले कारोबारी सत्र में 0.89 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज की और 1.1677 के तीन महीने के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ। अपने 24 घंटे के दृष्टिकोण में, विश्लेषकों ने स्पष्ट किया कि इतनी तेज रैली के बाद चार्ट पर ओवरब्रॉट स्थितियां निर्मित हो चुकी हैं। इसके बावजूद, मजबूत मोमेंटम यह दर्शाता है कि यूरो में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि निकट भविष्य में यूरो का कारोबार 1.1635 से 1.1700 के दायरे में सीमित रह सकता है, और 1.1700 के स्तर से ऊपर एक निरंतर बढ़त की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है।
लंबी अवधि यानी एक से तीन सप्ताह के दृष्टिकोण की बात करें तो यूओबी के विश्लेषकों ने सोमवार 17 अगस्त को यूरो पर सकारात्मक रुख अपनाया था, जब स्पॉट दर 1.1570 पर थी। इसके बाद मंगलवार 18 अगस्त को जब स्पॉट दर 1.1580 पर पहुंची, तब विश्लेषकों ने संकेत दिया कि यूरो को 1.1655 और उससे आगे के स्तरों तक पहुंचने के लिए 1.1615 के स्तर को पार कर उस पर टिके रहना आवश्यक होगा। यूरो ने 1.1615 के स्तर को सफलतापूर्वक तोड़ा और 1.1679 के उच्च स्तर को छूते हुए 1.1677 पर बंद हुआ। मजबूत मोमेंटम को देखते हुए यूरो के 1.1725 के स्तर तक जाने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक यूरो 1.1600 के मजबूत समर्थन स्तर से ऊपर बना रहता है, तब तक सकारात्मक दृष्टिकोण कायम रहेगा। पूर्व में यह समर्थन स्तर 1.1525 पर स्थित था।
गुरुवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान EUR/USD 1.1700 के स्तर के ठीक नीचे एक बुलिश कंसॉलिडेशन चरण में प्रवेश कर गया। मई के अंत के बाद से अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद खरीदार अब नए दांव लगाने से पहले 1.1700 से पार जाने का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट के बाद अब स्थिरता देखी जा रही है, जिससे मुद्रा बाजार में सतर्कता का माहौल है।
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक योजना और डॉलर पर प्रभाव
अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी का मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का एक अप्रत्याशित नीतिगत निर्णय है। बुधवार को ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) के अनुसार दोपहर 12:32 बजे ट्रेजरी विभाग ने अपनी तरलता सहायता बायबैक योजनाओं के विस्तार की घोषणा की। इस निर्णय के तहत, 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष की परिपक्वता वाले क्षेत्रों में बॉन्ड बायबैक के आकार को दोगुना किया जाएगा, जिससे प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन कर दी जाएगी।
बायबैक संचालन का यह विस्तारित कार्यक्रम 9 सितंबर से प्रभावी होगा और 4 नवंबर तक चलेगा। ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक में इस वृद्धि ने फिक्स्ड इनकम बाजार में तरलता को बढ़ाया है, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई और अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना। जैसे-जैसे मुद्रा बाजार इस हस्तक्षेप के प्रभावों को अपना रहे हैं, डॉलर के बिकवालों ने अस्थायी विराम लिया है। बाजार सहभागियों की नजर अब अमेरिकी बेरोजगारी दावों के आंकड़ों और मिडिल ईस्ट में ईरान से जुड़ी भू-राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है।
ब्रिटिश पाउंड और अन्य यूरोपीय मुद्राओं की स्थिति
यूरो के अलावा, अन्य प्रमुख यूरोपीय मुद्राओं में भी डॉलर के रुख के अनुरूप बदलाव देखे गए हैं। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर (GBP/USD) की जोड़ी गुरुवार को यूरोपीय सत्र के दौरान 1.3600 के स्तर के आसपास कारोबार करती नजर आई। यह जोड़ी 11 मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर से पीछे हटने के बाद एक सीमित दायरे में बनी हुई है।
यूरो की तरह ही, पाउंड के मुकाबले डॉलर बेचने वाले निवेशक भी ट्रेजरी की बायबैक योजना के पूर्ण प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। बाजार सहभागी वॉशिंगटन से आने वाले आर्थिक आंकड़ों और मिडिल ईस्ट में तनाव से जुड़ी खबरों पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।
सोने के बाजार में हलचल और एफओएमसी मिनट्स
कीमती धातुओं के बाजार में, गुरुवार को एशियाई सत्र के दौरान सोने की कीमतों में मामूली गिरावट देखी गई और यह $4,500 के स्तर से नीचे आ गया। गिरावट के बावजूद, सोना जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब बना हुआ है। एफओएमसी (FOMC) की बैठकों के मिनट्स में सख्त रुख के संकेतों के बाद अमेरिकी डॉलर के 3 महीने के निचले स्तर से संभलने के कारण सोने की कीमतों पर मुनाफावसूली का दबाव देखा गया।
एफओएमसी मिनट्स के हॉकिश संकेतों से प्रेरित होकर निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बुलियन मार्केट में थोड़ी नरमी आई। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी बायबैक पहल के कारण बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने सोने में और अधिक नुकसान को रोक दिया। मिडिल ईस्ट में बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने भी सोने को एक सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन प्रदान किया है।
क्रिप्टो बाजार में रिकवरी और आल्टकॉइन्स का दृष्टिकोण
अमेरिकी ट्रेजरी बायबैक घोषणा और डॉलर की कमजोरी का सकारात्मक असर क्रिप्टोक्यूरेंसी बाजार पर भी देखने को मिला। रिपल (XRP), सोलाना (SOL) और कार्डानो (ADA) जैसे प्रमुख आल्टकॉइन्स गुरुवार को बढ़त के साथ स्थिर कारोबार करते दिखे। बाजार में तरलता की उम्मीदों से डिजिटल एसेट्स को सहारा मिला।
रिपल और सोलाना के लिए तकनीकी दृष्टिकोण आने वाले सत्रों में और अधिक बढ़त का संकेत दे रहा है। रिपल पिछले दिन 10 प्रतिशत के उछाल के बाद $1.0951 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, कार्डानो (ADA) के तकनीकी संकेतक हालिया बढ़त के खोने का जोखिम भी जता रहे हैं।



















